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भारत-US का पहला '2+2 डायलॉग' आज, डिफेंस डील के अलावा छाए रहेंगे ये मुद्दे

भारत-US का पहला '2+2 डायलॉग' आज, डिफेंस डील के अलावा छाए रहेंगे ये मुद्दे

वार्ता के लिए भारत पहुंच चुके हैं अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस

वार्ता के लिए भारत पहुंच चुके हैं अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस

इस मीटिंग में शामिल होने के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो बुधवार रात को दिल्ली पहुंचे. गुरुवार को दोनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से द्विपक्षीय मुद्दों पर बात करेंगे.

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  • News18Hindi
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    भारत और अमेरिका के बीच पहला '2+2 डायलॉग' गुरुवार को है. राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाली इस मीटिंग में दोनों देशों के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री शामिल होंगे. इस मीटिंग में शामिल होने के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो बुधवार रात को दिल्ली पहुंचे. गुरुवार को दोनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से द्विपक्षीय मुद्दों पर बात करेंगे. इस दौरान भारत-अमेरिका के बीच कई अहम रक्षा समझौते होने वाले हैं. दोनों देश ड्रोन बेचने और सैटेलाइट डेटा के आदान-प्रदान को लेकर भी समझौता कर सकते हैं.

    ड्रोन से लेकर सैटेलाइट डाटा तक, भारत-US के बीच इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

    भारत के लिए रवाना होने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि भारत का रूस से मिसाइल रक्षा प्रणाली और ईरान से तेल खरीदने पर इस वार्ता में चर्चा होगी लेकिन बातचीत इन मुद्दों पर केंद्रित नहीं रहेगी. पोम्पियो ने कहा, ' भारत का रूस से मिसाइल रक्षा प्रणाली और ईरान से तेल खरीदना वार्ता का हिस्सा होगा. यह संबंधों का हिस्सा है. ये सारी बातें मीटिंग के एजेंडे में जरूर रहेंगी, लेकिन मैं नहीं सोचता हूं कि बातचीत इन मुद्दों पर केंद्रित रहेगी.'

    ऐसी संभावना है कि भारत मीटिंग के दौरान अमेरिका को बताएगा कि वह एस-400 ट्रियुम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए रूस के साथ 40,000 करोड़ रुपये का सौदा करने वाला है. पोम्पियो ने कहा, ' आधे दर्जन से अधिक ऐसी चीजें हैं जिस पर इस वार्ता में हम आगे बढ़ना चाहते हैं. ये फैसले महत्वपूर्ण हैं. ये फैसले संबंधों के लिहाज से निश्चित ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हम रणनीतिक बातचीत के दौरान उन मुद्दों को सुलझाते हुए खुद को नहीं देखते हैं और इस दौरान इन्हें सुलझाने का इरादा भी नहीं है.'

    उन्होंने कहा, ' ये ऐसी चीजे हैं जो बड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और अगले 20, 40 और 50 सालों तक रहेंगी. ये ऐसे विषय हैं जिन पर मैं और मैटिस बात करेंगे.’’

    ये होंगे मुख्य मुद्दे
    - दोनों देशों के रक्षा सहयोग को बढ़ाने और दोनों देशों की सेनाओं का ज्वॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने पर चर्चा होगी.
    - भारत इस मीटिंग में H-1B वीज़ा जैसा अहम मुद्दा भी उठा सकता है.
    - भारत-अमेरिका अफगानिस्तान संकट पर भी बात करेंगे.

    क्यों अहम है '2+2 डायलॉग'?
    अधिकारियों का मानना है कि यह मीटिंग न सिर्फ सांकेतिक रूप से दोनों ही देशों के बहुत महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके जरिये दोनों ही देश अपने मनमुटाव दूर करने की कोशिश करेंगे. इनमें भारत के रूस और ईरान के साथ संबंध से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं.

    चीन से मुकाबले के लिए भारत का साथ चाहता है अमेरिका
    अमेरिका चीन से मुकाबला करने के लिए भारत को अपने साइड करना चाहता है. अमेरिका ये भी चाहता है कि भारत रूस से दूरी बना ले. ऐसे में ये मीटिंग दोनों देशों के लिए अपने-अपने हितों को जाहिर करना और सामने वाले की स्थिति भांपने के लिए काफी अहम है. अमेरिकी सेना अधिकारी मरीन जेनरल जेसेफ डनफोर्ड ने कहा कि दोनों देशों की सहभागिता और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए '2+2 डायलॉग' एक ऐतिहासिक कदम है. उन्होंने कहा, 'भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध काफी मजबूत हुआ है. भारत ने चीन द्वारा दक्षिण एशिया में किए जा रहे रक्षा और इकोनॉमिक कॉरीडोर को लेकर आगाह भी किया था.'

    मीटिंग को 2 बार टाल चुका है अमेरिका
    बता दें कि अमेरिका दो बार इस मीटिंग को टाल चुका है. ये मीटिंग पहले अप्रैल में होनी थी, फिर जून में और अब आखिरकार ये 6 सितंबर को होने वाली है.  ये मीटिंग अबसे हर साल होगी. दोनों देश बारी-बारी से इसकी मेजबानी करेंगे.

    मीटिंग से पहले अधिकारियों के बीच व्यापार को लेकर बहस
    दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों की ‘टू प्लस टू’ वार्ता से पहले से पहले उनके वरिष्ठ व्यापार नीति निर्माताओं के बीच बुधवार को जमकर बहस हुई. दोनों पक्षों ने सीमापार व्यापार को लेकर अपनी स्थिति का बचाव किया. भारत के वाणिज्य सचिव अनूप वाधवन ने कम संरक्षणवाद पर जोर देते हुए कहा कि हमें व्यापार घाटे से आगे बढ़कर मौजूदा आर्थिक ताकत के आधार पर शुल्क तय करने चाहिए. अमेरिका के वाणिज्य उप मंत्री अंतरराष्ट्रीय व्यापार गिल्बर्ट कपलान ने दावा किया कि बुनियादी रूप से देखा जाए तो उसकी व्यापार नीतियों में बदलाव नहीं आया है. उन्होंने परस्पर आदान प्रदान पर जोर देते हुए कहा कि इसकी कमी की वजह से ऐसे फैसले होते हैं जो प्रतिकूल होते हैं.

    Tags: America, Nirmala sitharaman, Sushma swaraj

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