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दक्षिण भारत में सुखोई का पहला स्कवाड्रन तैनात, हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी मे मिलेगी मदद

News18Hindi
Updated: January 20, 2020, 7:41 PM IST
दक्षिण भारत में सुखोई का पहला स्कवाड्रन तैनात, हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी मे मिलेगी मदद
भारतीय वायुसेना ने तमिलनाडु के तंजावुर स्‍टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान की तैनाती कर दी है.

चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत (Gen. Bipin Rawat), वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया (Rakesh Kumar Singh Bhadoria) समेत अन्य शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में सोमवार को सुखोई-30 एमकेआई को बेड़े में शामिल किया गया.

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तंजावुर. भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) ने तमिलनाडु के तंजावुर (Thanjavur) में अपने स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) का पहला स्क्वाड्रन बेड़े में शामिल कर लिया है. इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की तंजावुर में तैनाती से सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर (Indian Ocean) क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी. यह एडवांस लड़ाकू विमान ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें (BrahMos Supersonic Cruise Missiles) ले जाने में सक्षम है.

हर मौसम में बड़ी भूमिका निभाने में सक्षम है सुखोई-30 एमकेआई
चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत (Gen. Bipin Rawat), वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया (Rakesh Kumar Singh Bhadoria) समेत अन्य शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में सोमवार को सुखोई-30 एमकेआई को बेड़े में शामिल किया गया. आधुनिक तकनीकों से लैस यह विमान सभी मौसम में बड़ी भूमिका निभाने में सक्षम है. भारतीय वायुसेना की रक्षा क्षमता 222 स्कवाड्रन 'टाइगरशार्क' की तैनाती से बढ़ेगी. इसकी तैनाती से सामरिक रूप से अहम हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी. सुखोई के यहां तैनात किए जाने से भारतीय द्वीप क्षेत्रों (Indian Island Regions) और हिंद महासागर क्षेत्र में संचार की समुद्री लाइनों की भी सुरक्षा हो सकेगी.

सुखोई-30 एमकेआई में हवा में ही भरा जा सकता है ईंधन



सुखोई-30 एमकेआई एक बार में 3,000 किमी की उड़ान भर सकता है. इस विमान में हवा में ही ईंधन (Fuel) भरा जा सकता है. रूस (Russia) के सहयोग से भारत (India) द्वारा निर्मित सुखोई-30 एमकेआई को दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों (Fighter Aircraft) में एक माना जाता है. इसे बनाने के लिए भारत और रूस के बीच 2000 में समझौता हुआ था. भारत को पहला सुखोई-30 विमान 2002 में मिला था. रूस के सहयोग से भारत ने 2015 में स्वेदश निर्मित सुखोई-30 एमकेआई को भारतीय वायुसेना में शामिल करके अपनी ताकत कई गुना बढ़ा ली. वर्तमान में भारत के पास 200 से ज्यादा सुखोई-30 एमकेआई विमान हैं.

इस विमान में है ऑटोमेटिक फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम
लंबाई से लेकर रेंज और मिसाइल ले जाने की क्षमता तक के मामले में सुखोई-30 एमकेआई को अमेरिका F-16 से बेहतर माना जाता है. इसमें सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम लगा है, जो इसे किसी भी मौसम में दिन और रात दोनों वक्त काम करने के काबिल बनाता है. साथ ही इसमें लॉन्ग रेंज रेडियो नेविगेशन सिस्टम है. इसमें ऑटोमेटिक फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम है. ऑटोमेटिक सिस्टम से नेविगेशन सिस्टम को जानकारी मिलते ही यह खुद ही फ्लाइट के रूट से जुड़ी समस्‍याओं को ही सुलझा लेता है. इसमें टारगेट को नेस्तनाबूद करने के साथ ही वापस अपने एयरफील्ड तक लैंडिंग करना शामिल है.

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First published: January 20, 2020, 7:41 PM IST
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