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ब्रिटिश PM को थिंक टैंक ने चेताया! भारत से दोस्त नहीं, प्रतिद्वंद्वी की तरह व्यवहार करें

अपने ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Reuters-News18 English)
अपने ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Reuters-News18 English)

चैंथम हाउस-रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स (Chatham House–the Royal Institute of International Affairs) द्वारा तैयार की गई 'ग्लोबल ब्रिटेन, ग्लोबल ब्रोकर' नाम की रिपोर्ट में भारत के वैश्विक महत्व को स्वीकार किया गया है. रिपोर्ट में माना गया है कि ब्रिटेन के लिए भारत 'बेहद जरूरी' है. इसके लिए भारत की आबादी, अर्थव्यवस्था और रक्षा बजट को आधार बनाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 10:31 PM IST
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नई दिल्ली. भारत (India) और ब्रिटेन (Britain) भले ही अपने द्विपक्षीय संबंधों को और ज्यादा मजबूती देने की कोशिश में लगे हैं लेकिन एक ब्रिटिश थिंक टैंक ने बोरिस जॉनसन को चेताया है कि भारत के साथ प्रतिद्वंद्वी की तरह व्यवहार करना चाहिए. चैंथम हाउस-रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स (Chatham House–the Royal Institute of International Affairs) द्वारा तैयार की गई 'ग्लोबल ब्रिटेन, ग्लोबल ब्रोकर' नाम की रिपोर्ट में भारत के वैश्विक महत्व को स्वीकार किया गया है.

भारत को ताकतवर देश के रूप में स्वीकार किया गया
रिपोर्ट में माना गया है कि ब्रिटेन के लिए भारत 'बेहद जरूरी' है. इसके लिए भारत की आबादी, अर्थव्यवस्था और रक्षा बजट को आधार बनाया गया है. लेकिन रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि ब्रिटेन को भारत को एक प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखना होगा न कि एक सहयोगी के तौर पर.

चीन, सऊदी अरब और तुर्की के साथ 'डिफिकल्ट 4' की कैटगरी में रखा गया
रिपोर्ट में भारत को चीन, सऊदी अरब और तुर्की के साथ 'डिफिकल्ट 4' की कैटगरी में रखा गया है. इसके साथ ही बोरिस जॉनसन सरकार को भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ता देने के दौरान ज्यादा रियलिस्टिक होने की ताकीद की गई है. रिपोर्ट कहती है-वो भले ही व्यावसायिक हितों के आधार पर महत्वपूर्ण हो सकते हैं लेकिन वैश्विक लक्ष्यों के आधार पर कई मामलों में प्रतिद्वंद्वी भी साबित हो सकते हैं. रिपोर्ट में ब्रिटेन के भारत में औपनिवेशिक वक्त का भी जिक्र किया गया है.





भारत की आंतरिक राजनीति का जिक्र
साथ ही रिपोर्ट में भारत के भीतर की 'जटिल आंतरिक राजनीति' का भी जिक्र किया गया है. इसके अलावा यूनाइटेड नेशंस सहित भारत के स्थानीय समूहों द्वारा मानवाधिकार के मसलों की चिंता का भी जिक्र रिपोर्ट में है.

गुटनिरपेक्ष संगठन और शंघाई कॉरपोरेशन का भी जिक्र
भारत द्वारा 'पश्चिम' के विरोध का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में गुटनिपरेक्ष संगठन की याद दिलाई गई है. इसके अलावा यह भी बताया गया है कि भारत ने चीन-रूस के साथ शंघाई संगठन में भी गठजोड़ किया है.
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