लद्दाख में फिंगर क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी भारतीय सेना, भारत ने चीन के प्रस्ताव को ठुकराया: सूत्र

लद्दाख में फिंगर क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी भारतीय सेना, भारत ने चीन के प्रस्ताव को ठुकराया: सूत्र
भारत ने फिंगर क्षेत्र से समान दूरी पर पीछे हटने के चीनी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है (फाइल फोटो)

India-China Border Dispute: इस मामले में शीर्ष सैन्य कमांडरों (Military Commanders) ने भी अपने क्षेत्रीय कमांडरों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर किसी भी घटना या कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार होने के लिए कहा है. बल्कि भारतीय पक्ष (Indian Side) तो सीमा पर लंबे समय तक डटे रहने की तैयारी कर रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 7:22 PM IST
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नई दिल्ली. चीन (China) के साथ सीमा विवाद (Border Dispute) को सुलझाने के लिए चल रहे प्रयासों के बीच भारत ने पूर्वी लद्दाख (Easern Ladakh) में फिंगर क्षेत्र (Finger Area) से समान दूरी पर (Equidistantly) पीछे हटने के चीनी सुझाव को खारिज कर दिया है. कूटनीतिक स्तर की बातचीत (Diplomatic Level Talks) के बाद, दोनों पक्ष सीमा मुद्दे को सुलझाने के लिए सैन्य-स्तर की और वार्ताएं (Military-Level Talks) आयोजित करने पर भी काम कर रहे हैं. ऐसा उस सीमा विवाद (Boundary Issue) के निपटारे के लिए किया जा रहा है, जो तीन महीने से अधिक समय से चला आ रहा है.

इस दौरान, शीर्ष सैन्य कमांडरों (Military Commanders) ने भी अपने क्षेत्रीय कमांडरों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर किसी भी घटना या कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार होने के लिए कहा है. बल्कि भारतीय पक्ष (Indian Side) तो सीमा पर लंबे समय तक डटे रहने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों ने एएनआई को बताया, "चीनी पक्ष (Chinese Side) ने सुझाव दिया था कि भारत और चीन दोनों को फिंगर-4 क्षेत्र (Finger-4 area) से समान दूरी पर वापस हटना चाहिए. यह सुझाव भारतीय पक्ष ने स्वीकार नहीं किया."

भारत ने साफ किया अपना पक्ष- फिंगर क्षेत्र से पूरी तरह पीछे हटे चीनी सेना
फिलहाल, चीनी पैगोंग त्सो झील के पास फिंगर 5 के आसपास हैं और उन्होंने फिंगर 5 से फिंगर 8 तक पांच किलोमीटर से अधिक की दूरी पर बड़ी संख्या में सैनिकों और उपकरणों को तैनात किया हुआ है जिससे आगे अप्रैल-मई से पहले से चीनी बेस मौजूद हैं.
भारतीय पक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीनी सेना को फिंगर क्षेत्र से पूरी तरह से पीछे हटना चाहिए और अपने वास्तविक स्थान (पहले के स्थान) पर वापस जाना चाहिए.



भारत ने कड़ाई दिखाते हुए, चीन को कूटनीतिक तौर पर घेरा
सूत्रों ने कहा कि चीनी पक्ष के सुझाव को स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता था. भारत, चीन की ओर से 1993-1996 में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों का उल्लंघन करने के मुद्दे को भी उठा रहा है. इस समझौते में उन स्थानों पर किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाई गई है, जहां एलएसी की धारणा दोनों पक्षों के बीच भिन्न होती है.

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चीनियों ने फिंगर क्षेत्र में भी निर्माण किया है जहां भारतीय क्षेत्र फिंगर 8 तक फैला हुआ है. भारतीय पक्ष इस बात पर अडिग है कि चीन को पहले विघटन करना चाहिए और फिर दोनों पक्ष पूर्वी लद्दाख और देपसांग मैदानों और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्रों से विघटन किये जाने पर चर्चा कर सकते हैं.
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