सुपरसोनिक ब्रह्मोस का टेस्ट सफल, जमीन-हवा और पानी... कहीं से भी दुश्‍मन को कर सकती है तबाह

BrahMos में से Brah का मतलब 'ब्रह्मपुत्र' और Mos का मतलब 'मोस्‍कवा'.

BrahMos में से Brah का मतलब 'ब्रह्मपुत्र' और Mos का मतलब 'मोस्‍कवा'.

इस हफ्ते ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Supersonic Cruise Missile) के कई ऑपरेशन टेस्‍ट्स होने हैं. चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच इन टेस्‍ट्स से यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि मिसाइल कितनी सटीकता से टारगेट हिट कर सकती है.

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  • Last Updated: November 24, 2020, 12:34 PM IST
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नई दिल्ली. भारत ने अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos Supersonic Cruise Missile) के लैंड अटैक वर्जन की आज सफल टेस्टिंग की. न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक, भारतीय सेना (Indian Army) ने मंगलवार सुबह 10:30 बजे अंडमान और निकोबार द्वीप से इस क्रूज मिसाइल की टेस्टिंग की है. ब्रह्मोस मिसाइल का निशाना वहां मौजूद एक अन्य द्वीप पर था. सेना में डीआरडीओ की ओर से विकसित मिसाइल सिस्टम की कई रेजिमेंट शामिल हैं.

इस हफ्ते ब्रह्मोस मिसाइल के कई ऑपरेशन टेस्‍ट्स होने हैं. चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच इन टेस्‍ट्स से यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि मिसाइल कितनी सटीकता से टारगेट हिट कर सकती है. यह मिसाइल रूस और भारत के रक्षा संस्‍थानों के साथ आने से बनी है. आइए जानते हैं क्या है ब्रह्मोस मिसाइलों की खासियत:-

21वीं सदी की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस 3.5 यानी 4,300 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार से उड़ सकती है. BrahMos में से Brah का मतलब 'ब्रह्मपुत्र' और Mos का मतलब 'मस्‍कवा'. यानी दोनों देशों की एक-एक नदी के नाम से मिलाकर इस मिसाइल का नाम बना है.
आज जिस मिसाइल का टेस्ट किया गया, वो 290 किलोमीटर रेंज वाली है. ये एक नॉन-न्‍यूक्लियर मिसाइल है. यह 2.8 की रफ्तार से उड़ती है. यानी आवाज की रफ्तार का लगभग तीन गुना.
इस मिसाइल का एक वर्जन 450 किलोमीटर दूर तक वार कर सकता है. इसके अलावा एक और वर्जन टेस्‍ट हो रहा है जो 800 किलोमीटर की रेंज में टारगेट को हिट कर सकता है.
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत ये है कि इसे कहीं से भी लॉन्‍च किया जा सकता है. जमीन से हवा में मार करनी वाले सुपरसोनिक मिसाइल 400 किलोमीटर दूर तक टारगेट हिट कर सकती है.
ब्रह्मोस मिसाइल को प्रिसिजन टारगेटिंग के लिए यूज किया जा सकता है. पिछले कुछ सालों में यह सेना के सबसे पसंदीदा हथियार के रूप में उभरी है.
सुखोई और ब्रह्मोस का कॉम्‍बो अंडरग्राउंड बंकर्स, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स के अलावा कई मिलिट्री टारगेट्स पर सर्जिकल स्‍ट्राइज करने में इस्‍तेमाल किया जा सकता है.
भारतीय वायुसेना की स्‍क्‍वाड्रन नंबर 222 (टाइगरशार्क्‍स) देश की पहली स्‍क्‍वाड्रन है जिसे ब्रह्मोस मिसाइल से लैस किया गया है. यह दक्षिण भारत में देश की पहली Su-30 MKI स्‍क्‍वाड्रन है जिसका बेस तंजावुर एयरफोर्स स्‍टेशन है.
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