लेह: रक्षा मंत्री की मौजूदगी में सेना ने T-90 और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स से किया सैन्य अभ्यास, देखें वीडियो

लेह: रक्षा मंत्री की मौजूदगी में सेना ने T-90 और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स से किया सैन्य अभ्यास, देखें वीडियो
सेना ने ये अभ्यास लेह के स्ताकना में किया

Leh: रक्षा मंत्री के साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे भी मौजूद रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 17, 2020, 12:39 PM IST
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लेह. पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम होता दिखाई दे रहा है. दोनों देशों की सेनाएं अब धीरे-धीरे पीछे हट रही हैं. इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) सुरक्षा हालात का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को एक दिवसीय दौर पर लेह पहुंचे. चीन के साथ जारी सीमा विवाद के मद्देनजर वो क्षेत्र में सुरक्षा हालात की विस्तृत समीक्षा करेंगे. इस बीच उन्होंने वहां सेना के अभ्यास को भी देखा. इस दौरान सेना ने T-90 और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (BMP infantry combat vehicles) से सैन्य अभ्यास किया. रक्षा मंत्री के साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे भी मौजूद रहे.

सेना का अभ्यास
सेना ने ये अभ्यास लेह के स्ताकना में किया. 1 मिनट 17 सेकेंड के इस वीडियो को देखकर आप जोश से भर जाएंगे. इस वीडियो में ढेर सारे T-90 टैंक दिख रहे है, जिस पर सैनिक सवार होकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं. आसमान में सिर्फ और सिर्फ धूल और धुआं दिख रहा है.





टी-90 टैंक की खासियत
नए टी-90 की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये रात में भी दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने में सक्षम है. इन टैंकों को देश की सीमा पर तैनात किया गया है. शुरुआती टैंक रूस में बनकर आए थे. 60 सेकंड में ये 8 गोले फायर करता है. टैंक में 125 Mm की मेन गन है. ये 6 किलोमीटर दूर मिसाइल लॉन्च कर सकता है. ये दुनिया के हल्के टैंकों में एक है. इसका वजन सिर्फ 48 टन है.

इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स की खासियत
वजन में कम होने के होने के चलते इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स युद्ध के मैदान में तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम है. ये वाहन खराब और रेतीले इलाके में भी 65 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकते हैं.

पहले आना था राजनाथ सिंह को
राजनाथ सिंह को भी तीन जुलाई को ही दौरे पर जाना था लेकिन किन्हीं कारणों से उनका जाना नहीं हो पाया. पूर्वी लद्दाख में पांच मई से भारत और चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध चल रहा है. गलवान घाटी में दोनों ओर के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के 20 सैन्यकर्मियों की मौत के बाद यह तनाव बहुत अधिक बढ़ गया. हालांकि कई दौर की राजनयिक एवं सैन्य बातचीत के बाद छह जुलाई से दोनों ओर के सैनिक पीछे हटना शुरू हुए.
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