1965 जंग के जांबाज योद्धा मार्शल अर्जन सिंह का निधन, पीएम और राष्ट्रपति ने जताया दुख

News18Hindi
Updated: September 16, 2017, 10:00 PM IST
1965 जंग के जांबाज योद्धा मार्शल अर्जन सिंह का निधन, पीएम और राष्ट्रपति ने जताया दुख
भारतीय वायुसेना (IAF)के मार्शल अर्जन सिंह का 98 साल की उम्र में निधन हो गया.
News18Hindi
Updated: September 16, 2017, 10:00 PM IST
भारतीय वायुसेना (IAF)के मार्शल अर्जन सिंह का 98 साल की उम्र में निधन हो गया.  उन्हें आज सुबह हार्ट अटैक आया था जिसके बाद उन्हें रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनकी हालत लगातार गंभीर बन हुई थी.

पीएम नरेंद्र मोदी ने उनकी मृत्यु पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अर्जन सिंह के आकस्मिक निधन पर पूरा देश शोक व्यक्त करता है. उन्होंने कहा कि हम उनकी अद्वतीय देश सेवा को हमेशा याद रखेंगे. पीएम ने अन्य ट्वीट में लिखा - भारत 1965 की जंग में उनके बेमिसाल नेतृत्व को कभी नहीं भूल सकता.



इसके साथ ही मोदी ने कहा कि अर्जन सिंह ने हमेशा वायुसेना में क्षमता निर्माण पर जोर दिया जिसने भारतीय डिफेंस की ताकत को और मजबूत किया. पीएम मोदी ने कहा कि इस दुख की घड़ी में मेरी पूरी संवेदना उनके परिवार के साथ है.










साथ ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अर्जन सिंह के निधन पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि अर्जन सिंह जैसे जांबाज योद्धा के चले जाने से हम दुखी हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध और 1965 की जंग में निभाए सिंह के शानदार नेतृत्व को भी याद किया.




इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अर्जन सिंह से मिलने अस्पताल गए थे और उनकी तबीयत से संबंधित जानकारी हासिल की थी. रक्षामंत्री निर्मला सितारमण भी पीएम मोदी के साथ अस्पलात में अर्जन सिंह से मिली थीं.


सिंह से मिलने के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि अर्जन सिंह की हालत अभी गंभीर है. इसके साथ ही पीएम मोदी उनके परिवार से भी मुलाकात की थी.

बता दें कि वायुसेना में अर्जन सिंह अकेले ऐसे ऑफिसर थे जिन्हें फील्ड मार्शल के बराबर फाइव स्टार रैंक दी गई. उनके अलावा फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा और फील्ड मार्शल सैम मानेक शा को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है.

भारतीय सैन्य इतिहास के नायक रहे सिंह ने 1965 की लड़ाई में भारतीय वायुसेना का नेतृत्व किया था. पाकिस्तान ने 1965 में ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम शुरू किया जिसमें उसने अखनूर शहर को निशाना बनाया. तब सिंह ने साहस, प्रतिबद्धता और पेशेवर दक्षता के साथ भारतीय वायु सेना का नेतृत्व किया.

भारतीय शश्स्त्र बल में अर्जन सिंह के बाद पांच सितारा रैंक में कोई भी अधिकारी दाखिल नही हुआ.
उनकी सम्पूर्ण शिक्षा मोंटगोमरी (जो कि अब सहिवाल दक्षिणी पंजाब, पाकिस्तान है) से हुई. इसके बाद सन 1938 में उनका दाखिला क्रेन्वेल के आरएएफ कॉलेज में हुआ जहां सन 1939 में उन्हें साधिकार पायलट ऑफिसर के रूप में नियुक्ति मिली.
First published: September 16, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर