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चाइल्ड पोर्नोग्राफी और बाल यौन शोषण के खिलाफ भारतीय पुलिस पहल, अमेरिका की एजेंसी एनसीएमईसी के साथ मिलकर अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश

चाइल्ड पोर्नोग्राफी और बाल यौन शोषण के खिलाफ भारतीय पुलिस पहल, अमेरिका की एजेंसी एनसीएमईसी के साथ मिलकर अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश

यौन शोषण और चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर भारतीय एजेंसियों का बढ़ता शिकंजा     (सांकेतिक फोटो)

यौन शोषण और चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर भारतीय एजेंसियों का बढ़ता शिकंजा (सांकेतिक फोटो)

भारतीय पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां देश में बाल अश्लीलता (चाइल्ड पोर्नोग्राफी) और बाल यौन शोषण से संबंधित मामलों से निपटने और अपराधियों को पकड़ने के लिए अमेरिका की ‘केंद्रीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली’ का उपयोग कर रही हैं.

    हाइलाइट्स

    भारतीय पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ अमेरिका की ‘केंद्रीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली’ का उपयोग कर रही हैं.
    2012 के बाद के बाद से साइबर अपराध में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है.
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक गृह मंत्रालय के साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 11 लाख शिकायत मिलीं

    नई दिल्ली. भारतीय पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां देश में बाल अश्लीलता (चाइल्ड पोर्नोग्राफी) और बाल यौन शोषण से संबंधित मामलों से निपटने और अपराधियों को पकड़ने के लिए अमेरिका की ‘केंद्रीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली’ का उपयोग कर रही हैं. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका के ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन’ (एनसीएमईसी) द्वारा तैयार की गई एक लाख से अधिक ‘टिपलाइन’ रिपोर्ट तक पहुंच होने की वजह से देशभर में बाल अश्लीलता और बाल यौन शोषण के मामलों की बढ़ती संख्या को रोकने में मदद मिली है.

    जब कोई नागरिक एक संबंधित नंबर या वेबसाइट के माध्यम से कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अपराध के बारे में एक ‘टिप’ (गुप्त सूचना) देता है, तो यह कार्रवाई के लिए एक ‘टिपलाइन रिपोर्ट’ के रूप में बदल जाती है. एजेंसियां कभी भी फोन करने वाले का नाम या कोई अन्य पहचान नहीं पूछती हैं और वह अपनी पहचान को छिपा सकता है. एनसीएमईसी बाल शोषण के ऑनलाइन मामलों के लिए अमेरिका की केंद्रीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली है. एनसीएमईसी तीन साल पहले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ हुए एक समझौते के बाद भारत के साथ इन ‘टिपलाइन’ रिपोर्ट साझा कर रही है.

    गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘एनसीएमईसी की ‘टिपलाइन’ रिपोर्ट बहुत मददगार हैं क्योंकि पुलिस एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बाल अश्लीलता और बाल यौन शोषण के मामलों से निपटने में सफलता मिल रही है.” मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार, जब बाल अश्लीलता से संबंधित सामग्री को मुखबिरों या इंटरनेट सेवा प्रदाताओं द्वारा एनसीएमईसी के ध्यान में लाया जाता है, तो इस सूचना को एजेंसी द्वारा सत्यापित किया जाता है और संदिग्ध के संभावित स्थान का पता लगाया जाता है. इसके बाद एक ‘टिपलाइन’ रिपोर्ट तैयार की जाती है और संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाती है. भारत में यह एजेंसी एनसीआरबी है। इसे प्राप्त करने के बाद, एनसीआरबी राज्य पुलिस अधिकारियों को सूचना भेजता है.

    अधिकारी ने कहा कि 2021 के अंत तक, भारत से ऑनलाइन पोस्ट की गई बाल यौन शोषण सामग्री पर एनसीएमईसी से एक लाख से अधिक ‘टिपलाइन’ रिपोर्ट प्राप्त हुई थी. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2012 में साइबर अपराध के केवल 3,377 मामले दर्ज किए गए थे जिनकी संख्या अब लाखों में हो गई है.

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में कहा था कि गृह मंत्रालय के साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 11 लाख शिकायत मिलीं, जिनमें से दो लाख से अधिक शिकायत सोशल मीडिया से संबंधित थीं. गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध की घटनाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग के लिए नागरिकों को एक केंद्रीकृत तंत्र प्रदान करता है. इस पोर्टल पर दर्ज किये गये मामलों की सूचना राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेज दी जाती है.

    Tags: Child sexual abuse, Cyber Crime

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