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भारतीय थिंकटैंक से वर्ल्‍ड डेमोक्रेसी रिपोर्ट और फ्रीडम इंडेक्‍स बनवाने पर विचार

लोकतंत्र को लेकर विदेशी रिपोर्ट आई हैं सामने. (File pic)

लोकतंत्र को लेकर विदेशी रिपोर्ट आई हैं सामने. (File pic)

यह विचार कुछ दिन पहले विदेशी थिंकटैंक फ्रीडम हाउस और वी-डेम की ओर से जारी 2021 की रिपोर्ट में भारत के फ्रीडम स्कोर को घटाने के दावे के बाद किया जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 17, 2021, 11:16 AM IST
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नई दिल्‍ली. विदेशी थिंकटैंक (Think Tank) की ओर से पिछले दिनों किए गए उस दावे के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) गंभीर है, जिसमें कहा गया था कि भारतीय लोकतंत्र (Indian Democracy) कमजोर हुआ है. अब विदेश मंत्रालय किसी स्‍वतंत्र भारतीय थिंकटैंक से 'वर्ल्‍ड डेमोक्रेसी रिपोर्ट' और 'ग्‍लोबल प्रेस फ्रीडम इंडेक्‍स' तैयार करवाने पर विचार कर रहा है. यह विचार कुछ दिन पहले विदेशी थिंकटैंक फ्रीडम हाउस और वी-डेम की ओर से जारी 2021 की रिपोर्ट में भारत के फ्रीडम स्कोर को घटाने के दावे के बाद किया जा रहा है.

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्रालय की ओर से इस साल की शुरुआत में तैयार की गई एक आंतरिक रिपोर्ट में क‍हा गया था, 'हम भारत के ही किसी स्‍वतंत्र थिंकटैंक को विभिन्‍न मानदंडों के आधार पर अपनी वार्षिक वर्ल्‍ड डेमोक्रेसी रिपोर्ट और वार्षिक फ्रीडम प्रेस इंडेक्‍स तैयार करने के लिए प्रोत्‍साहित कर सकते हैं.'

हालांकि अभी मंत्रालय की ओर से किसी ने भी इससे संबंधित सवालों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है. एचटी के अुनसार मौजूदा समय में भी इस मामले पर विचार चल रहा है. साथ ही इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है.



विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर विचार करना पिछले साल तब शुरू किया था, जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने उसे प्रसार भारती के पूर्व चेयरमैन और नेहरू मेमोरियल म्‍यूजियम एंड लाइब्रेरी के मौजूदा कार्यकारी सदस्‍य ए सूर्यप्रकाश की ओर से लिखा हुआ एक पत्र भेजा था. 20 नवंबर को लिखे गए इस पत्र में सुझाव दिया गया था कि स्‍वीडन के वी-डेम इंस्‍टीट्यूट और प्रेस फ्रीडम इंडेक्‍स की ओर से जारी की गई रिपोर्ट समेत अन्‍य रिपोर्ट का भारत की ओर से खंडन या विरोध करना चाहिए.

विदेश मंत्रालय की आंतरिक रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि दुनियाभर में मौजूद भारतीय मिशन को वैश्विक एनजीओ व इंस्‍टीट्यूट के साथ संपर्क स्‍थापित रखना चाहिए. उन्‍हें भारत से संबंधित तथ्‍य मुहैया कराने चाहिए ताकि वे अपनी भविष्‍य की रिपोर्ट में लोकतंत्र और प्रेस फ्रीडम इंडेक्‍स के मामले में भारत का उचित स्‍थान पर पेश कर सकें.
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