कोरोनाः 21 दिन, 1400 घंटे, देश में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए वायुसेना का 'महामिशन'

स्वदेश के अलावा भारतीय वायुसेना के विमानों ने जर्मनी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों के लिए भी उड़ान भरी. ANI

स्वदेश के अलावा भारतीय वायुसेना के विमानों ने जर्मनी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों के लिए भी उड़ान भरी. ANI

Medical Oxygen: भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टरों ने 732 उड़ानें भरी हैं और 498 ऑक्सीजन टैंकरों के देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने के साथ विदेशों में ले जाने और ले आने का काम किया है.

  • Share this:

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जब देशवासियों की सांसों की डोर थमने लगी थी, तब वायुसेना के रणबांकुरों ने मोर्चा संभाला और अदृश्य दुश्मन के खिलाफ अथक लड़ाई लड़ते हुए 21 दिनों में 1400 घंटे की जबरदस्त उड़ान भरी. ये उड़ान देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में प्राणवायु मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए थी, ताकि अपनों की सांसों को टूटने से रोका जाए और वायरस संक्रमण के खिलाफ इंसानी जिंदगी को बचाते हुए हिंदुस्तान की जीत सुनिश्चित की जाए. देश के अस्पतालों के साथ मिलकर काम करते हुए भारतीय वायुसेना ने मेडिकल ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्टेशन और कोविड रिलीफ ऑपरेशंस में एक बार फिर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है. वायुसेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टरों ने 732 उड़ानें भरी हैं और 498 ऑक्सीजन टैंकरों के देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने के साथ विदेशों में ले जाने और ले आने का काम किया है.

कोरोना के खिलाफ जंग में मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारतीय वायुसेना ने 42 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उतारे थे. इनमें 6 सी-17 और इल्युशिन-76 ट्रांसपोर्ट विमान भी शामिल थे, जबकि मीडियम श्रेणी के 30 सी-130जे और एन-32 एयरक्राफ्ट को भी इस मेगा अभियान में लगाया गया था. भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता ने ANI से कहा कि घरेलू स्तर पर एयरफोर्स के पायलटों ने 939 घंटे की 634 उड़ानें भरीं और 6856.2 मीट्रिक टन ऑक्सीजन वाले 403 कंटेनर्स को एक से दूसरी जगह पहुंचाया है. इसके साथ ही वायुसेना ने 163.3 मीट्रिक टन के अन्य मेडिकल उपकरण भी ट्रांसपोर्ट किए हैं.

स्वदेश के अलावा भारतीय वायुसेना के विमानों ने जर्मनी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों के लिए भी उड़ान भरी और वहां से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और अन्य रिलीफ मैटेरियल हिंदुस्तान लेकर आए. एयरफोर्स के अधिकारियों ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे विमानों ने 480 घंटे की 98 उड़ानें भरी हैं, इसके जरिए 95 कंटेनर्स विदेशों से स्वदेश लाए गए हैं." उन्होंने कहा कि विदेशों से लाए गए कंटेनर्स में 793.1 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ढोया गया, जबकि 204.5 मीट्रिक टन के अन्य सामान और उपकरण भी विदेशों से लाए गए.

भारतीय वायुसेना 21 अप्रैल से देश और विदेशों से मेडिकल ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्टेशन में जुटी हुई है. इसके लिए बकायदा एयरफोर्स ने स्पेशल टीम और क्रू का गठन किया है. साथ ही उड़ानों के सुरक्षित आवागमन के लिए बायो बबल भी तैयार किया गया है, ताकि वायुसेनाा कर्मियों को किसी भी तरह के संक्रमण का शिकार ना होना पड़े.


बता दें कि महामारी के मुकाबले के साथ भारतीय वायुसेना के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं. देश के उत्तरी हिस्से में सीमा पर पिछले एक साल से भारत और चीन के तनाव चल रहा है. ऐसे में चीनियों के खिलाफ वायुसेना को अपना ऑपरेशन भी जारी रखना है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज