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पाक के खिलाफ Air Force पानी के रास्ते ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के लिए आर्मी को ऐसे बना रही ताकतवर

इस तरह की जम्प हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर से भी हो सकती है. (File Photo)

इस तरह की जम्प हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर से भी हो सकती है. (File Photo)

एयर फोर्स (Air Force) का पैरा ट्रेनिंग स्कूल (Para Training School) आगरा (Agra) में ये ट्रेनिंग दे रहा है. ये स्कूल एशिया का नंबर वन स्कूल है. हवा में कलाबाजी दिखाने वाली आकाश गंगा (Akash Ganga) टीम भी इसी का हिस्सा है.

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    नई दिल्ली. इंडियर एयर फोर्स (Indian Air Force) का पैरा ट्रूपर ट्रेनिंग स्कूल (PTS) देश ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा और आधुनिक इंस्टीट्यूट है. लड़ाई के बदलते तौर-तरीकों और छल कपट को देखते हुए इंडियन आर्मी (Indian Army) की पैरा रेजीमेंट (Para Regiment) को समुद्र, नदी और तालाब में भी जंप करने की एडवांस ट्रेनिंग दे रहा है. विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह की ट्रेनिंग सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) जैसे ऑपरेशन में खासा महत्व रखती है.

    फौज की बात करें तो अब वक्त बहुत बदल चुका है. अब लड़ाइयां उस तरह से नहीं लड़ी जाती हैं जैसे पाकिस्तान और चीन के खिलाफ 1962, 65 और 71 में लड़ी गईं थी. बीते कुछ समय में बहुत बदलाव आ चुका है. अब एक टॉरगेट पर हमला करने के लिए चार रास्ते खोजे जाते हैं. उन्हीं में से एक रास्ता होता है पानी का. मतलब समुद्र, नदी और झील-तालाब आदि. इसी को ध्यान में रखते हुए इंडियन एयर फोर्स का पैरा ट्रूपर ट्रेनिंग स्कूल अब पानी में जंप करने की ट्रेनिंग को खासा महत्व दे रहा है.

    'पानी में जंप पर अब ज्यादा फोकस'
    इंडियन आर्मी की पैरा रेजीमेंट से लेफ्टीनेंट कर्नल रिटायर्ड जीएम खान ने न्यूज18 हिन्दी को बताया कि पहले भी पानी में जंप कराई जाती थी. लेकिन इस पर इतना फोकस नहीं किया जाता था, जितना अब किया जा रहा है. इसमें सबसे बड़ा काम ये होता है कि पानी में जम्प करने के बाद अपने आपको पैराशूट से अलग करना. अगर पैराशूट की रस्सियों में उलझ गए तो परेशानी हो सकती है. अपने हथियारों को पानी में सुराक्षित करना. जल्द से जल्द पानी से बाहर आकर अपने दूसरे साथियों से मिलना आदि.

    इस तरह की ट्रेनिंग बेसिक और एडवांस कोर्स के रूप में दी जाती है.


    ‘आज के वक्त में इसलिए है जरूरी’
    कर्नल जीएम खान का कहना है कि उदाहरण के तौर पर हम कहीं ऑपरेशन को अंजाम देने जा रहे हैं. लेकिन ज़मीन से आप जा नहीं सकते, क्योंकि वहां दुश्मन की निगाह है. ऐसे में टॉरगेट के आसपास जो तालाब, झील, नदी होती है तो वहां जवानों को हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर जैसी जरूरत हो से जंप कराई जाती है. वहां से जवान अपने टॉरगेट की ओर बढ़ते हैं.

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