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भारत ने स्‍पष्‍ट किया, हम RCEP में आखिरी मौके पर कोई मांग नहीं रख रहे

News18Hindi
Updated: November 4, 2019, 3:41 PM IST
भारत ने स्‍पष्‍ट किया, हम RCEP में आखिरी मौके पर कोई मांग नहीं रख रहे
भारत सरकार चिंतित है कि आरसीईपी पर हस्‍ताक्षर के बाद देश में चीन के सस्‍ते माल की बाढ़ आ जाएगी. भारत सस्‍ते चीनी माल का डंपिंग ग्राउंड बन सकता है.

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बैंकॉक पोस्‍ट (Bangkok Post) को 2 नवंबर को दिए साक्षात्‍कार (Interview) में स्‍पष्‍ट कर दिया था कि भारत की ओर से एक उचित प्रस्‍ताव RECP में बढ़ाया गया है. भारत सरकार इसी प्रस्‍ताव के मुताबिक गंभीरता से बातचीत कर रही है. रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) सभी पक्षों के हितों को ध्‍यान में रखकर होनी चाहिए.

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  • Last Updated: November 4, 2019, 3:41 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय प्रतिनिधिमंडल रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) को अंतिम रूप देने के लिए 10 आसियान (ASEAN) देशों और चीन (China) समेत पांच अन्‍य देशों के साथ आखिरी दौर की बातचीत कर रहा है. इस बीच केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) के नेतृत्‍व वाले भारतीय दल की नई मांगों के बाद समझौते के अंजाम तक पहुंचने में देरी के आसार की खबर आई. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की ओर से आरसीईपी में आखिरी समय पर कोई मांग (Last Minute Demands) नहीं रखी जा रही है. इस मुद्दे पर भारत का रुख (Stand) शुरुआत से ही स्‍पष्‍ट था. भारत सरकार अपने उसी रुख पर अडिग है.

प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान में स्‍पष्‍ट कीं अपनी चिंताएं
दरअसल, भारत सरकार चिंतित है कि समझौते पर हस्‍ताक्षर के बाद देश में चीन के सस्‍ते माल (Cheap Chinese Goods) की बाढ़ आ जाएगी. भारत सस्‍ते चीनी माल का डंपिंग ग्राउंड बन सकता है. इससे भारत के छोटे कारोबार (Small Businesses) को बड़ा नुकसान हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को आसियान देशों के नेताओं से बातचीत के दौरान भारत की चिंताओं (Concerns) के बारे में स्‍पष्‍ट तौर पर बता दिया. उन्‍होंने कहा कि सभी पक्षों को बराबर मार्केट एक्‍सेस (Market Access) मिलना चाहिए.

भारत अपने प्रस्‍ताव के मुताबिक गंभीरता से कर रहा बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकॉक पोस्‍ट (Bangkok Post) को 2 नवंबर को दिए साक्षात्‍कार में कहा, 'हमने एक उचित प्रस्‍ताव आगे बढ़ा दिया है. हम अपने उसी प्रस्‍ताव के मुताबिक गंभीरता से बातचीत कर रहे हैं. हम सेवाओं के स्तर पर अपने कई सहयोगियों की महत्वाकांक्षाओं को देख रहे हैं. हम उनकी संवेदनशीलता का सम्‍मान करते हैं. हम उसे समझने और उनके मुताबिक प्रतिक्रिया के लिए तैयार हैं. हम स्‍पष्‍ट हैं कि साझा हितों वाली रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप होनी चाहिए ताकि सभी पक्षों को उचित फायदा हो. समझौता भारत समेत सभी पक्षों के हित में होना चाहिए.'

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First published: November 4, 2019, 3:38 PM IST
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