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EXCLUSIVE : ग्लासगो सीओपी-26 सम्मेलन में भारत उठाएगा जलवायु न्याय का मुद्दा, पीएम मोदी बताएंगे क्यों है जरूरी

EXCLUSIVE : ग्लासगो सीओपी-26 सम्मेलन में भारत उठाएगा जलवायु न्याय का मुद्दा, पीएम मोदी बताएंगे क्यों है जरूरी

लैंसेट काउंटडाउन के आंकड़ों के मुताबिक भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में 2020 में गर्मी के चलते काम के घंटों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया.

लैंसेट काउंटडाउन के आंकड़ों के मुताबिक भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में 2020 में गर्मी के चलते काम के घंटों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया.

Climate Change Conference of the Parties (COP26): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) जलवायु परिवर्तन पर ब्रिटेन के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सीओपी-26 सम्मेलन में शामिल होंगे. यह सम्मेलन इस महीने के अंत में आयोजित होगा. बता दें कि चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जक है. इस महीने के अंत में शुरू होने वाले COP26 सम्‍मेलन में पीएम मोदी की भागीदारी को इस अनिश्चितता के बीच महत्वपूर्ण माना गया था कि क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसमें भाग लेंगे.

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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) जलवायु परिवर्तन पर ब्रिटेन के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सीओपी-26 सम्मेलन में शामिल होंगे. यह सम्मेलन इस महीने के अंत में आयोजित होगा. इसी बीच न्यूज18 इंडिया को सूत्रों ने बताया कि भारत ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर होने वाली कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी 26) में जलवायु न्याय के मुद्दे को उठा सकता है. इसके अलावा भारत सीओपी से पहले अपने क्लाइमेट ट्रैकर भी जारी कर सकता है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 और 2 नवंबर को सीओपी 26 में हिस्सा लेने के लिए ग्लासगो में रहेंगे.

    सूत्रों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन पर बात करने से पहले जलवायु न्याय पर बात करने की ज़रूरत है, जिसमें महज तकनीकी बदलाव के बजाय हमारी सोच, हमारी प्रवृत्ति में बदलाव शामिल है. वैश्विक स्तर पर चीजों को एक संपूर्ण नजरिए की जरूरत है. इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि जलवायु वित्त भी एक बड़ा मुद्दा है, जिसे पीएम मोदी उठाएंगे. सूत्रों ने कहा कि विकसित देशों को नेट जीरो की जगह नेट नेगेटिव से शुरुआत करने की जरूरत है, लेकिन भारत ने अब तक नेट जीरो के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया है. भारत इस मामले को लेकर हवा हवाई बातें करने के मूड में नहीं है बल्कि उसके सीओपी 26 के सामने विस्तृत दस्तावेजों के साथ आने की उम्मीद है.

    भारत बैठक में इस बात पर भी जोर दे सकता है कि उसने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को पूरा किया है. साथ ही कार्बन क्रेडिट से पहले ग्रीन क्रेडिट पर बात करने के साथ 100 बिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता को सरकार से सरकार के बीच स्पष्ट हस्तांतरण के साथ पूरा करने की भी जरूरत है. सूत्रों का कहना है कि भारत बैठक में इस बात पर भी दबाव बना सकता है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर बात करने की नहीं अब कार्रवाई करने की जरूरत है. जिस तरह से भारत ने फ्रांस के साथ अंतरराष्ट्रीय सोलार गठबंधन बनाकर कर किया है. इसके साथ ही कार्रवाई के लायक मंच बनाने और अनूठे कदम उठाने की भी जरूरत है ताकि जलवायु परिवर्तन को वैश्विक स्तर पर संभाला जा सके.

    यही नहीं सरकार आगामी एक दो दिनों के भीतर ही अपना क्लाइमेट ट्रैकर भी लाने वाली है, जिसे बेंगलुरु के नेशनल इन्स्टिट्यूट फॉर एडवांस साइंस और चेन्नई के एमएस स्वामीनाथन रिसर्च इन्स्टिट्यूट फाउंडेशन ने विकसित किया है. इसके अलावा सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत मीथेन शपथ लाने के प्रयास को लेकर सहमत नजर नहीं आ रहा है. सूत्रों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या के मामले में विकसित देश हमेशा अपने लक्ष्यों को बदलते रहते हैं. क्योटो प्रोटोकॉल से लेकर पेरिस समझौते और अब सीओपी 26 के इस साल ग्लासगो में होने से पहले यही रुख नजर आया है. यहां हुई तमाम बैठकों में ठोस कुछ भी नहीं निकला जिससे बढ़ते तापमान को कम करने और सर्वनाश की तरफ बढ़ती दुनिया को बचाने के लिए कोई सार्थक कदम उठाया जा सके. सूत्रों बताते हैं कि अक्सर विकसित देश चार मुद्दों पर – तापमान, कम करने, वित्त और जिम्मेदारी को लेकर अपना लक्ष्य बदलते रहते हैं. ऐसे में एक ठोस कदम पर बात करने और उस जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत है.

    लैंसेट काउंटडाउन के आंकड़ों के मुताबिक भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में 2020 में गर्मी के चलते काम के घंटों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया. 2020 में दुनिया भर में लगभग 295 बिलियन घंटे के करीब काम कम हुआ. ये करीब 88 घंटे प्रति व्यक्ति के बराबर है.

    Tags: PM Modi, Pm modi latest news, Pm modi news

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