COVID-19 Vaccine: दुनिया में बज रहा भारत की कोरोना वैक्सीन का डंका, 23 देशों को हो रहा निर्यात, 40 अन्‍य ने भी मांगा टीका!

40 अन्‍य देशों ने भी भारत से कोरोना वैक्‍सीन भेजने की मांग की है. (फाइल फोटो)

Corona Vaccine: केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने विकसित विश्व के 60 प्रतिशत लोगों के लिए वैक्सीन (Vaccine) की आपूर्ति कर भारत को विश्व की फार्मेसी बना दिया. भारत में बनी वैक्सीन 23 देशों को निर्यात की जा रही है. इसके अलावा 40 अन्य देश भारत में बनी वैक्सीन की निरंतर मांग कर रहे हैं.

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    नई दिल्ली. केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने विकसित विश्व के 60 प्रतिशत लोगों के लिए वैक्सीन (Vaccine) की आपूर्ति कर भारत को विश्व की फार्मेसी बना दिया. भारत में बनी वैक्सीन 23 देशों को निर्यात की जा रही है. इसके अलावा 40 अन्य देश भारत में बनी वैक्सीन की निरंतर मांग कर रहे हैं.

    डॉ. हर्ष वर्धन ने यह भी कहा है कि वर्तमान में लगभग 30 वैक्सीन कैंडिडेट क्लीनिकल और प्री-क्लीनिकल ट्रायल के विभिन्न चरणों में हैं. वैक्सीन को लेकर भारत का पूरे विश्व में डंका बज रहा है. कोविड काल के अभिशाप में भारत को अनंत अवसर मिले और हमने एन-95 मास्क, वेंटिलेटर, पीपीई किट आदि की न केवल अपनी जरूरत पूरी की अपितु इनका कई देशों को निर्यात भी किया.

    डॉ. हर्ष वर्धन ने यह बाते सीएसआईआर-सीडीआरआई (लखनऊ) के 70वें वार्षिक उत्सव को वर्चुअल रूप से संबोधित करने के दौरान कहीं. उन्होंने यह भी कहा कि इस समय विश्व भर में 1200 ऐसे सरकारी संस्थानों में सीएसआईआर की 22वीं रैंकिंग है. इसका योगदान सीएसआईआर के समर्पित अनुसंधानकर्ताओं को जाता है.

    उन्होंने यह भी कहा कि कोविड 19 (COVID 19) के काल की चुनौतियों से निपटने में वैज्ञानिकों की उल्लेखनीय भूमिका रही है. इससे न केवल मानव जाति को दवाएं दी गईं अपितु गुणवत्ता की दृष्टि से मौलिक अनुसंधान और मानव संसाधन विकास किया गया. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान उत्पादन क्षमता कई गुणा बढ़ाई गई और ढांचागत विकास किया गया, ताकि हम बढ़ती संख्या में रोगियों का उपचार कर सकें.

    सीडीआरआई ने दो महीने के रिकॉर्ड समय के भीतर कोविड जांच प्रयोगशाला (Covid Test Laboratry) स्थापित की और उत्तर प्रदेश के दो जिलों में जांच के समूचे काम की जिम्मेदारी ली. यहां के वैज्ञानिकों ने न केवल यूमिफेनोविर दवा को रिप्रपर्ज किया अपितु मॉलिक्यूल  के क्लीनिकल ट्रायल के लिए अनुमति प्राप्त की.

    इस संस्थान ने जिनोम सिक्वेंसिंग का अध्ययन किया और 200 नमूनों को सिक्वेंस किया. इस संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्वदेशी आरटीपीसीआर (RTPCR) किट के लिए फ्लोरोसेंट डाई और क्वेंचर विकसित किया. इस प्रौद्योगिकी को अब बायोटेक (Biotech) कंपनी को हस्तांतरित किया जा रहा है.

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘जय जवान जय किसान’ के नारे के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘जय विज्ञान’ जोड़ा और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके साथ ‘जय अनुसंधान’ जोड़ दिया. इससे विज्ञान और अनुसंधान की विकास तथा प्रगति के लिए वैज्ञानिकों की अहम भूमिका का पता चलता है. केंद्रीय मंत्री ने सीडीआरआई की वार्षिक रिपोर्ट और सीडीआरआई की 70वीं स्मारिका का भी लोकार्पण किया.

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