पढ़ें: म्यांमार में घुसकर सेना ने ऐसे दिया लादेन सरीखे ऑपरेशन को अंजाम

सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससीएन खाप्लांग गुट के बागियों के सहयोग से ऑपरेशन चलाया जिसमें 35 से 40 उग्रवादी मारे गए हैं।

News18India.com
Updated: June 10, 2015, 2:20 PM IST
पढ़ें: म्यांमार में घुसकर सेना ने ऐसे दिया लादेन सरीखे ऑपरेशन को अंजाम
सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससीएन खाप्लांग गुट के बागियों के सहयोग से ऑपरेशन चलाया जिसमें 35 से 40 उग्रवादी मारे गए हैं।
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Updated: June 10, 2015, 2:20 PM IST
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने पहली बार सीमा पार म्यांमार में कार्रवाई कर उग्रवादियों को मार गिराया है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससीएन खाप्लांग गुट के बागियों के सहयोग से ऑपरेशन चलाया जिसमें करीब 30 उग्रवादी मारे गए हैं। 7 उग्रवादियों के शव बरामद हो गए हैं बाकी की तलाश जारी है। सेना ने म्यांमार सीमा में उग्रवादियों की अवैध हथियार हथियार फैक्ट्री को भी तबाह कर दिया है।

4 जून को मणिपुर के चंदेल गांव में उग्रवादियों के हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। सूत्र बता रहे हैं कि इसके बाद से ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सक्रिय हो गए। रणनीति को अंजाम देने के लिए डोभाल ने पीएम मोदी के साथ बांग्लादेश जाने का प्लान टाल दिया। आतंकी हमले के बाद डोभाल मणिपुर पहुंचे और सेना अधिकारियों के साथ रणनीति बनाने में मशगूल हो गए।



इस दौरान डोभाल ने इंटेलीजेंट एजेंसी और सेना के साथ बैठकों का दौर जारी रखा और उग्रवादियों पर हमले की रणनीति तैयार की। इसके लिए म्यांमार को भी भरोसे में लिया गया।

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सेना ने बताया कि अभियान नगालैंड और मणिपुर में भारत म्यांमार सीमा के पास दो स्थानों पर चलाया गया लेकिन सू़त्रों ने बताया कि यह कार्रवाई म्यामांर के अंदर स्थानीय प्रशासन के साथ तालमेल कायम कर की गई। भारतीय कमांडो ऑपरेशन के बाद सुरक्षित लौट आए।

ऐसे दिया अंजाम

डोभाल को ऑपरेशन चलाने में माहिर माना जाता है। पिछले कुछ दिनों तक वह मणिपुर में डटे रहे। इस दौरान उन्होंने सेना और इंटेलिजेंस एजेसियों से मिली सूचनाओं पर नजर रखी। पुख्ता सूचना के बाद आतंकियों पर कमांडो कार्रवाई का फैसला किया गया। कमांडो को हेलीकॉप्टर से आतंकियों के ठिकाने के पास पहुंचाया गया। ऑपरेशन में द्रोण की भी मदद ली गई। ऑपरेशन में पैराशूट कमांडो और वायु सेना के एमआई 17 वी चॉपर का इस्तेमाल हुआ। इंटेलीजेंस एजेंसी द्वारा पहचान किए गए स्थानों पर कमांडो ने कार्रवाई को अंजाम दिया। खास बात ये रही कि ऑपरेशन के दौरान 21वें पैरा कमांडो की टुकड़ी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
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सूत्रों के मुताबिक कमांडो ने म्यांमार सीमा के 4-6 किलोमीटर अंदर घुसकर कार्रवाई को अंजाम दिया। इसके लिए कमांडोज की दो टीमें बनाई गईं जिसमें 20-20 कमांडो थे। ऑपरेशन 45 मिनट में पूरा हुआ। कमांडो की एक टीम अभी भी ऑपरेशन में जुटी हुई है। ऑपरेशन में म्यांमार की सेना की भी मदद ली गई। ऑपरेशन को पूरी तरह भारतीय सेना ने अंजाम दिया, म्यांमार ने सिर्फ लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया। इंटेलीजेंस एजेंसियों ने आतंकियों के 6 ठिकाने चिन्हित किए थे।

आतंकियों को भारी नुकसान

इस अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री और पूर्व कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि हम म्यांमार की सीमा में गए। हमारे उनके साथ अच्छे संबंध हैं और हमने वहां कार्रवाई की। राठौर ने कहा कि सेना ने इस अभियान को अंजाम दिया लेकिन हेलिकाप्टरों को तैयार रखा गया था। उन्होंने कार्रवाई को सरकार की ओर से उठाया गया अभूतपूर्व और बेहद मजबूत कदम बताया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो शिविरों में कार्रवाई का आदेश दिया था जिन्हें पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया।

सेना का कहना है कि दो उग्रवादी संगठनों को भारी नुकसान पहुंचा है। समझा जाता है कि ये दोनों संगठन एनएससीएन (के) और केवाईकेएल हैं। अतिरिक्त सैन्य अभियान महानिदेशक मेजर जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि मणिपुर के हमले के बाद सेना बिल्कुल चौकस थी। उसे पिछले कुछ दिनों में इस बात की पक्की सूचना मिली थी कि ये उग्रवादी भारतीय क्षेत्र में और हमले करने की साजिश रच रहे हैं।

रणबीर सिंह ने कहा कि पिछले हमलों में शामिल समूहों के कुछ लोगों की ओर से ये हमले हमारे सुरक्षाकर्मियों और सहयोगियों पर किए जाने थे। खतरे को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई जरूरी थी। खुफिया सूचना के आधार पर हमने इन योजनाबद्ध हमलों का मुकाबला करने के लिए अभियान चलाया।

 
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