भारत ने कहा- झूठी है कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार रिपोर्ट

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक बयान में कहा, संयुक्त राष्ट्र के एक निकाय के यह दावे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन हैं. यह सीमापार आतंकवाद के मुद्दे की अनदेखी भी करते हैं.

News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 10:42 PM IST
भारत ने कहा- झूठी है कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार रिपोर्ट
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक बयान में कहा, संयुक्त राष्ट्र के एक निकाय के यह दावे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन हैं. यह सीमापार आतंकवाद के मुद्दे की अनदेखी भी करते हैं.
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Updated: July 8, 2019, 10:42 PM IST
भारत ने जम्मू एवं कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के एक निकाय की एक मानवाधिकार रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य में मई 2018 से जितने नागरिक मारे गए हैं, वह संख्या पिछले एक दशक में सर्वाधिक हो सकती है.

भारत सरकार ने सोमवार को इस रिपोर्ट को कश्मीर पर पहले जैसे ही झूठे और अभिप्रेरित बयान का जारी रहना' करार दिया. जम्मू एवं कश्मीर मामले पर ऑफिस ऑफ द हाई कमीशन फॉर ह्यूमन राइट्स (ओएचसीएचआर) की अपडेट रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक बयान में कहा, संयुक्त राष्ट्र निकाय के यह दावे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन हैं. यह सीमापार आतंकवाद के मुद्दे की अनदेखी भी करते हैं.

उन्होंने कहा कि ओएचसीएचआर ने पाकिस्तान से होने वाले सीमापार आतंकवादी हमलों में पैदा की गई स्थिति का विश्लेषण बिना इसके ज़रिए होने वाली जनधन की हानि का जिक्र किए किया है.

भारत की पाकिस्तान से तुलना अवास्तविक

विदेश मंत्रालय ने ताजा रिपोर्ट को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा तरक्की कर रहे लोकतंत्र की तुलना एक ऐसे देश से करने को गलत करार दिया है जो खुलकर राज्य प्रायोजित आतंकवाद को प्रोत्साहित करता है.

मंत्रालय प्रवक्ता ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि इस रिपोर्ट को देखकर ऐसा लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहचान के बिल्कुल उलट आतंकवाद को एक सही ठहराती दिखती है.


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ग्लोबल आतंकी नेताओं और संगठनों को बताया गया सशस्त्र समूह
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद ने फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले की निंदा की थी और बाद में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नेता मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किया था. लेकिन, इस नई अपडेट में संयुक्त राष्ट्र द्वारा करार दिए गए ग्लोबल आतंकी नेताओं और संगठनों को जान बूझकर सशस्त्र समूह बताया है.

उन्होंने भारत की नीतियों, मूल्यों को गलत रूप में दिखाने के लिए ओएचसीएचआर की निंदा की और कहा कि इससे संयुक्त राष्ट्र निकाय की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है.

ऐसा करना निंदनीय
रवीश कुमार ने कहा, यह रिपोर्ट भारतीय राज्य जम्मू एवं कश्मीर में स्वतंत्र न्यायपालिका, मानवाधिकार संस्थाओं और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं को पहचानने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि ये भारतीय नागरिकों के संविधान में मिले मूल अधिकारों की सुरक्षा करते हैं. ऐसा करना पूरी तरह से निंदनीय है.

संयुक्त राष्ट्र ओएचसीएचआर रिपोर्ट के अनुसार, पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद से कश्मीर में तनाव बहुत बढ़ गया है. नागरिकों के मानवाधिकार जिसमें उनके जीवन का अधिकार भी शामिल है, पर लगातार बेहद गलत असर डाल रहा है.

इस रिपोर्ट में किया गया ऐसा दावा
स्थानीय सिविलियन ग्रुप्स से इकट्ठा किए गए डेटा के आधार पर छपी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में करीब 160 नागरिक मारे गए. रिपोर्ट के मुताबिक मरने वालों की यह संख्या बीते एक दशक में सबसे ज़्यादा है.

संस्था ने यह भी दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों की कम मौतों की जानकारी दी है. मंत्रालय के अनुसार 2 दिसंबर 2018 तक के ग्यारह महीने के दौरान कुल 37 नागरिक, 238 आतंकवादी और 86 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. रवीश कुमार ने कहा, भारत ने इस अपडेट को लेकर ओएचसीएचआर से अपना कड़ा विरोध जताया है.

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First published: July 8, 2019, 10:31 PM IST
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