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Army Day: अब तक इन 5-5 युद्ध और मिलिट्री ऑपरेशन में जीत हासिल कर चुकी है सेना

Demo Pic.
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Army Day 2021: हैदराबाद का विलय, गोवा, दमन और दीव का विलय भी इंडियन आर्मी (Indian Army) ने इसी तरह के ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कराया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 10:59 PM IST
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नई दिल्ली. भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) के बीच 1971 को लड़ी गई लड़ाई के हीरो कर्नल रिटायर्ड शिवकुमार कुंजरू बताते हैं, “15 जनवरी, 1948  को लेफ्टिनेंट जनरल (बाद में फील्ड मार्शल) केएम करियप्पा ने भारतीय सेना (Indian Army) के पहले भारतीय कमांडिग इन चीफ के रूप में आखिरी ब्रिटिश कमांडर सर फ्रांसिस बुचर से पद भार संभाला था, इसी के चलते इस दिन को आर्मी डे (Army Day) के रूप में मनाया जाता है. एक खास बात यह भी कि 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस (Republic Day) से पहले इंडियन आर्मी उन लड़ाई को भी याद करती है जिसमे ऐतिहासिक जीत हासिल की थी.”

1967 की भारत-चीन लड़ाई-

वर्ष 1967 में रणनीतिक स्थिति वाले 14200 फीट पर नाथुला दर्रे में ये लड़ाई हुई थी. नाथुला दर्रा तिब्बत-सिक्किम सीमा पर है, जिससे होकर पुराना गैंगटोक-यातुंग-ल्हासा व्यापार मार्ग गुजरता है. 1967 के टकराव के दौरान भारत की 2 ग्रेनेडियर्स बटालियन के जिम्मे नाथुला की सुरक्षा थी. इस बटालियन की कमान तब ल़े कर्नल (बाद में ब्रिगेडियर) राय सिंह के हाथों में थी.




23 अक्तूबर, 1947 को पाक कबाइलियों से हुआ था

कबाइलियों की ओर से सबसे बड़ा हमला 23 अक्तूबर को मुजफ्फराबाद की ओर से हुआ. मुजफ्फराबाद को तबाह करने के बाद कबाइलियों का अगला निशाना थे उरी और बारामूला. 23 अक्तूबर, 1947 को उरी में घमासान युद्ध हुआ. हमलावरों को रोकने के लिए ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में वहां मौजूद सेना उरी में वह पुल ध्वस्त करने में कामयाब हुई, जिससे हमलावरों को गुजरना था. एक गोली लगने से ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह वहीं शहीद हो गए, लेकिन हमलावर आगे नहीं बढ़ पाए.

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1965 में भारत के 26 हजार सैनिक घुस गए थे पाक में

भारत और पाकिस्‍तान के बीच 1965 की जंग की वजह कश्‍मीर विवाद से अलग गुजरात में मौजूद कच्‍छ के रण की सीमा थी. इस सीमा पर पाक ने जनवरी 1965 से गश्‍त शुरू की थी. 5 अगस्त 1965 को भारत के 26,000 सैनिकों ने लाइन ऑफ कंट्रोल को पार किया था.  उस वक्त पाकिस्तान ने कश्मीर के उरी और पुंछ जैसे इलाकों पर अपना कब्जा कर लिया था तो वहीं भारत ने पीआके से करीब आठ किलोमीटर दूरी पर स्थित हाजी पीर पास को अपने कब्जे में कर लिया था. छह सितंबर को भारत की ओर से इस युद्ध की शुरुआत की आधिकारिक घोषणा की गई. यह युद्ध 23 सितंबर 1965 को खत्म हुआ था.

1971 में जब पाक से अलग कर दिया बांग्लादेश

पाकिस्तान इस भुलावे में था कि अमेरिका और चीन उसकी हेल्प करेंगे. लेकिन भारत ने ईस्ट पाकिस्तान में तेजी से वॉर कर तीन दिन में ही एयर फोर्स और नेवल विंग को तबाह कर दिया. इस वजह से ईस्ट पाकिस्तान की राजधानी ढाका में पैराट्रूपर्स आसानी से उतर गए, जिसका पता जनरल एएके नियाजी को 48 घंटे बाद लगा. उसने सोचा था कि भारत की सेना ईस्ट पाकिस्तान में नदियों को पार कर ढाका तक नहीं पहुंच पाएगी और वह बॉर्डर पर ही उलझे रहेंगे. यह उसकी भूल साबित हुई. भारतीय सेना ने पैराट्रूपर्स की मदद से ढाका को ही घेर लिया.

कारगिल में पाक सेना के मारे थे 2700 सैनिक

पाकिस्तानी सेना 1998 से ही कारगिल युद्ध करने की कोशिशों में थी. इसके लिए उन्होंने अपने 5000 जवानों को कारगिल की चढ़ाई करने के लिए भेजा था. सरकार को खबर मिली थी कि पाकिस्तान ने कारगिल के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया है. इसके बाद दुश्मनों को अपनी जमीन से दूर भगाने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू हुआ.

इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का इस्तेमाल किया था.  मिग-27 की मदद से उन जगहों पर बम गिराए थे जहां पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा था.  साथ ही मिग-29 से पाकिस्तान के कई ठिकानों पर आर-77 मिलाइलें दागी गईं थीं. 8 मई को शुरू हुए इस युद्ध में 11 मई से इंडियन एयरफोर्स की एक टुकड़ी ने सेना की मदद करनी शुरू कर दी थी.

दूसरे देशों में ऑपरेशन कर कराया ताकत का अहसास

1988 को मालदीव में किया गया ऑपरेशन कैक्टस हो या फिर 1987 में श्रीलंका जाकर ऑपरेशन पवन के तहत लिट्टों को खदेड़ने की बात, हर जगह भारतीय सेना उम्मीदों पर खरी उतरी थी. तख्ता पलट की कोशिश के दौरान जब मालदीव कई देशों से मदद मांग रहा था तो सरकार ने आर्मी और एयर फोर्स पर भरोसा करते हुए सिर्फ डेढ़ घंटे में मदद पहुंचाई थी.

अगर 1984 की बात करें तो आर्मी ने सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के तहत पाकिस्तानी कब्जे की कोशिश को नाकाम किया था. जिसका असर ये हुआ कि आजतक पाक सियाचिन की ओर दोबारा निगाह नहीं उठा पाया है.
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