सेना की रेजीमेंट्स को लेकर दलित नेता ने की मोदी सरकार से ये बड़ी मांग!

सेना की रेजीमेंट्स को लेकर दलित नेता ने की मोदी सरकार से ये बड़ी मांग!
सेना में कई रेजीमेंट जातियों के नाम पर हैं

दलित नेता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट ओपी धामा ने कहा है अगर देश में जातिवाद को खत्म करना है तो सेना में शहीदों के नाम पर रेजीमेंट बनाई जाएं.

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अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि यदि वो सत्ता में आए तो 'अहीर बख्तरबंद रेजीमेंट' बनवाएंगे. बीजेपी नेता दिनेश लाल यादव निरहुआ को भी इसका समर्थन करना पड़ा था. फिर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने चमार रेजीमेंट को बहाल करने की मांग उठा दी. दरअसल, यादव समाज करीब दो दशक से अलग-अलग मंचों पर इसकी मांग उठा रहा है, धरना-प्रदर्शन और आंदोलन कर रहा है.

यही नहीं कुछ दलित संगठन चमार रेजीमेंट बहाल करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. यह मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भी पहुंचा है. लेकिन अब हरियाणा के एक दलित नेता ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर जातियों और क्षेत्रों के नाम पर बनी सेना की रेजीमेंट्स को खत्म करने की मांग की है. इस तरह का मामला एक बार कोर्ट भी पहुंच चुका है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या जातियों और राज्यों के नाम पर बनी सेना की रेजीमेंट्स को खत्म किया जा सकता है?

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शहीदों के नाम पर बनाई जाएं रेजीमेंट 



दलित नेता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट ओपी धामा ने कहा है अगर देश में जातिवाद को खत्म करना है तो सेना में शहीदों के नाम पर रेजीमेंट बनाई जाएं. एयरफोर्स और नेवी में इस तरह जातियों के नाम पर कोई रेजिमेंट नहीं है. धामा ने आरटीआई डालकर यह जानकारी ली कि इस समय सेना में कितनी रेजीमेंट हैं तो पता चला कि इस समय 23 रेजीमेंट हैं. जिनमें से कई जातियों और इलाकों के नाम पर भी हैं.

इनमें मुख्य तौर पर जाट रेजीमेंट, राजपूत रेजीमेंट, गोरखा रेजीमेंट, सिख रेजीमेंट, डोगरा रेजीमेंट, पंजाब रेजीमेंट, बिहार रेजीमेंट और असम रेजीमेंट आदि शामिल हैं. उनका कहना है कि जातियों के नाम पर बनी रेजीमेंट्स को समाप्त करने की मांग को लेकर 2012 में एक मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था. लेकिन क्या हुआ कुछ पता नहीं.

भर्ती के समय ना हो जाति का कॉलम
डॉ. बीआर आंबेडकर एजुकेशन सोसायटी के चेयरमैन धामा ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर अपील की है कि योद्धाओं के नाम पर रेजीमेंट बनाई जाएं. आर्मी में भर्ती किए जाते समय एप्लीकेशन में जाति और धर्म का कॉलम समाप्त कर दिया जाए.

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धामा ने कहा कि पिछले दिनों यादव समाज की कई संस्थाओं ने भारतीय सेना में अहीर रेजीमेंट के गठन की मांग उठाई थी. इसी तरह की मांग देश की अन्य जातियों और समुदायों द्वारा भी उठाई जा सकती है, जो राष्ट्रहित में नहीं है.

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