चीन से निपटने के लिए सेना ने बनाया टनल प्‍लान

सीमा पर चीन के बढ़ते दबदबे के चलते अब सेना ने सभी मौसम में इस्तेमाल मे लाए जाने वाले 17 टनल की मांग की है जिनमें से 9 को प्रथम प्राथमिकता दी गई है.

News18Hindi
Updated: November 14, 2017, 9:36 PM IST
चीन से निपटने के लिए सेना ने बनाया टनल प्‍लान
टनल निर्माण (getty image)
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Updated: November 14, 2017, 9:36 PM IST
सीमा पर चीन के बढ़ते दबदबे के चलते अब सेना ने सभी मौसम में इस्तेमाल मे लाए जाने वाले 17 टनल की मांग की है. इनमें से नौ को प्रथम प्राथमिकता दी गई है. इनमें दो मुख्य जगह लद्दाख और रुणाचल प्रदेश का तंवाग है.

भारत और चीन के बीच खड़ी हिमालय की चोटियों को लांघना तो बहुत मुश्किल है लेकिन इसको सुरंग के ज़रिए पार किया जा सकता है. सूत्रों की माने तो भारतीय सेना ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक के इलाक़ों के दर्रों पर 17 टनल बनाने की मांग की है. इनमें से नौ को प्रथम प्राथमिकता पर रखा गया है. उत्तरी सीमा पर मनाली लेह एक्सिस का काम चल रहा है.

इस एक्सिस पर 3 पास पर 3 टनल बनाए जाने है तो वहीं हर मौसम में इस्तेमाल में लाई जा सकने वाली टनल सड़क, ‘नीमू पदम धारचू एक्सिस’ पर 2 पास पर दो सुरंग बनाए जाने की मांग की गई है. इसे प्रथम प्राथमिकता पर रखा है.

वहीं पूर्वी कमान में तवांग एक्सेसिस पर सेला पास के नीचे से एक सुरंग बनाए जाने की मांग सेना ने की है जिसे पहली प्राथमिकता पर रखा गया है. इसी तवांग एक्सिस पर भलुकपौंग निचीपू पास पर सुरंग को दूसरी और बॉमडिला की सुरंग को तीसरी प्राथमिकता दी गई है इस पास के ज़रिए तवांग को सीधे जोड़ा जा सकेगा.

दरअसल साल के पांच महीने जब इन इलाक़ों में बर्फ़बारी के चलते यातायात पूरी तरह से बंद हो जाता है. ऐसे में सीमा पर सरहदों की सुरक्षा करने वाले जवानों तक हथियार गोली बारूद और रसद सड़क के रास्ते पहुंचा पाना मुश्किल हो जाता है. जंग की तैयारियों के लिहाज से भी इन इलाक़ों तक यातायात सुचारू रूप से चले तो इस तरह की ऑल वेदर रोड की ज़रूरत बढ़ जाती है.

रिटायर्ड मेजर जनरल एसपी सिन्हा बताते हैं कि इन 17 सुरंगों में बाकियों को प्राथमिकता के तौर पर दूसरे और तीसरे नंबर पर रखा गया है जो की कश्मीर घाटी में बनाई जानी है. साल 2005 में सरकार ने भारतीय चीनी सीमा पर सामरिक महत्व की 73 सड़के बानाने जाने की मंज़ूरी दी थी जिनका अधिकतर काम सीमा सड़क संगठन के पास है और उस पर काम ज़ोरों शोरों से चल भी रहा है.
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