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कोरोना से जंग, चीन को घेरने में जुटे भारत सहित 4 देश, वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने पर जोर

सांकेतिक फोटो (फोटो सौ. न्यूज18 इंग्लिश)

सांकेतिक फोटो (फोटो सौ. न्यूज18 इंग्लिश)

Coronavirus Vaccine: सीरम द्वारा नोवावैक्स वैक्सीन का उत्पादन क्वाड एलायंस के लिए निर्णायक हो सकता है और इसके जरिए चीन को क्षेत्र में वैक्सीन बेचने की दौड़ से बाहर किया जा सकता है.

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नई दिल्ली. भारत ने अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया से वैक्सीन उत्पादन में लगी भारतीय कंपनियों में निवेश करने को कहा है. रॉयटर्स ने भारत सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है. दरअसल, भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साझे वाला क्वाड गठबंधन चीन की बढ़ती वैक्सीन डिप्लोमेसी का मुकाबला करना चाहता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की तैयारी 46.3 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की खुराक एशिया से अफ्रीका तक कई देशों को निर्यात और अनुदान के रूप में देने की है. इन देशों में यूरोप और लैटिन अमेरिका के देश भी हैं. दो भारतीय अधिकारियों ने कहा कि क्वाड एलायंस चीन की बढ़ती सॉफ्ट पावर को रोकने के लिए वैश्विक टीकाकरण को बढ़ाने के प्रयास कर रहा है. अधिकारियों ने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता भारत, चीन का मुकाबला करने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में है.

अमेरिकी गृह विभाग के प्रवक्ता ने भारत द्वारा फंड की मांग पर कुछ नहीं कहा, लेकिन ये जरूर कहा कि वॉशिंगटन वैश्विक टीकाकरण, मैन्युफैक्चरिंग और डिलिवरी को बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है. बता दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने 18 फरवरी को अपने समकक्ष क्वाड नेताओं से बात की थी और कोरोना वायरस से निपटने के प्रयासों पर चर्चा की थी. इसके साथ ही क्लाइमेट चेंज और अन्य मुद्दों पर भी इन नेताओं के बीच बात हुई. सूत्रों ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन एक सरकारी सूत्र ने कहा कि कोरोना महामारी से विश्व को उबारने और अपने सहयोगियों के लिए नीति निर्धारण ऑस्ट्रेलियाई सरकार की प्राथमिकता में है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपने सहयोगियों के साथ क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए मिलकर काम करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है.

विदेश मंत्रालय ने नहीं की कोई टिप्पणी
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मातेगी ने शुक्रवार को कहा कि चारों देश विकासशील देशों के लिए वैक्सीन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए मिलकर काम करने पर विचार कर रहे हैं. हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. रॉयटर्स ने दो भारतीय सूत्रों में से एक के हवाले से कहा है कि चारों देश वैश्विक टीकाकरण के मुद्दे पर कई बैठकें कर चुके हैं. उन्होंने कहा, "भारत के पास अन्य एशियाई देशों के मुकाबले एक समय सबसे ज्यादा वैक्सीन होगी. भारत चाहता है कि क्वाड एलायंस वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश करे."
दूसरे भारतीय सूत्र के हवाले से कहा गया है कि फरवरी की वर्चुअल मीटिंग में क्वाड देशों ने वैकल्पिक मेडिकल सप्लाई चेन को बढ़ावा देने और चीन पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने हाल में कहा था कि ड्रैगन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.



40 देशों को वैक्सीन बेचने में जुटा भारत
भारतीय कंपनियां सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक, बायोलॉजिकल ई और कैडिला हेल्थकेयर साझे तौर पर करोड़ों की संख्या में वैक्सीन का उत्पादन करने की क्षमता रखती हैं. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का उत्पादन कई देशों के लिए कर रही है और जल्द ही नोवावैक्स वैक्सीन का भी उत्पादन शुरू करेगी. भारत की कोशिश भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवॉक्सिन को 40 देशों को बेचने की है. इन देशों में ब्राजील, फिलीपींस और जिम्बाब्वे जैसे देश शामिल है. भारत बायोटेक ने कहा था कि कंपनी एक साल में 70 करोड़ वैक्सीन की खुराक का उत्पादन कर सकती है.

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सीरम द्वारा नोवावैक्स वैक्सीन का उत्पादन क्वाड एलायंस के लिए निर्णायक हो सकता है और इसके जरिए चीन को क्षेत्र में वैक्सीन बेचने की दौड़ से बाहर किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि क्वाड का फोकस इस बात पर वैक्सीन मार्केट पर अपनी पकड़ बनाकर रखी जाए.

भारतीय कंपनियां रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन के 30 करोड़ डोज का उत्पादन भी कर रही हैं, लेकिन सूत्रों ने कहा कि वॉशिंगटन इसे बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है.
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