कई शहरों में विरोध प्रदर्शन के बीच 22 पूर्व राजदूतों ने आतंक के खिलाफ किया मैक्रों का समर्थन, कहा-भारत आपके साथ

 भारत के 22 पूर्व राजदूतों ने फ्रांस के साथ एकजुटता दिखाई है (File Photo)
भारत के 22 पूर्व राजदूतों ने फ्रांस के साथ एकजुटता दिखाई है (File Photo)

France Terror Attacks: 22 सेवानिवृत्त राजनयिकों ने एक बयान में कहा है कि भारत इस कठिन समय में फ्रांस के साथ खड़ा है और इस मुद्दे पर फ्रांस सरकार का पूर्ण समर्थन करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2020, 8:52 PM IST
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नई दिल्ली. पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) की प्रतिक्रिया और हाल में फ्रांस में हुए आतंकी हमलों के बाद भारत के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत के 22 पूर्व राजदूतों ने फ्रांस के साथ एकजुटता दिखाई है. उनका कहना है कि इस मुश्किल समय में भारत, फ्रांस (France) के साथ खड़ा है. राजनयिकों के समूह ने एक बयान में यह भी कहा कि वे कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ फ्रांस के कदम पर उसका सहयोग करते हैं.

इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले राजदूतों ने पिछले महीने पेरिस उपनगर के कॉनफ्लैंस-सैंटे-ऑनरिन में हुए हमले को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की जहां एक मिडिल स्कूल टीचर सैमुअल पैटी के पैगंबर मोहम्मद की तस्वीर दिखाने के बाद उनका गला काट दिया गया था. इस हमले के बाद पैटी राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में देखे जाने लगे. 2012 से अब तक इस्लामिक हमलों में मारे गए 260 फ्रांसिसी नागरिकों में पैटी नवीनतम हैं.

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शनिवार को जारी इस बयान में कहा गया है कि- इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा फ्रांस में किए गए क्रूर आतंकी हमलों से बहुलतावाद और कानून से शासन वाले सभी लोकतांत्रिक देशों के झटका लगा है. बयान के मुताबिक दस्तावेजों में बार-बार परिलक्षित एक अंतरराष्ट्रीय सहमति है जो किसी भी कारण से आतंकवाद का सहारा नहीं लेती है.
फ्रांस सरकार का पूर्ण समर्थन
इस संदर्भ में फ्रांस और वहां के राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ भारत में हुए प्रदर्शन उस अंतर्राष्ट्रीय सर्वसम्मति, सरकार की स्थिति और भारत और फ्रांस के बीच उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंधों के विपरीत हैं. भारत इस कठिन समय में फ्रांस के साथ खड़ा है और इस मुद्दे पर फ्रांस सरकार का पूर्ण समर्थन करता है. उन्होंने कहा फ्रांस, अपने इतिहास के कारण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए गहराई से समर्पित है. इसके साथ ही फ्रांस की मुस्लिम आबादी का राज्य और धर्म के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संबंध का एक बहुत ही अलग दृष्टिकोण है.

बयान में आगे कहा गया है, "विचार करने की बात यह है कि क्या एक न्यायिक व्यवस्था में किसी न्यायिक प्रक्रिया के तहत धार्मिक न्याय को एकपक्षीय प्रक्रिया के बिना एकपक्षीय रूप से पूरा किया जा सकता है, जिसमें स्थानीय न्यायशास्त्र में कोई जगह नहीं है?'

उन्होंने कहा, "भारत ने व्यक्तिगत रूप से फ्रांसीसी राष्ट्रपति और फ्रांस के साथ एक देश के रूप में एकजुटता व्यक्त की है, जिसके साथ हमारे संबंधों ने हाल के वर्षों में रणनीतिक रूप से गहरा किया है."

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भारत दशकों से रहा है प्रायोजित आतंकवाद का शिकार
इसमें कहा गया, "भारत दशकों से राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार रहा है और विशेष रूप से आतंकवाद के मुद्दों के प्रति संवेदनशील है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय एजेंडे पर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खतरे के रूप में बताया है."

उन्होंने कहा "भारत आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ इस लड़ाई में फ्रांस के साथ खड़ा है. लेकिन मुट्ठी भर मुसलमानों के दिमाग में एक अलग एजेंडा है क्योंकि उनमें से किसी ने भी क्रूर निंदा के खिलाफ विरोध नहीं किया."



जिन 22 सेवानिवृत्त राजदूतों ने फ्रांस का समर्थन किया है, उनमें अजय स्वरूप, अजीत कुमार, अमर सिन्हा, अनिल के. त्रिगुणायत, अशोक कुमार, भवस्वती मुखर्जी, जे.एस. सपरा, कंवल सिब्बल, लक्ष्मी पुरी, मोहन कुमार, ओपी गुप्ता, पिनाक रंजन चक्रवर्ती, प्रकाश शाह, रुचि घनश्याम, सतीश चंद मेहता, शशांक, श्यामला बी. कौशिक, सुरेश कुमार गोयल, वीना सीकरी, विद्या सागर वर्मा, वीरेंद्र गुप्ता और योगेश गुप्ता शामिल हैं.
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