कुलभूषण जाधव केसः भारत 18 जुलाई को लगाने वाला था रिव्यू याचिका, लेकिन पाकिस्तान ने नहीं दिए दस्तावेज

इससे पहले पाकिस्तान ने ये दावा किया था कि कुलभूषण जाधव ने रिव्यू पिटीशन के लिए मना कर दिया था.

Kulbhushan Jadhav Case: दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने जाधव के लिए 18 जुलाई को एक रिव्यू पिटीशन (Review petition) दायर करने की कोशिश की थी, लेकिन भारत द्वारा नियुक्त वकील को बताया गया था कि उनके पास कोई पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं है.

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    नई दिल्ली. भारत ने गुरुवार को कहा कि उसने कुलभूषण जाधव (Kulbhushan Jadhav) के कांसुलर एक्सेस (Consular access) के लिए पाकिस्तान (Pakistan) से 12 बार अनुरोध किया था और इस्लामाबाद ने "अप्रतिबंधित और अप्रभावित पहुंच" प्रदान नहीं की. दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने जाधव के लिए 18 जुलाई को एक रिव्यू पिटीशन (Review petition) दायर करने की कोशिश की थी, लेकिन भारत द्वारा नियुक्त वकील को बताया गया था कि उनके पास कोई पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं है. उन्होंने कहा कि रिव्यू पिटीशन के लिए पाकिस्तान द्वारा दस्तावेज नहीं दिए गए.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत ने अब तक पिछले एक साल में 12 बार कांसुलर एक्सेस का अनुरोध किया है. हालांकि, पाकिस्तान अब तक एक अनपेक्षित कांसुलर एक्सेस नहीं दे पाया है. 16 जुलाई को जाधव के साथ कांसुलर ऑफिसर्स की मीटिंग को पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ रफादफा कर दिया गया था. कांसुलर अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे जाधव को कोई भी दस्तावेज न सौंपें. इसलिए, भारतीय महावाणिज्य अधिकारी जाधव से पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त नहीं कर सके.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि वो राजनयिक जाधव को उसके कानूनी अधिकारों के बारे में नहीं बता सके और उनको कानूनी प्रतिनिधित्व के लिए जाधव की लिखित सहमति लेने से भी रोका गया.



    पाकिस्तान ने भारत को दी थी यह सलाह
    उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने भारत को सलाह दी कि संबंधित दस्तावेज केवल एक अधिकृत पाकिस्तानी वकील को सौंपे जा सकते हैं. इसके बाद, भारत ने संबंधित दस्तावेजों को प्राप्त करने के लिए एक पाकिस्तानी वकील को नियुक्त किया.' इसके बाद जब वकील ने पाकिस्तान के अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्होंने वकील को दस्तावेज सौंपने से इनकार कर दिया.

    पाकिस्तान ने पैदा किया भ्रम
    एक अंतिम विकल्प के रूप में, संबंधित दस्तावेजों के साथ-साथ एक अप्रभावित और अनधिकृत कांसुलर एक्सेस की अनुपस्थिति में, भारत ने 18 जुलाई को एक याचिका दायर करने की कोशिश की. हालांकि, हमारे पाकिस्तानी वकील ने सूचित किया कि एक समीक्षा याचिका दायर नहीं की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने याचिका दायर करने की अंतिम तारीख को लेकर भ्रम भी पैदा किया.

    ICJ ने कहा आखिरी फैसला
    कुलभूषण जाधव केस में समीक्षा और पुनर्विचार के लिए पाकिस्तान का अध्यादेश समाप्‍त होने के कई दिनों बाद पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके मांग की है कि कुलभूषण केस के लिए एक वकील नियुक्त किया जाए. 6 पेज की इस याचिका में कहा गया है, 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के आदेश की अनुपालना में ये दरख्वास्त की जाती है कि कोर्ट कुलभूषण को मिली सजा की समीक्षा और पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के लिए किसी उपयुक्त वकील को नियुक्त करे.'

    रिव्यू पिटीशन के लिए जाधव ने किया मना
    इससे पहले पाकिस्तान ने ये दावा किया था कि कुलभूषण जाधव ने रिव्यू पिटीशन के लिए मना कर दिया था. उसने जाधव को कांसुलर एक्सेस की सुविधा के तहत पिछले हफ्ते भारतीय राजनयिकों को उनसे मिलने की इजाजत दी गई लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक जाधव के साथ इंतजाम ऐसे थे कि मुक्त बातचीत की इजाजत नहीं थी.

    केस में अब तक क्या हुआ?
    कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की जेल में साल 2016 से हैं. पाकिस्तान आरोप लगाता है कि कुलभूषण जाधव एक जासूस है. हालांकि, भारत की ओर से इस दावे को कई बार नकारा जा चुका है. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 3 मार्च 2016 को जासूसी और आतंकवाद के आरोप में बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया था. साल 2017 में भारत ने इस मामले को ICJ में उठाया. पिछले साल जुलाई में कोर्ट ने पाकिस्तान से कहा कि वो कुलभूषण जाधव को कांसुलर एक्सेस दे और फांसी की सजा पर फिर से विचार करे.

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