अमेरिकी नागरिक ने भारतीय आईटी कंपनी पर किया मुकदमा, लगाया भेदभाव का आरोप

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Updated: September 11, 2019, 11:40 AM IST
अमेरिकी नागरिक ने भारतीय आईटी कंपनी पर किया मुकदमा, लगाया भेदभाव का आरोप
अमेरिकी नागरिक ने भारतीय आईटी कंपनी पर किया मुकदमा

अमेरिकी नागरिक टामी सल्जबर्ग ने अपने मुकदमे में आरोप लगाया कि सैन जोस स्थित हैप्पीएस्ट माइंड्स में कार्यरत कम से कम 90 प्रतिशत लोग दक्षिण एशियाई हैं.

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  • Last Updated: September 11, 2019, 11:40 AM IST
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वाशिंगटन: अमेरिका (America) में एक भारतीय डिजिटल सेवा कंपनी (Indian Digital Services Company) पर गैर-भारतीयों के साथ भेदभाव करने और दक्षिण एशिया के लोगों को भर्ती और नौकरियों में वरीयता देने के आरोप में मामला दर्ज कराया गया है. अमेरिकी नागरिक टामी सल्जबर्ग ने अपने मुकदमे में आरोप लगाया कि सैन जोस स्थित हैप्पीएस्ट माइंड्स में कार्यरत कम से कम 90 प्रतिशत लोग दक्षिण एशियाई हैं, उनमें भी अधिकांश भारतीय है. इस कंपनी का मुख्यालय बैंगलुरु है.

हैप्पीएस्ट माइंड्स के दुनिया भर में 2,400 से अधिक कर्मचारी हैं और अमेरिका में लगभग 200 कर्मचारी कार्यरत हैं. सल्जबर्ग के मुताबिक, हैप्पीएस्ट माइंड्स दक्षिण एशियाई और भारतीय लोगों को काम पर रखने और नियुक्त करने को वरीयता देता है. उसने कहा पहले कंपनी विदेशों में रह रहे दक्षिण एशियाई और भारतीय कामगारों के लिए एच-1वीजा (और अन्य वीजा) हासिल करने की कवायद में जुटती है, बाद में इनकी भर्ती अमेरिकी पदों पर काम के लिए की जाती है.

इस मुकदमा में उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-दक्षिण एशियाई और गैर-भारतीय व्यक्तियों को अक्सर दक्षिण एशियाई और भारतीय व्यक्तियों के पक्ष में उनके वर्तमान पदों से हटा दिया जाता है. सुलजबर्ग ने कहा कि उन्हें डायरेक्टर ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट के पद से उन्हें हटाकर सेल्स के पद पर कर दिया गया. उनकी जगह चंदन दास जो भारत से अमेरिका आया था उसे रख लिया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि जनवरी 2014 से अक्टूबर 2018 तक कंपनी ने अमेरिका में 52 लोगों को नौकरी पर रखा जिनमें से 29 लोग दक्षिण एशियाई हैं. इनमें से 26 लोग वीजा पर निर्भर हैं.

मुकदमे में आरोप लगाया कि अमेरिका में रह रहे दक्षिण एशियाई और भारतीय व्यक्तियों को गैर-दक्षिण एशियाई और गैर-भारतीय व्यक्तियों की तुलना में अक्सर ज्यादा महत्व दिया जाता है. उसने अदालत से कंपनी को बिना भेदभाव वाला व्यवहार अपनाने के आदेश देने की मांग की है.

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First published: September 11, 2019, 11:40 AM IST
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