विदेश मंत्रालय ने जताई उम्मीद जल्द निकलेगा भारत-चीन विवाद का हल

विदेश मंत्रालय ने जताई उम्मीद जल्द निकलेगा भारत-चीन विवाद का हल
विदेश मंत्रालय ने सीमा विवाद के सुलझने की उम्मीद जताई है. (फोटो- AP)

विदेश मंत्रालय (Foreign Ministry) के मुताबिक भारत-चीन सीमा विवाद (India-China Border Dispute) सुलझाने के लिए हाल ही में हुई बैठक में समाधान निकलने की उम्मीद जगी है. 

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नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय (Foreign Ministry) के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव (Anurag Srivastav) ने भारत और चीन के बीच सैन्य वार्ता मे आपसी सहमति से मुद्दों के समाधान का हल निकलने की उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा बातचीत सकारात्मक रही. समाधान निकलने तक दोनों देश सैन्य और राजनयिक स्तर पर अपनी बैठकें जारी रखेंगे. इस द्विपक्षीय बातचीत के क्रम में डब्ल्यूएमसीसी (परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र) के ढांचे के तहत वार्ता भी शामिल हैं.' दरअसल पूर्वी लद्दाख में पिछले 7 सप्ताह से भारत-चीन सेनाओं के बीच लगातार तनाव जारी है.

बातचीत से बंधी है उम्मीद
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को हुई सैन्य वार्ता बैठक के बारे में गुरुवार को पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि बैठक में हुई अब तक की बातचीत से उम्मीद बंधी है कि चीन प्रासंगिक द्विपक्षीय करार के प्रावधानों के अनुरूप सीमाई इलाके में जल्द अमन-चैन बहाल करने के लिए कदम उठाएगा.

उन्होंने बताया कि सैन्य वार्ता में दोनों पक्षों ने जल्द, चरणबद्ध और क्रमिक तरीके से तनाव घटाने पर जोर दिया है. श्रीवास्तव ने बताया कि ताजा बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया जबकि चीन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिला के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन ने किया. एलएसी और सीमाई क्षेत्रों में आमने-सामने खड़ी सेनाओं के पीछे हटने तथा तनाव घटाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तर की यह तीसरी बैठक थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग ई के बीच 17 जून को हुई बातचीत में यह तय हुआ था कि द्विपक्षीय वार्ता को बढ़ाया जाए और जिम्मेदार तरीके दोनों देशों के बीच उपजा हालात का समाधान निकाला जाए.
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भारत ने चीन को चेताया, नियामकीय ढांचे के तहत करना होगा काम
भारत-चीन सेनाओं के बीच बढ़े तनाव के बीच भारत सरकार ने चीन के 59 ऐप प्रतिबंधित कर दिए हैं. इस मुद्दे पर पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत इंटरनेट प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी निवेश का स्वागत करेगा, लेकिन कंपनियों को देश के नियामकीय ढांचे और नियमों के हिसाब से काम करना होगा.

उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में निवेश अनुकूल माहौल बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं. डिजिटल प्रौद्योगिकी और इंटरनेट के क्षेत्र में भी भारत की व्यवस्था काफी खुली है. डिजिटल और इंटरनेट प्रौद्योगिकी के लिए 68 करोड़ उपभोक्तओं के साथ भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है. श्रीवास्तव ने कहा कि दुनिया की बड़ी और अग्रणी सॉफ्टवेयर और इंटरनेट एप्लिकेशन कंपनियां भारत में मौजूद हैं. लेकिन वे डाटा सुरक्षा और व्यक्तिगत डाटा की गोपनीयता संबंधी नियमों का पालन करते हुए नियम और कानूनों के मुताबिक काम कर रही हैं.
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