UNHRC में भारत का जवाब- पाकिस्तान का हिंसा भरा रिकॉर्ड खुद गवाही देता है

News18Hindi
Updated: September 12, 2019, 12:06 PM IST
UNHRC में भारत का जवाब- पाकिस्तान का हिंसा भरा रिकॉर्ड खुद गवाही देता है
UNHRC में MEA के प्रथम सचिव विमर्श आर्यन ने कहा कि अनुच्छेद 370 (Article 370) भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था, इसका हालिया संशोधन हमारे संप्रभु अधिकार के भीतर है और पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है.

UNHRC में MEA के प्रथम सचिव विमर्श आर्यन ने कहा कि अनुच्छेद 370 (Article 370) भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था, इसका हालिया संशोधन हमारे संप्रभु अधिकार के भीतर है और पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 12, 2019, 12:06 PM IST
  • Share this:
जेनेवा. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत (India) ने पाकिस्‍तान के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने UN में भारत पर झूठे आरोप लगाए हैं. भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए काम कर रही है. हम सीमा पार आतंकवाद का दंश झेल रहे हैं.

UNHRC में MEA के प्रथम सचिव विमर्श आर्यन ने कहा कि अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था, इसका हालिया संशोधन हमारे संप्रभु अधिकार के भीतर है और पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है. UNHRC में विमर्श आर्यन ने कहा पाकिस्तान फोरम का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहा है.

ये पूरी तरह से आंतरिक मामला
UNHRC में MEA के प्रथम सचिव विमर्श आर्यन ने कहा अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था, इसका हालिया संशोधन हमारे संप्रभु अधिकार के भीतर है और पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है. विमर्श आर्यन ने कहा- पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में हमेशा जेहाद को प्रोत्साहित किया है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के दखल को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा.

विमर्श आर्यन ने कहा हम इस मंच का राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण करने के उद्देश्य से झूठे आख्यानों के साथ पाकिस्तान के उन्मादपूर्ण बयानों पर आश्चर्यचकित नहीं हैं. पाकिस्तान को लग रहा है कि है कि हमारे फैसले से सीमा पार आतंकवाद के निरंतर प्रायोजन में बाधाएं पैदा हो रही है जिससे उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है.

 हिंसा बढ़ाने के लिए जिहाद को प्रोत्साहित कर रहा पाक
विमर्श आर्यन ने कहा कुछ पाकिस्तानी नेता इतना आगे बढ़ चुके हैं कि वह जम्मू-कश्मीर और तीसरे देशों में हिंसा बढ़ाने के लिए जिहाद को प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि इसे नरसंहार का नाम दिया जा सके, वे भी जानते हैं कि यह वास्तविकता से बहुत दूर है.
Loading...

विमर्श आर्यन ने कहा पाकिस्तान का हिंसात्मक रिकॉर्ड खुद उसके बारे में गवाही देता है. यह बयानबाजी पाकिस्तान के धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों समूह चाहे वह ईसाई, सिख, शिया, अहमदिया और हिंदू हों के उत्पीड़न और उन्मूलन से दुनिया का ध्यान नहीं हटाएगी.

विमर्श आर्यन ने कहा जैसा कि इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) का संबंध है, भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान के पास कोई अधिकार नहीं है.

सेक्रेटरी ईस्ट विजय ठाकुर सिंह ने भी पाक को दिया था जवाब
इससे पहले भारत (India) की ओर सेक्रेटरी ईस्ट विजय ठाकुर सिंह ने कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है. सेक्रेटरी ईस्ट ने कहा मेरी सरकार सामाजिक-आर्थिक समानता और न्याय को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील नीतियों को अपनाकर सकारात्मक कार्रवाई कर रही है.

विजय ठाकुर ने कहा कि हाल के विधायी उपायों के परिणामस्वरूप अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हमारे नागरिकों के लिए पूरी तरह से प्रगतिशील नीतियां लागू होंगी. यह लिंग भेदभाव को खत्म करेगा, किशोर अधिकारों की बेहतर रक्षा करेगा और शिक्षा, सूचना, और काम के अधिकारों को लागू करेगा.

आतंकियों शरण देता है पाकिस्तान
विजय ठाकुर ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल ने मेरे देश के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर आपत्तिजनक बयानबाजी के साथ टिप्पणी की है. दुनिया जानती है कि यह मनगढ़ंत कहानी वैश्विक आतंकवाद के केंद्र से आती है, जहां सालों से आतंकियों के सरगनाओं को शरण दी जा रही है.

विजय ठाकुर सिंह ने कहा चुनौतीपूर्ण हालातों के बावजूद भी जम्मू-कश्मीर का प्रशासन वहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं, यातायात के साधन और कनेक्टिविटी मुहैया करा रहा है. उन्होंने कहा राज्य में लोकतांत्रिक कदम उठाए जा रहे हैं, ज्यादातर जगहों पर पाबंदियों में ढील दी जा रही है, राज्य में सुरक्षा को बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर अस्थाई कदम उठाए जा रहे हैं.

कोई देश आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा
विजय ठाकुर सिंह ने कहा हम इस बात को दोहराना चाहते हैं कि यह संप्रभु निर्णय, संसद द्वारा पारित अन्य कानूनों की तरह, भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक है. कोई देश अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं कर सकता है, निश्चित रूप से भारत भी नहीं.

NRC को लेकर विजय ठाकुर सिंह ने कहा कि NRC एक वैधानिक, पारदर्शी, गैर-कानूनी कानूनी प्रक्रिया है जिसे भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनिवार्य घोषित किया है और उसी के द्वारा इसकी निगरानी की जा रही है. इसके कार्यान्वयन के दौरान लिया गया कोई भी निर्णय भारतीय कानून के अनुसार होगा और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप होगा.



ये भी पढ़ें-
UNHRC: कश्मीर पर पाक के झूठ का पर्दाफाश, जानिए भारत के जवाब की 5 बड़ी बातें

UN में ऐसे रहे भारत और पाकिस्तान के पिछले पांच एनकाउंटर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 10, 2019, 6:12 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...