फिंगर एरिया खाली करने को तैयार नहीं है चीन, विफल रहेगी कमांडरों के बीच बातचीत!

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लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और मेजर जनरल लियू लिन सहित भारत और चीन के कोर कमांडरों की एक बैठक वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के चीनी पक्ष पर मोलभाव कर रही है, ताकि वे विघटन पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

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    नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) को लेकर भारत-चीन (India-China) के बाीच तल रही वार्ता में भारत सिर्फ फिंगर एरिया (Figer Area) और अन्य घर्षण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और मेजर जनरल लियू लिन सहित भारत और चीन के कोर कमांडरों की एक बैठक वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के चीनी पक्ष पर मोलभाव कर रही है, ताकि वे विघटन पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

    न्यूज एजेंसी ANI ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि दोनों देशों के बीच वार्ता केवल अंगुली क्षेत्र से चीनी पक्ष और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में अन्य घर्षण बिंदुओं द्वारा विघटन पर आयोजित की जा रही है. इस बातचीत में देपांग के मैदान एजेंडे में नहीं हैं. सूत्रों ने कहा कि भारत स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के एलएसी के साथ सामने और गहराई वाले क्षेत्रों से डी-एस्केलेटिंग के बड़े मुद्दों पर चर्चा करने से पहले सबसे पहले विघटन होना चाहिए.

    कॉर्प्स कमांडर-स्तर पर वार्ता के लिए भारतीय पक्ष से दिशा और मार्गदर्शन चीन स्टडी ग्रुप (सीएसजी) द्वारा दिया गया था, जो 28 जुलाई को मिला था. भारत अब इस बात पर अडिग है कि वह सबसे पहले फिंगर फ्रेंक सहित सभी घर्षण बिंदुओं से चीनियों को पूरी तरह से मुक्त करना चाहता है.

    पेट्रोलिंग प्वाइंट से पीछे हटी भारतीय सेना
    जानकारी के लिए बता दें कि दोनों देशों में चल रही बातचीत की वजह से पेट्रोलिंग प्वाइंट 14, 15 और 17 से चीनी सेना ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे. यह दोनों देशों के बीच डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया पर सहमति के तहत हुआ था. सूत्रों ने कहा था, 'सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर भारत और चीन के बीच जारी बातचीत के परिणामस्वरूप सेनाएं पेट्रोलिंग प्वाइंट 14, 15 और 17 पर पूरी तरह पीछे हट गई हैं.'

    सेना के सू्त्रों ने बताया था कि पूर्वी लद्दाख में तैनात सेना के चार डिवीजन को अभी वापस नहीं बुलाया जाएगा. इनकी तैनाती लद्दाख में अग्रिम मोर्चो पर जारी रहेगी. इन चार डिवीजन में करीब 32 हजार जवान हैं. उस क्षेत्र में पहले से तैनात जवानों के अतिरिक्त ये डिवीजन हाल में वहां भेजे गए थे. इसके कई कारण हैं. एक, एलएसी पर टकराव वाले कई क्षेत्रों से चीनी सेनाएं कुछ पीछे हटी हैं. लेकिन कई स्थानों पर अभी भी वे मौजूद हैं. दूसरे, चीनी सेनाएं एलएसी के निकटवर्ती इलाकों (चीन की तरफ) मौजूद हैं जिनकी संख्या 20 हजार से अधिक होने का अनुमान है. तीसरे, जिस प्रकार मई से लेकर अब तक चीन का पूरा रवैया इस मामले में सामने रहा है, यानी बार-बार वह पीछे हटने पर सहमति होता है लेकिन बाद में मुकर जाता है. उसके मद्देनजर चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. इसलिए सेना अपनी तैयारियों में कोई चूक नहीं बरतना चाहती है.

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