केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बताया कोविड-19 के खिलाफ भारत की अब तक की लड़ाई कैसी रही?

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बताया कोविड-19 के खिलाफ भारत की अब तक की लड़ाई कैसी रही?
कोरोना के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया पूर्वनिर्धारित, वर्गीकृत और सक्रिय रही है (सांकेतिक फोटो)

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन (Union Health Secretary Preeti Sudan) ने कहा, "भारत की प्रतिक्रिया पूर्वनिर्धारित (Preemptive), वर्गीकृत (Graded) और सक्रिय (Proactive) रही है. मुझे नहीं लगता कि हम ऐसा किसी अन्य तरीके से कर सकते थे."

  • Share this:
(स्नेहा मोर्दानी)

कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) के बाद से छह महीने में पहली बार, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन (Union Health Secretary Preeti Sudan) ने न्यूज 18 से इस बारे में बात की है कि देश में किस तरह से संकट का सामना किया गया है. शीर्ष स्तरीय नौकरशाह (top-ranking bureaucrat) 31 जुलाई को सेवानिवृत्त (retire) हो रही हैं. सूदन का कहना है कि उन्होंने वह सब किया है जो वह अपनी टीम के साथ कर सकती थी और जिसे उससे अलग तरीके से नहीं किया जा सकता था.

महामारी के छह महीनों के दौरान आपकी सबसे बड़ी सीख क्या रही है? क्या आप इसे संभालने में कुछ अलग कर सकती थीं?
भारत की प्रतिक्रिया पूर्वनिर्धारित (Preemptive), वर्गीकृत (Graded) और सक्रिय (Proactive) रही है. मुझे नहीं लगता कि हम ऐसा किसी अन्य तरीके से कर सकते थे. न तो दुनिया और न ही मैं अभी भी वायरस के बारे में बहुत ज्यादा जानते हैं. लेकिन हमने बहुत अच्छी तरह से प्रतिक्रिया दी है. प्रधानमंत्री के एक स्पष्ट आह्वान के साथ पूरा देश एक साथ आ गया. जिस तरह से हमने प्रतिक्रिया दी, जिस तरह से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली ने प्रतिक्रिया दी, जिस तरह से राज्य एक साथ आये, यह न केवल हमारे लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक सबक है. एक संघीय ढांचे में सभी ने चुनौती का सामना किया.
शीर्ष नेतृत्व ने हमें एक तरीके से प्रेरित किया, जिसमें प्रतिक्रिया त्वरित थी और जो सभी को एक साथ लाई. अधिकारी एक साथ आए, हमारे पास 11 सशक्त समूह थे, हमने जितनी बैठकें कीं, हमारी टीम ने मंत्रालयों में जिस तरह काम किया, राज्यों ने जैसे जवाब दिया, एनसीडीसी (NCDC), आईसीएमआर (ICMR), डीएचआर (DHR), सभी ने साथ मिलकर काम किया. पिछले छह महीनों में स्वास्थ्य मंत्रालय में मेरी टीम के सदस्यों को एक भी ब्रेक नहीं मिला. यहां तक ​​कि जब वे घर जाते हैं, तो वे प्रश्नों, आपात स्थितियों से निपट रहे होते हैं. प्रतिक्रिया उल्लेखनीय रही है. हमारे डॉक्टरों ने हमारी नर्सों, हमारे फ्रंट लाइन के कार्यकर्ताओं ने बेहतरीन समन्वय के साथ जवाब दिया है. सभी ने इस भावना के साथ काम किया है कि हम अपने लिए ऐसा कर रहे हैं, हम देश के लिए कर रहे हैं, और ऐसा ही होना चाहिए. और मुझे नहीं लगता कि हम इसे किसी भी अलग तरीके से कर सकते थे.



कृपया हमें बताएं कि पिछले छह महीनों में भारत कैसे 'अत्मनिर्भर' बना है. और वैक्सीन के समान वितरण के बारे में क्या हो रहा है? यह कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है?
हम पुणे में सिर्फ एक लैब के साथ वाले एक राष्ट्र थे. अब हमारे देश में 1,300 लैब हैं. पिछले दो दिनों में हम 5 लाख से अधिक नमूनों का परीक्षण कर रहे थे. हमने 1 करोड़ 68 लाख लोगों का परीक्षण किया है. यही नहीं, हम पीपीई, एन 95 मास्क या वेंटिलेटर का निर्माण नहीं कर रहे थे. मुझे लगता है कि यह हमारी आत्मनिर्भरता और हमारी 'आत्मनिर्भर' पहल का प्रमाण है.

यह भी पढ़ें: पवार बोले-मैं राम मंदिर के भूमि पूजन के खिलाफ नहीं लेकिन कोरोना को लेकर चिंतित

इसके अलावा, मैं कहूंगी कि जिस तरह से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का इस अवसर पर प्रसार हुआ है, हमने जैसे मरीजों को लेने के लिए अपनी सुविधाओं का विस्तार किया है, जिस तरह से बेड बनाए गए- अब हमारे पास तीन प्रकार के 15 लाख से अधिक बेड हैं. देश भर में हमने जो सुविधाएं बनाई हैं, हम साथ मिलकर जवाब दे रहे हैं. हमारी प्रयोगशालाएं, हमारी निगरानी प्रणाली, हमारी आपातकालीन इकाइयों ने जो बेहतरीन काम किया है, यह दिखाता है कि हम इस अवसर पर प्रगति कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading