भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों ने की 10 घंटे से ज्यादा की मैराथन बातचीत

भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों ने की 10 घंटे से ज्यादा की मैराथन बातचीत
भारतीय अधिकारी ने चीनी सैनिकों की तुरंत वापसी की मांग की गई (सांकेतिक फोटो)

सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने पांच मई से पहले पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) के सभी इलाकों में जो पूर्व की यथास्थिति थी, उसे फिर से बहाल करने पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में चीन (China) के ‘‘नए दावों’’ को लेकर भी चिंताओं से अवगत कराया गया.

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नई दिल्ली. पैंगोंग त्सो (Pagong Tso) और देपसांग (Depsang) समेत पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में गतिरोध वाले सभी स्थानों से समयबद्ध तरीके से सैनिकों (Soldiers) को पीछे हटाने की प्रक्रिया की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय और चीनी सेना (Chinese Army) के कमांडरों के बीच मंगलवार को 10 घंटे से भी अधिक समय तक गहन बातचीत हुई. अधिकारियों ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल (Lieutenant General) स्तर की चौथे चरण की वार्ता में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास पीछे के सैन्य प्रतिष्ठानों से बड़ी संख्या में सैनिकों और हथियारों को हटाने के कदमों पर ध्यान केन्द्रित किया गया.

सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने पांच मई से पहले पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) के सभी इलाकों में जो पूर्व की यथास्थिति थी, उसे फिर से बहाल करने पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में चीन (China) के ‘‘नए दावों’’ को लेकर भी चिंताओं से अवगत कराया गया और पैंगोंग त्सो (Pagong Tso) समेत कई इलाकों से चीनी सैनिकों की तुरंत वापसी की मांग की गई. बैठक (meeting) की जानकारी के बारे में हालांकि कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई यह बैठक रात 9 बजे तक जारी रही
लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की चौथे चरण की वार्ता एलएसी पर भारत की तरफ चुशूल में निर्धारित बैठक बिंदु पर सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और रात नौ बजे तक जारी रही. बातचीत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर ने किया.
सूत्रों ने बताया कि इस उच्चस्तरीय बैठक में ध्यान पैंगोंग सो और देपसांग में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया के दूसरे चरण को शुरू करने के साथ ही समयबद्ध तरीके से पीछे के प्रतिष्ठानों से बलों एवं हथियारों को हटाने पर दिया गया. सैन्य स्तर पर 30 जून को हुई तीसरे दौर की वार्ता 12 घंटे तक चली थी. संघर्ष के स्थानों से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया के पहले चरण को लागू करने के बाद यह वार्ता हो रही है.



भारत की मांग के अनुसार PLA ने फिंगर फोर में काफी कम की अपनी मौजूदगी
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने गोगरा, हॉट स्प्रिंग और गलवान घाटी से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है और भारत की मांग के अनुरूप पिछले एक हफ्ते में पैंगोंग सो इलाके में फिंगर फोर में अपनी मौजूदगी को काफी हद तक कम कर लिया है.

परस्पर सहमति से लिए गए फैसले के अनुरूप दोनों पक्षों ने संघर्ष वाले ज्यादातर स्थानों में न्यूनतम तीन किलोमीटर का बफर जोन बनाया है. सैनिकों के पीछे हटने की औपचारिक प्रक्रिया छह जून को शुरू हुई थी जब इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इलाके में तनाव कम करने के तरीकों पर करीब दो घंटे तक फोन पर बातचीत की थी.

दोनों देशों के बीच हो चुकी है लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की 3 चरण की वार्ता
दोनों देशों के बीच पहले ही लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की तीन चरण की वार्ता हो चुकी है और अंतिम वार्ता 30 जून को हुई थी जब दोनों पक्ष गतिरोध को समाप्त करने के लिए “शीघ्र, चरणबद्ध और कदम दर कदम” तरीके से तनाव कम करने को “प्राथमिकता” देने पर सहमत हुए थे.

सूत्रों ने बताया कि मंगलवार की बैठक में दोनों पक्ष अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में पूरी तरह से शांति स्थापित करने के लिए एक रूपरेखा को भी अंतिम रूप दे सकते हैं जहां दोनों देशों के सैनिकों के बीच आठ हफ्ते तक गतिरोध चला.

15 जून को हुई हिंसा के बाद बिगड़ गई थीं परिस्थितियां
लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर वार्ता का पहला दौर छह जून को हुआ था जिसमें दोनों पक्षों ने गतिरोध वाले क्षेत्रों से पीछे हटने के एक समझौते को अंतिम रूप दिया था. हालांकि 15 जून को उस समय स्थिति बिगड़ गई जब गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसा झड़प हुई.

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तनाव उस समय बढ़ गया था जब गलवान घाटी में हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. झड़प में चीन के सैनिक भी हताहत हुए थे लेकिन इस संबंध में उसने अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है. एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन के हताहत सैनिकों की संख्या 35 है.
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