भारत पहुंचने वाले हैं 4 और राफेल, बंगाल के हाशिमारा बेस पर 101 स्क्वाड्रन को दोबारा किया जाएगा जिंदा

फ्रांस अप्रैल 2022 से पहले ही सभी 36 राफेल लड़ाकू विमान भारत को दे देगा. (फ़ाइल फोटो)

फ्रांस अप्रैल 2022 से पहले ही सभी 36 राफेल लड़ाकू विमान भारत को दे देगा. (फ़ाइल फोटो)

Rafale Jets: मई के आखिर तक भारतीय वायु सेना के पास 24 राफेल लड़ाकू जेट होंगे, बाकी बचे सात विमानों को फ्रांस में ट्रेंनिंग के लिए रखा जाएगा.

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नई दिल्ली. फ्रांस से 4 राफेल लड़ाकू (Rafale Jets) विमानों की नई खेप भारत पहुंचे वाली है. ये लड़ाकू जेट्स 19-20 मई को फ्रांस के मेरिग्नैक-बोर्डो एयरबेस से अंबाला पहुंचेंगे. 4 और राफेल आने से पहले भारतीय वायूसेना ने 101 स्क्वाड्रन को फिर से ज़िदा करने करने का फैसला किया है. इसे पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर तैनात किया जाएगा. 101 स्क्वाड्रन को फाल्कन्स ऑफ छंब कहा जाता है. 2002 की शुरुआत में, स्क्वाड्रन 101 आदमपुर एयरबेस में भेज दिया गया था. आमतौर पर इसका काम तस्वीरों के जरिये दुश्मनों के ठिकानों का सर्वे करना है.

बता दें कि भारत में राफेल की लैंडिंग की सही तारीख संयुक्त अरब अमीरात वायु सेना (UAE Air Force) की तरफ से हवा में ईंधन भरने की उपलब्धता और मौसम के हिसाब से की जाएगी. इस बात की पूरी संभावना है कि फ्रांस अप्रैल 2022 से पहले ही सभी 36 राफेल लड़ाकू विमान भारत को दे देगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि मई के आखिर तक भारतीय वायु सेना के पास 24 राफेल लड़ाकू जेट होंगे. बाकी बचे सात विमानों को फ्रांस में ट्रेंनिंग के लिए रखा जाएगा और दो स्क्वाड्रन के पूरा होने से पहले सिर्फ पांच और सौंपे जाएंगे.

हाशिमारा बेस पर चल रही है तैयारी

दूसरे स्क्वाड्रन का होम बेस हाशिमारा होगा. उसके रनवे, गोला-बारूद डिपो, ब्लास्ट पेन और स्टाफ के आवास के अलावा रखरखाव के लिए तैयार किया जा रहा है. अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए एयर मार्शल ने कहा, 'हाशिमारा हवाई अड्डे को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है. इस महीने के आखिर तक इसे शुरू करदिया जाएगा. यहां राफेल पार्क किए जाएंगे. युद्ध के वक्त प्लानिंग के हिसाब से लड़ाकू विमानों का संचालन होगा.'


अप्रैल में आए थे 5 राफेल

बता दें कि 'फ्रांस के मैरीनेक हवाई अड्डे से सीधी उड़ान भरने के बाद राफेल विमानों की पांचवीं खेप 21 अप्रैल को भारत पहुंची थी. इन लड़ाकू विमानों ने लगभग आठ हजार किलोमीटर की दूरी तय की थी. फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात की वायुसेनाओं ने यात्रा के दौरान विमानों को ईंधन मुहैया कराया था.

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