जम्मू-कश्मीर: तनाव के दावे फेल, भारतीय सेना में भर्ती होने पहुंचे 29,000 से ज्यादा युवा

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Updated: September 3, 2019, 11:26 PM IST
जम्मू-कश्मीर: तनाव के दावे फेल, भारतीय सेना में भर्ती होने पहुंचे 29,000 से ज्यादा युवा
जम्मू-कश्मीर में तनाव के बीच भी 29 हजार से ज्यादा युवा भारतीय सेना की भर्ती प्रक्रिया में पहुंचे हुए हैं (एक युवा के सीने की नाप लेता अफसर)

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में तनाव की ख़बरों के बीच जम्मू क्षेत्र (Jammu Area) के रियासी में मंगलवार को सेना में भर्ती (Army Recruitment) की सात दिवसीय रैली शुरू हुई है. इसमें विभिन्न जिलों के 29,000 से अधिक युवाओं ने पंजीकरण (Registration) करवाया है.

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जम्मू: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में तनाव की ख़बरों के बीच जम्मू क्षेत्र (Jammu Area) के रियासी में मंगलवार को सेना में भर्ती (Army Recruitment) की सात दिवसीय रैली शुरू हुई है. इसमें विभिन्न जिलों के 29,000 से अधिक युवाओं (Youths) ने पंजीकरण (Registration) करवाया है.

जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य (Special Status) के दर्जे से संबंधित अनुच्छेद 370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के बाद यह पहली ऐसी भर्ती रैली है. इसलिए इस पर सबकी नज़रे हैं.

युवा उत्साह, शांति और प्रगति को लगाना चाहते हैं गले
जम्मू स्थित जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा कि यह उत्साह, शांति और प्रगति को गले लगाने की स्थानीय युवाओं की इच्छा का संकेत है. भारतीय सेना (Indian Army) का उग्रवाद निरोधक बल (वर्दी) जम्मू क्षेत्र के सात जिलों-- डोडा, किश्तवाड़, राजौरी, पुंछ, उधमपुर, रामबन और रियासी के युवकों को रोजगार देने के लिए जम्मू भर्ती कार्यालय के मार्फत यह रैली कर रहा है.

लेफ्टिनेंट कर्नल आनंद ने कहा, ‘‘ जम्मू क्षेत्र के 29,000 से अधिक आकांक्षी युवाओं ने पंजीकरण करवाया है और उनकी इस रैली के दौरान शारीरिक और मेडिकल फिटनेस टेस्ट होने की संभावना है. पहले दिन किश्तवाड़ और रामबन जिलों के 2500 से अधिक उम्मीदवार शारीरिक और फिटनेस टेस्ट के लिए पहुंचे.

भारतीय आर्मी ने जम्मू-कश्मीर में भर्ती प्रक्रिया चला रखी है (फाइल फोटो)


दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजन के बाद से पाकिस्तान कर रहा दुष्प्रचार
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बता दें कि 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य से विशेष राज्य का दर्जा अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A को हटाकर खत्म कर दिया था. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों (Union Territories) में बांट दिया था. इनमें से एक केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर बना था और दूसरा केंद्रशासित प्रदेश बना था लद्दाख.

जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के बाद पाकिस्तान (Pakistan) ने इस मुद्दे पर काफी शोर मचाया था. हालांकि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाने के बहुत प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान अपने प्रयासों में विफल रहा है. अब तो इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में पाकिस्तानी वकील ने भी कह दिया है कि उनके कश्मीर में नरसंहार के आरोपों में कोई दम नहीं है क्योंकि उनके पास इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई सुबूत नहीं हैं. (भाषा के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें: PAK वकील ने कहा कश्मीर में अत्याचार साबित करने के सुबूत नहीं

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First published: September 3, 2019, 11:07 PM IST
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