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पोस्‍टल मेल सेवा रोकने पर भारत ने पाकिस्‍तान को लताड़ा, रविशंकर ने बताया अंतरराष्‍ट्रीय नियमों का उल्‍लंघन

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Updated: October 21, 2019, 7:18 PM IST
पोस्‍टल मेल सेवा रोकने पर भारत ने पाकिस्‍तान को लताड़ा, रविशंकर ने बताया अंतरराष्‍ट्रीय नियमों का उल्‍लंघन
रविशंकर प्रसाद ने बताया कि पाकिस्‍तान ने पोस्‍टल मेल सेवा रोकने का फैसला लेने से पहले भारत को कोई नोटिस तक नहीं दिया.

केंद्रीय मंत्री (Union Minister) रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने कहा कि पाकिस्‍तान (Pakistan) अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा. उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान ने भारत को बिना कोई सूचना दिए ही पोस्‍टल मेल सेवा (Postal Mail Service) पर रोक लगाई है. यह फैसला अंतरराष्‍ट्रीय पोस्‍टल यूनियन (International Postal Union) के नियमों के खिलाफ है. लेकिन, पाकिस्‍तान का क्‍या किया जा सकता है? बंटवारे (Partition) और तीन युद्धों (Wars) के दौरान तनाव के माहौल में भी दोनों देशों के बीच पोस्‍टल मेल सेवा नहीं रोकी गई थी.

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  • Last Updated: October 21, 2019, 7:18 PM IST
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नई दिल्‍ली. जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्‍छेद-370 (Article 370) को हटाने के मोदी सरकार (Modi Government) के फैसले से बौखलाया पाकिस्‍तान (Pakistan) और उसके शीर्ष नेता एक के बाद एक अजीब हरकतें कर रहे हैं. इस बार पाकिस्‍तान ने दोनों देशों के बीच पोस्‍टल मेल सेवा (Postal Mail Service) पर रोक लगा दी है. दरअसल, पाकिस्‍तान महीने भर से ज्‍यादा समय से भारत की ओर से आने वाले पत्रों (Letters) को नहीं ले रहा है. इस पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने कहा कि पाकिस्‍तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा. उसका यह एकतरफा फैसला अंतरराष्‍ट्रीय नियमों (International Norms) का सीधा उल्‍लंघन है.

बंटवारे और युद्धों के दौरान भी नहीं रोकी गई थी पोस्‍टल मेल सेवा
केंद्रीय मंत्री (Union Minister) रविशंकर प्रसाद ने राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि पाकिस्‍तान ने पोस्‍टल मेल सेवा रोकने का फैसला लेने से पहले भारत को कोई नोटिस नहीं दिया. पहली बार ऐसा हुआ है कि दोनों देशों के बीच पत्र व्‍यवहार तक रोक दिया गया है. इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था. उन्‍होंने बताया कि दोनों देशों के बंटवारे (Partition) और तीन युद्धों (Wars) के दौरान तनाव के माहौल में भी पोस्‍टल मेल सेवा नहीं रोकी गई थी. बता दें कि दोनों देशों के बीच सीधे पत्र व्‍यवहार नहीं होता है. दोनों देशों के पत्र पहले सऊदी अरब (Saudi Arabia) जाते हैं. इसके बाद दोनों देशों को भेजे जाते हैं. सऊदी अरब भारत और पाकिस्‍तान के बीच पत्रों के आदान-प्रदान केंद्र की तरह काम करता है.

भारत ने भी बंद किया पाकिस्‍तान भेजे जाने पत्रों को इकट्ठा करना

पाकिस्‍तान ने 23 अगस्‍त से अचानक भारत के साथ पत्रों का आदान-प्रदान बंद कर दिया. इसके बाद भारत ने भी पाकिस्‍तान भेजे जाने वाले पत्रों को इकट्ठा करना बंद कर दिया. इस पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पाकिस्‍तान का फैसला अंतरराष्‍ट्रीय पोस्‍टल यूनियन (International Postal Union) के नियमों के खिलाफ है. लेकिन, पाकिस्‍तान का क्‍या किया जा सकता है? वो अपनी हरकतें बंद नहीं करेगा. उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान ने नोटिस तो दूर भारत को फैसला लेने से पहले बताना तक जरूरी नहीं समझा. दिल्‍ली पोस्‍टल मेल सेवा निदेशक (पत्र व व्‍यापार विकास) आरवी चौधर ने बताया कि पहली बार पाकिस्‍तान ने ऐसा फैसला लिया है. अब यह बताना मुश्किल है कि ये आदेश कब वापस लिया जाएगा.

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First published: October 21, 2019, 7:17 PM IST
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