ICMR का दावा- कोरोना वायरस का टीका बनाने में लगेगा कम से कम डेढ़-दो साल का समय

ICMR का दावा- कोरोना वायरस का टीका बनाने में लगेगा कम से कम डेढ़-दो साल का समय
एहतियात के तौर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने ये फैसला लिया है.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research) के प्रमुख रमन आर गंगाखेड़कर ने बताया कि टेस्टिंग सेंटर (Testing Center) की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. हालांकि कहीं भी ऐसे सेंटर बनाने के बजाए ICMR इन्हें ऐसी जगह बना रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (International Airports) हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2020, 6:06 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के खतरे को लेकर भारत सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. अभी तक कुल 70 से ज्यादा मामले वायरस के संक्रमण के आ चुके हैं. ऐसे में सरकार की तरफ से लोगों को लगातार वायरस के संक्रमण से बचाव के बारे में बताया जा रहा है ताकि इसके मामलों में कमी आए. कोरोना के मुद्दे पर गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के प्रमुख रमन आर गंगाखेड़कर ने एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया. जिसमें कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर तमाम प्रश्नों के जवाब दिए गए.

इसी बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने यह भी बताया है कि उन्होंने कोरोना वायरस (Coronavirus) को अलग करने में सफलता पाई है और अब उनके पास ऐसे 11 वायरस हैं. उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना वायरस का टीका बनाने में कम से कम डेढ़ से दो साल का समय लगने की संभावना है. वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस सवालों के जवाब दिए गए-

जहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, सबसे पहले वहां बनाए जा रहे टेस्टिंग सेंटर
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के प्रमुख रमन आर गंगाखेड़कर ने बताया कि टेस्टिंग सेंटर की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. हालांकि कहीं भी ऐसे सेंटर बनाने के बजाए ICMR इन्हें ऐसी जगह बना रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं. उन्होंने बताया कि ऐसे 52 सेंटर बनाए जा चुके हैं. इसके अलावा ICMR, DHR कलेक्शन भी सेंटर बना रहे हैं.
उन्होंने कहा है कि हम पूरी तरह से निश्चिंत होना चाहते हैं कि हमारे टेस्टिंग सेंटर (Testing Center) सही तरह से काम कर रहे हैं, यह सुनिश्चित करके ही नए टेस्टिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं. इस वजह से यह प्रक्रिया लोगों को थोड़ी धीमी लग सकती है लेकिन हम पूरी तरह निश्चिंत हो जाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे पास प्रसार की जो जानकारी है, उसके अनुपात में हमने ज्यादा सेंटर बना रखे हैं.



अब तक पूरे देश में की गई 6000 लोगों के सैंपल की जांच
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के प्रमुख रमन आर गंगाखेड़कर ने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी (NIV) एक दिन में 2,500 मामलों की जांच करने की क्षमता रखता है लेकिन अगर पिछले करीब डेढ़ महीने की बात करें तो कुल 6,000 लोगों के सैंपल की जांच अभी तक पूरे भारत में की गई है. ऐसे में हमें नहीं लगता कि हमारे सामने क्षमता को लेकर कोई समस्या है.

घर में निगरानी पर रखे गए लोगों की ओर से पूरा सहयोग
होम क्वारंटाइन (घर में निगरानी पर रखे गए लोगों) के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त (Joint Secretary, Union Health Ministry) सचिव लव अग्रवाल ने पत्रकारों से कहा, "उन्हें राज्यों का पूरा सहयोग मिल रहा है. होम क्वारंटाइन के लिए लोगों को पूरी गाइडलाइन दी गई हैं. लोगों का भी इसमें बेहतरीन सहयोग रहा है." उन्होंने कहा, "हम लोगों से कह रहे हैं कि आपकी मदद करने में हमारा सहयोग करें."

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के प्रमुख रमन आर गंगाखेड़कर ने मीडिया (Media) से अपील की कि वह यह मैसेज लोगों तक पहुंचाए 'जो लोग निगरानी से बचने की कोशिश कर रहे हैं, वे न सिर्फ अपनी बल्कि अपने करीबी लोगों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं.'

राज्यों के साथ मिलकर किया जा रहा काम ताकि समुदाय न हों प्रभावित
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने लोकल ट्रांसमिशन और कम्युनिटी ट्रांसमिशन (समुदाय के संक्रमण) को लेकर बताया कि ज्यादातर मामलों में लोगों ने अपने आस-पास या परिवार के लोगों को ही संक्रमित किया है, जिसे लोकल ट्रांसमिशन कहा जाता है. अभी तक कम्युनिटी ट्रांसमिशन (Community Transmission) का मामला नहीं सामने आया है, जिसमें यह पता ही नहीं लगाया जा सकता है कि संक्रमित व्यक्ति ने कितने लोगों को संक्रमित किया होगा. उन्होंने यह भी कहा कि वे राज्यों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं ताकि कोई संक्रमित मामला इस स्तर पर न पहुंचे.

अगर सुरक्षा के उपाय अपनाते हैं तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करने में खतरा नहीं
सरकार के संक्रमण को रोकने पर जोर होने और इसे खत्म करने के उपायों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि यह पूरी दुनिया में फैल रहा है, ऐसे में उनकी प्राथमिकता संक्रमित लोगों के लिए जरूरी प्रबंध मुहैया कराने की है ताकि संक्रमण (Infection) को कम से कम मामलों तक सीमित किया जा सके. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इससे लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट (Public Transport) में सफर को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि लोग अगर सुरक्षा के लिए बताए गए सभी जरूरी उपायों को अपनाते हैं, तो उन्हें परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है.

स्वास्थ्य मंत्रालय का जोर अनुमान लगाने से ज्यादा संक्रमण रोकने पर
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने अनुमान लगाने से भी मना किया है, उन्होंने कहा है कि हमें नए संक्रमण के मामलों को रोकने पर जोर देना चाहिए. न कि इस पर कि संक्रमण के मामले कितने दिनों में बढ़ जाएंगे या कितने दिन में डबल (Double) हो जाएंगे.

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