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India-China Rift: तिब्‍बत के रास्‍ते चीन को शिकस्‍त देने में जुटा भारत, भारतीय सेना ने तैयार किया खास प्‍लान

पूर्वी लद्दाख में जारी सैन्य टकराव के बीच चीन लगातार उत्‍तरी सीमाओं पर भी भारत को परेशान कर रहा है.
पूर्वी लद्दाख में जारी सैन्य टकराव के बीच चीन लगातार उत्‍तरी सीमाओं पर भी भारत को परेशान कर रहा है.

पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में जारी सैन्य टकराव के बीच चीन (China) लगातार उत्‍तरी सीमाओं पर भी भारत (India) को परेशान कर रहा है. चीन के इसी बर्ताव को देखते हुए भारतीय सेना (Indian Army) ने अपने पड़ोसी मुल्‍क को उसी की जुबान में जवाब देने की तैयार की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 5:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. पड़ोसी देश पाकिस्‍तान (Pakistan) की तरह ही अब चीन (China) भी भारत (India) के लिए लगातार सिर दर्द बनता जा रहा है. पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में जारी सैन्य टकराव के बीच चीन लगातार उत्‍तरी सीमाओं पर भी भारत को परेशान कर रहा है. चीन के इसी बर्ताव को देखते हुए भारतीय सेना (Indian Army) ने अपने पड़ोसी मुल्‍क को उसी की जुबान में जवाब देने की तैयार की है. चीन लगातार तिब्‍बत (Tibet) के रास्‍ते भारतीय सीमा पर गड़बड़ी करने की कोशिश में लगा रहता है. चीनी सेना की इसी हरकत को देखते हुए भारत की नजर अब तिब्‍बत पर टिक गई है. भारतीय सेना अब तिब्‍बत के रास्‍ते ही चीन पर पैनी नजर रखने की तैयारी कर रही है.

खबर है कि सेना अब अपने अधिकारियों को वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ तिब्बती इतिहास, संस्कृति और भाषा का अध्ययन कराने पर जोर दे रही है. सेना का कहना है कि अगर चीन पर नजर रखनी है तो तिब्‍बती भाषा और संस्‍कृति का ज्ञान होना बेहद जरूरी है. इसके बाद ही तिब्‍बत में भारतीय सेना अपने नेटवर्क को मजबूत कर चीनी सेना पर नजर रख सकेगी. तिब्बत को लेकर ये प्रस्ताव पहली बार अक्टूबर में सेना के कमांडरों के सम्मेलन में लाया गया था. भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने शिमला स्थित सेना प्रशिक्षण कमान (ARTRAC) सेना की ओर से दिए गए प्रस्‍ताव को आगे बढ़ाने की बात कही थी.

ARTRAC ने तिब्बत में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले सात संस्थानों की पहचान की है, जहां सेना के अधिकारी अध्‍ययन अवकाश के लिए जा सकते हैं. सेना की ओर से जिन संस्‍थानों की पहचान की गई है, उनमें बौद्ध अध्ययन विभाग (दिल्ली विश्वविद्यालय), केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान (वाराणसी), नालंदा महाविहार (बिहार), विश्व भारती (पश्चिम बंगाल), दलाई लामा इंस्टीट्यूट फॉर हायर एजुकेशन (बेंगलुरु), नामग्याल इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बतोलॉजी, गंगटोक, सिक्किम और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन कल्चर स्टडीज (सीआईसीएचएस), दाहुंग ( अरुणाचल प्रदेश) शामिल हैं.
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सेना के एक अधिकारी ने बताया कि सेना के ज्‍यादातर अधिकारी पाकिस्‍तान की भाषा और संस्‍कृति से अच्‍छी तरह से वाकिफ हैं. लेकिन चीन और चीनी के लोगों के बारे में सेना के अधिकारियों में विशेषज्ञता की कमी है. चीन को वास्तव में समझने वाले अधिकारी संख्या में बहुत कम है. इन कमियों को दूर करने की आवश्यकता है. सेना को भाषाई, संस्‍कृति और व्‍यवहार पैटर्न के संदर्भ में चीन और तिब्बत दोनों पर विशेषज्ञत बनाने की जरूरत है. इसके लिए भाषा और क्षेत्र विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी. इसमें चयनित अधिकारी पाकिस्तान के साथ पश्चिमी मोर्चे के बजाय एलएसी के साथ लंबे समय तक जुड़े रहेंगे.



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सेना के अधिकारी ने कहा, भारत निश्चित रूप से तथाकथित 'तिब्बत कार्ड' खेलने से बच रहा है, जो वर्षों से चीन के लिए एक प्रमुख रेड-लाइन है. अब वक्‍त आ गया है कि चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए, जिससे भारतीय सीमा को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सके.
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