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    आतंक के खिलाफ भारत का फ्रांस को खुला समर्थन, मैक्रों पर व्यक्तिगत हमलों को बताया अस्वीकार्य

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों.
    फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों.

    भारत ने साफ किया है कि मैक्रों (Emmanuel Macron) के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही भाषा स्वीकार नहीं है. साथ ही भारत में फ्रांसीसी टीचर की बेरहमी से की गई हत्‍या (French Teacher Brutal Murder) की भी निंदा की है. सरकार की तरफ से जारी एक प्रेस स्टेटमेंट में कहा गया है कि इस घटना ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 28, 2020, 11:29 PM IST
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    नई दिल्ली. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) इस वक्त कई देशों की आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं. इस बीच, भारत ने इमैनुएल मैक्रों पर व्यक्तिगत हमलों (Personal Attack) को अस्वीकार्य बताते हुए उन्हें समर्थन दिया है. भारत ने साफ किया है कि मैक्रों के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही भाषा स्वीकार नहीं है. साथ ही भारत में फ्रांसीसी टीचर की बेरहमी से की गई हत्‍या (French Teacher Brutal Murder) की भी निंदा की है. सरकार की तरफ से जारी एक प्रेस स्टेटमेंट में कहा गया है कि इस घटना ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है. हम पीड़ित परिवार और फ्रांस के लोगों के साथ अपनी संवेदना प्रकट करते हैं.

    आतंकवादी घटनाओं के लिए कोई स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं
    स्टेटमेंट में साफ किया गया है कि आतंकवादी घटना के लिए किसी भी प्रकार का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता. गौरतलब है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने अपने बयान में कट्टरपंथी इस्लाम की आलोचना की थी और शिक्षक की हत्या को 'इस्लामिक आतंकवादी हमला' कहा था. उन्होंने कहा था कि अब वो लोग डर के साए में रहेंगे जो फ्रांस की जनता को डराकर रखना चाहते हैं.

    कई देशों में मैक्रों का विरोध
    मैक्रों के बयान को लेकर दुनिया के कई देशों में विरोध हो रहा है. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में करीब 10 हजार से ज्यादा लोग रैली में शामिल हुए. कई अरब देशों ने फ़्रांस के सामानों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है. कुवैत, जॉर्डन और क़तर की कुछ दुकानों से फ़्रांस के सामान हटा दिए गए हैं. वहीं लीबिया, सीरिया और ग़ज़ा पट्टी में फ़्रांस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं. फ़्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 'बहिष्कार की बेबुनियाद' बातें अल्पसंख्यक समुदाय का सिर्फ़ एक कट्टर तबक़ा ही कर रहा है.
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