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INS ध्रुव : भारत का पहला परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज, 10 सितंबर को लॉन्चिंग, जानें सबकुछ

 10 सितंबर को INS ध्रुव लॉन्च हो सकता है (तस्वीर- News18)

10 सितंबर को INS ध्रुव लॉन्च हो सकता है (तस्वीर- News18)

15,000 टन वजनी जहाज INS ध्रुव की लागत लगभग 725 करोड़ रुपये है. ऐसे जहाजों का संचालन अभी तक सिर्फ फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन में ही होता है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल 10 सितंबर को विशाखापत्तनम से भारत के पहले उपग्रह और बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग जहाज ध्रुव के लॉन्चिंग समारोह में शामिल हो सकते हैं. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) हिंदुस्तान शिपयार्ड के सहयोग से निर्मित आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv) दुश्मन पनडुब्बियों के बारे में पता लगाने में सक्षम है. अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार लॉन्चिंग समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और एनटीआरओ के अध्यक्ष अनिल धस्माना, डीआरडीओ और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूद रहेंगे. परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज को भारतीय नौसेना के कर्मियों द्वारा स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड (एसएफसी) के साथ ऑपरेट किया जाएगा. ऐसे जहाजों का संचालन अभी तक सिर्फ फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन में ही होता है. जहाज को कमीशन किए जाने के बाद ऐसा जहाज ऑपरेट करने वाला भारत छठा देश होगा.

    इसके निर्माण के शुरुआती दिनों के दौरान, जहाज को दुश्मन के उपग्रहों और जासूसी मिशनों की नजरों से दूर रखने के लिए इसे एक निर्जन डॉक पर रखा गया था. यह जहाज इलेक्ट्रॉनिक स्कैन एरे (एईएसए) रडार से भी लैस है जो दुश्मन देश की मिसाइल रेंज और क्षमताओं के बारे में सटीक डेटा एकत्र करने में मदद कर सकता है. यह रणनीतिक मिसाइलों को भी ट्रैक करेगा. यह हमारे लिए बहुत गेम चेंजर साबित हो सकता है. हाई क्लासीफाइड प्रोजेक्ट को कमीशनिंग से पहले विजाग में अंतिम रूप दिया गया. इस जहाज के साल 2018 से ही कई टेस्ट्स हुए हैं जिसमें यह हर बार सफल हुआ.

    भारत की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा ध्रुव
    इसको लॉन्च करने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता. चीन ना सिर्फ पूर्वी लद्दाख में बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन खतरा बनकर उभर रहा है.  आईएनएस ध्रुव भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा. हाई एक्यूरेसी के साथ नौसेना को ऑफेंसिव प्लान बनाने में मदद मिलेगी. इस जहाज के सर्विलांस सिस्टम के ऑपरेशन में 14 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ेगी जो INS ध्रुव खुद बनाएगा. 15,000 टन वजनी जहाज की लागत लगभग 725 करोड़ रुपये है.

    यह भारतीय नौसेना की क्षमता को अदन की खाड़ी से मलक्का, सुंडा, लोम्बोक, ओमबाई और वेटार स्ट्रैट्स के जरिए दक्षिण चीन सागर तक आने वाले रास्तों तक की निगरानी में मदद करेगा.

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