कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत सरकार ने समय से उठाए कारगर कदम, लेकिन संकट अभी टला नहीं

कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत सरकार ने समय से उठाए कारगर कदम, लेकिन संकट अभी टला नहीं
7 जनवरी को चीन ने दी वायरस की जानकारी और 8 जनवरी से ही एक्टिव हो गया था भारत (फाइल फोटो)

चीन (China) ने 7 जनवरी को COVID2019 के बारे में बताया. इसके तुरंत बाद 8 जनवरी को ही भारत (India) ने अपनी पहली मिशन मीटिंग (Mission Meeting) की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 28, 2020, 9:28 PM IST
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नई दिल्ली. विश्व में सभी देश  COVID2019 वैश्विक महामारी (Global Pandemic) से निपट रहे हैं. इस पर काफी चर्चा हुई है कि किस देश ने किस तरह से इसे संभाला. उनके कदम समय से उठाए गए या नहीं? साथ ही किस देश का मॉडल (Model) इसे संभालने में दूसरों से ज्यादा कारगर रहा? ऐसे में हम नजर डाल रहे हैं कि जनवरी, 2020 से उठाए गए भारत के कदम (Measures) कैसे रहे हैं-

7 जनवरी को चीन ने दुनिया को वायरस की जानकारी, 8 जनवरी से ही एक्टिव हुआ भारत
चीन ने 7 जनवरी को COVID2019 के बारे में बताया. इसके तुरंत बाद 8 जनवरी को ही भारत ने अपनी पहली मिशन मीटिंग की.

17 जनवरी से भारत ने चीन से आने वाले सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग (Screening) शुरू कर दी. 25 जनवरी को पीएम मोदी के प्रधान सचिव ने कोरोना की जानकारियों के बारे में एक उच्च स्तरीय रिव्यू मीटिंग की.



30 जनवरी को ही भारत ने कर दी थी 6 क्वॉरंटाइन सेंटर की व्यवस्था


29 जनवरी को भारत ने N95 मास्क और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) के निर्यात पर रोक लगा दी. 30 जनवरी को जिस दिन भारत में कोरोना का पहला मामला सामने आया टेस्टिंग के लिए 6 लैब की व्यवस्था कर दी गई.

31 जनवरी को 6 क्वारंटाइन सेंटर (Quarantine Center) बना दिए गए. 1 फरवरी को भारत ने अपने नागरिकों को चीन से से बाहर निकालना शुरू कर दिया.



3 फरवरी को ही भारत ने सभी चीनी पासपोर्ट धारकों के वीजा किए निलंबित
भारत में अब तक #COVID2019 के 3 कंफर्म मामले सामने आ चुके थे. इसी स्टेज पर 3 फरवरी को प्रधानमंत्री ने उभर रही परिस्थितियों से निपटने के लिए एक मंत्रियों के समूह का निर्माण किया.

भारत ने 3 फरवरी को ही चीन की यात्रा के खिलाफ एडवायजरी जारी की. साथ ही सभी चीनी पासपोर्ट होल्डर्स के ई-वीजा (E-Visa) निलंबित कर दिए गए.

7 फरवरी तक भारत 139539 यात्रियों की कर चुका था स्क्रीनिंग
भारत में अभी 3 ही मामले सामने आए थे लेकिन 7 फरवरी को स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) ने संसद ने बयान दिया कि 139539 लोगों की स्क्रीनिंग पहले ही की जा चुकी है.

वहीं इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस नेटवर्क (Integrated Disease Surveillance Network) करीब 7 हजार लोगों को ट्रैक कर रहा है. 13 फरवरी को स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना को लेकर मीडिया से बात की.

26 फरवरी तक भारत ने कोरोना से अधिक प्रभावित सभी देशों के लिए जारी की एडवायजरी
अब भी देश में COVID2019 के मामले सिर्फ 3 ही थे. लेकिन भारत की कार्रवाई लगातार जारी रही.
22 फरवरी को सिंगापुर (Singapore) को लेकर एडवायजरी जारी की गई.

24 फरवरी को वियतनाम, नेपाल, इंडोनेशिया, मलेशिया के यात्रियों को स्क्रीनिंग की लिस्ट में जोड़ दिया गया. 26 फरवरी को दक्षिण कोरिया, ईरान और इटली (Italy) की यात्रा करने से बचने की एडवायजरी घोषित की गई.

मार्च में भी भारत इससे निपटने के लिए उठा चुका है ये कदम
3 मार्च में जब मात्र 6 केस सामने आए थे तभी सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था लागू कर दी गई. 4 मार्च को पीएम मोदी (PM Modi) ने सीधा संदेश भेजा और इस बार किसी होली मिलन में न शामिल होने की बात कही.

7 मार्च को पीएम मोदी ने परिस्थितियों का रिव्यू किया. 7 मार्च को ही नई क्वारंटाइन गाइडलाइन्स (Quarantine Guidelines) और यात्रा पर नए प्रतिबंध लगा दिए गये.

भारत में अभी कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले 100 से भी कम थे, तभी 12 मार्च को पीएम मोदी ने घटना की तात्कालिकता और उसके बुरे प्रभाव को लेकर ट्वीट किया.

14 मार्च को जब 100 मामले भी सामने नहीं आए थे, तभी से 52 लैब टेस्ट के लिए तैयार थीं. 18 मार्च को जब 175 मामलों से भी कम थे, कंपल्सरी क्वॉरंटाइन (Compulsory quarantine) को लागू कर दिया गया.

जब कोरोना वायरस से अपनी लड़ाई में युद्ध स्तर पर पहुंचा भारत
19 मार्च को, जब मामले 200 से भी कम थे, पीएम मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया और जनता कर्फ्यू की बात कही. 22 मार्च के बाद से सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इसी दिन COVID2019 इकॉनमिक टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया. 21 मार्च को ही 75 जिलों में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया था.

22 मार्च को सभी ट्रेन सेवाएं, मेट्रो और अंतरराज्यीय बस सेवाएं (Inter State Bus Services) निलंबित कर दी गईं. 22 मार्च को भारत में टेस्ट किए जाने की क्षमता को बढ़ाकर 50000 प्रति हफ्ते कर दिया गया. 23 मार्च को घोषणा की गई कि 24 मार्च से सभी घरेलू उड़ानों को भी रोक दिया जाएगा.

500 से कम मामलों पर ही पीएम मोदी ने देश भर में किया लॉकडाउन
जब भारत में कोरोना वायरस के कुल मामले 500 से कम थे. 24 मार्च को प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (nationwide lockdown) की घोषणा कर दी.

GST में छूट की घोषणा की गई. NDMA को प्रधानमंत्री ने चालू कर दिया. सांस संबंधी उपकरणों के निर्यात पर रोक लगा दी गई.

नौसेना की मदद से की की कोरोना से लड़ने की तैयारी
भारत में अब भी 600 मामलों से कम थे. लेकिन कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ाई को अगले गियर में डाला जा चुका था.

लॉकडाउन के पहले दिन भारत में 650 मामलों से भी कम थे. लेकिन भारतीय नौसेना (Indian Navy) की मदद से गोवा में टेस्टिंग सेवा की शुरुआत की गई.

स्थानीय प्रशासन ने सभी को सुरक्षित रखने के लिए उसी दिन सभी जगहों को सैनिटाइज (Sanitize) कर दिया. भारत में दुनिया का सबसे बड़ा लॉकडाउन लागू किया गया.

स्वास्थ्य इमरजेंसी के साथ ही आर्थिक परिस्थिति से भी निपटी सरकार
26 मार्च तक भारत में 750 मामलों से भी कम थे, तभी बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की जा चुकी थी. किसानों, गरीबों, मनरेगा कर्मचारियों, बुजुर्गों, महिलाओं के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की शुरुआत की गई. जरूरतमंदों को फ्री उज्जवला सिलेंडर दिए गए. स्वास्थ्य इमरजेंसी के साथ ही आर्थिक परिस्थिति से भी निपटा गया.

संपूर्ण लॉकडाउन के तीसरे दिन तक जब मामले 900 से कम ही थे, तभी रिजर्व बैंक (Reserve Bank) ने कई राहतें दीं, जिसमें-

1. दरों में बड़ी रियायत दी गई.
2. सभी तरह की EMI पर तीन महीने के लिए रोक लगा दी गई
3. वर्किंग कैपिटल लोन को आसान बनाया गया.
4. अंतराराष्ट्रीय यात्रियों की ट्रैकिंग के लिए नए कदम उठाए गए.

दुनिया के अलग-अलग देशों में कोरोनावायरस के मामले


हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि हम अभी सुरक्षित हैं. यह सारी बातें यह बताती हैं कि मोदी सरकार अभी तक इस मामले में बेहद तैयारी से कदम उठाती आई है, इसलिए भारत अब तक दूसरे देशों की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित रहा है. इसके लिए आप ऊपर दिए ग्राफ को देखें और लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करते हुए घर पर रहें.

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