बालाकोट Air Strike पर फिर पकड़ा गया PAK का झूठ, मिराज से 10 मिनट लेट था F16

बालाकोट Air Strike पर फिर पकड़ा गया PAK का झूठ, मिराज से 10 मिनट लेट था F16
मिराज 2000 की फाइल फोटो

बालाकोट ऑपरेशन से जुड़ी IAF की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के हाई अलर्ट पर रहने के बाद भी मिशन पूरा हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2019, 12:59 PM IST
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पुलवामा हमले के बाद वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में 26 फरवरी को एयर स्ट्राइक की थी. वायुसेना ने एयर स्ट्राइक पर एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसके मुताबिक छह में से कुल पांच टार्गेट्स को निशाना बनाया गया था. इस रिपोर्ट के जरिये पहली बार वायुसेना ने निशाना बनाये गये ठिकानों की संख्या बताई. ऑपरेशन से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के हाई अलर्ट पर रहने के बाद भी मिशन पूरा हुआ.

बता दें 14 फरवरी को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर फिदायीन हमले में 40 जवान शहीद हो गये थे. जिसके जवाब में भारत ने आतंकी सगंठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हमला किया था. भारतीय वायुसेना ने मिराज 2000 से आतंकी संगठन के ठिकानों पर हमला किया, जिसके बाद पाकिस्तानी वायुसेना के F16 विमान उड़ाये थे.

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अंग्रेजी अखबार 'हिन्दुस्तान टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना ने एक रिपोर्ट दी है, जिसमें इस ऑपरेशन की डिटेल शेयर की गई हैं. साथ ही इस ऑपरेशन की सभी सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का जिक्र किया गया है, ताकि भविष्य के किसी ऑपरेशन में इनका ख्याल रखा जा सके. अखबार के मुताबिक रिपोर्ट की चर्चा वायुसेना की एक हाई लेवल मीटिंग में हुई.
8 लड़ाकू हवाई अड्डों पर अव्यवस्थित रहा पाकिस्तान

रिपोर्ट में कहा गया है कि वायुसेना के मिराज -2000 के हमला करने के बाद तुरंत लौट आया और तब तक पाकिस्तान 'कम से कम 8 फाइटर बेस' से अपने जहाज हटाने को मजबूर हो गया. इसमें सरगोदा में मुशफ, शोरकोट में रफीकी, कमारा अटोक में मिन्हास और चकवाल में मुराद जहाज शामिल हैं. नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर सुरक्षा से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि 'पाकिस्तानी वायुसेना और भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बीच करीब 10 मिनट की दूरी थी.'

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अधिकारी ने यह भी बताया कि 'पाकिस्तान को जवाब की उम्मीद तो थी, लेकिन उसे यह अंदाजा नहीं था कि हम हवाई रास्ता अख्तियार करेंगे.' रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटेलीजेंस की  'सटीकता' और ठिकानों का चुनना भी वायुसेना के लिए सकारात्मक रहा. नाम न बताने की शर्त पर एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 'इंटेलीजेंस की क्वालिटी के मदद से हमें तीन घंटे के भीतर पाकिस्तान में हमला करने में मदद मिली.'

रिपोर्ट में पायलट्स की सराहना

रिपोर्ट में उन पायलट्स की भी सराहना की गई है, जो इस मिशन पर थे. माना जा रहा है कि जो पायलट्स इस मिशन पर गये थे उन्हें सम्मानित किया जाएगा. देश भर के अलग-अलग हवाई ठिकानों से करीब 6,000 वायुसेना के अधिकारी इस मिशन में शामिल थे.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि रणनीतिक और सामरिक स्तर पर तरकीब के चलते पाकिस्तान को इस कार्रवाई की कोई भनक तक नहीं लगी. वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ और भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारी सामान्य कार्यों में लगे हुए थे. इसने पाकिस्तान को कुछ हद तक सुस्त कर दिया था.

महत्वपूर्ण बात यह है कि हमले के दौरान रूस निर्मित SU-30, जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित ठिकानों की ओर उड़ा, जिससे पाकिस्तान को अपने वायुसेना को एक अलग क्षेत्र में लगाना पड़ा.
रिपोर्ट के आखिरी में उस हथियार का जिक्र भी किया गया है जिसकी मदद से वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हमला किया. भारत ने Spice 2000 गाईडेड मिसाइल का इस्तेमाल किया था. रिपोर्ट में कहा गया है - 'तय किये गये छह में से पांच ठिकानों को निशाना बनाया गया.'

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