जोधपुर में आज से दिखेगा लड़ाकू विमान राफेल का जलवा, भारत- फ्रांस एक साथ करेंगे युद्धाभ्‍यास

राफेल अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों से लैस हैं

राफेल अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों से लैस हैं

Rafale: युद्धाभ्‍यास को स्‍काईरोज (SKYROS) का नाम दिया गया है. फ्रांसीसी वायु सेना 4 राफेल लड़ाकू विमानों के साथ इस खास अभ्यास में शामिल होगी.

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  • Last Updated: January 18, 2021, 11:48 AM IST
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नई दिल्ली.  राजस्थान में जोधपुर के आसमानों में आज से लड़ाकू विमान राफेल (Rafale) का जलवा दिखेगा. भारत और फ्रांस की वायुसेना आज से यहां युद्धाभ्‍यास करेगी. एक हफ्ते तक चलने वाले इस युद्धाभ्‍यास को स्‍काईरोज (SKYROS) का नाम दिया गया है. फ्रांसीसी वायु सेना 4 राफेल लड़ाकू विमानों के साथ इस खास अभ्यास में शामिल होगी. भारत और चीन (India-China Standoff) के बीच पिछले 6 महीने से जारी गतिरोध को देखते हुए इस युद्धाभ्‍यास को बेहद अहम माना जा रहा है.

भारत ने आखिरी बार जुलाई 2019 में फ्रांसीसी वायु सेना के साथ एक बड़ा अभ्यास किया था. इस दौरान भारतीय सुखाई के साथ फ्रांसीसी राफेल ने उड़ान भरी थी. वायु सेना राफेल और एसयू -30 (Su-30s) को एक साथ इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. वायु सेना ने इस दिशा में पहले भी कई कदम उठाए हैं. बता दें कि एसयू -30 को वायु सेना ने इस वक्त पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात कर रखा है. स्‍काईरोज कार्यक्रम का मकसद है दोनों देशों के बीच सेना के रिश्तों को और मजबूत करना है.

राफेल की डील

बता दें कि फ्रांस और भारत के बीच राफेल विमानों के लिए 60,000 करोड़ रुपये की डील हुई है. इसके तहत तहत भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमान मिलेंगे. फ्रांस से सौदे के तहत राफेल का आखिरी विमान 2022 के अंत तक मिलने की संभावना है. भारत को राफेल की दूसरी खेप पिछले साल नवंबर में मिली थी. राफेल विमान फ्रांस से सीधे गुजरात के जामनगर एयरबेस पर पहुंचा था. इसके बाद तीन विमान जनवरी और फिर मार्च और इसके बाद अप्रैल में 7 राफेल लड़ाकू विमान भारत को मिल जाएंगे. इस तरह अगले साल अप्रैल तक देश में विमानों की संख्या 21 हो जाएगी. इसमें से 18 लड़ाकू विमान गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में शामिल हो जाएंगे.
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क्या खास है राफेल में?

राफेल अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों से लैस हैं. सबसे खास है दुनिया की सबसे घातक समझे जाने वाली हवा से हवा में मार करने वाली मेटयोर (METEOR) मिसाइल.- राफेल विमान चीन, पाकिस्तान, रूस तो क्या किसी भी एशियाई देश के पास नहीं है.- राफेल लड़ाकू विमान 4.5 जेनरेशन मीड ओमनी-पोटेंट रोल एयरक्राफ्ट है. मल्टीरोल होने के कारण दो इंजन वाला (टूइन) राफेल फाइटर जेट एयर-सुप्रेमैसी यानी हवा में अपनी बादशाहत कायम करने के साथ-साथ डीप-पैनेट्रेशन यानी दुश्मन की सीमा में घुसकर हमला करने में भी सक्षम है.
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