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Vande bharat express- 44 वंदेभारत ट्रेन और आएंगी, कई शहरों के लिए चलेंगी, काम अवार्ड हुआ

44 वंदेेभारत ट्रेन सेट बनाने का काम अवार्ड हुआ (संकेतिक फोटो)
44 वंदेेभारत ट्रेन सेट बनाने का काम अवार्ड हुआ (संकेतिक फोटो)

भारतीय रेलवे ( Indian Railway) ने 44 वंदेभारत एक्‍सप्रेस (Vande Bharat Express) बनाने के काम अवार्ड कर दिया है. ये मेक इन इंडिया Make in India) पॉलिसी के तहत बनाई जाएंगी, जो अगले वर्ष से दौड़ने लगेंगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 7:49 AM IST
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नई दिल्‍ली. सेमी हाई स्‍पीड ट्रेन यानी वंदेभारत ट्रेन (Vande Bharat Express) कई अन्‍य शहरों के लिए शुरू होगी. भारतीय रेलवे ( Indian Railway) ने 44 और ट्रेन सेट (Train sets) बनाने का काम अवार्ड कर दिया है, जो निर्धारत समय पर तैयार होंगी. ये ट्रेनें अगले वर्ष से दौड़नी शुरू हो जाएंगी. सभी ट्रेन मेक इन इंडिया (Make in India) पॉलिसी के तहत बनाई जाएंगी, जिससे 90 फीसदी तक स्‍वदेसी होंगी.

प्रत्‍येक ट्रेन सेट (Train sets)  में 16 डिब्‍बे होंगे. रेलवे बोर्ड के अनुसार ट्रेन सेट निर्माण जल्‍द शुरू कर दिया जाएगा. पहली ट्रेन 18 माह के रिकार्ड समय में बनाई गई थी, जिसकी कीमत करीब 97 करोड़ आई थी।  बाद  में इसकी डिजाइन में कई चेंज किए गए, जिससे बिजली की खपत और कीमत दोनों कम हुईं. हालांकि इसके टेंडर पहले दो बार कैंसिल किए जा चुके हैं.

ट्रेन 18 ऐसी बनी वंदेभारत एक्‍सप्रेस



ट्रेन 18 यानी वंदेभारत भारत बनाने की घोषणा 2017 में हुई थी और 2018 में ट्रेन चलनी थी, इसलिए इसका नाम ट्रेन 18 रखा गया था। 2018 के अंत में पहली ट्रेन तैयार हो गई. बाद में इसका नाम बदलकर वंदेभारत कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को 15 फरवरी 2019 को हरी झंडी दिखाई. यह ट्रेन दिल्ली और वाराणसी के बीच चलाई गई. दूसरी ट्रेन को गृह मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2019 को हरी झंडी दिखाई. यह ट्रेन नई दिल्ली और माता वैष्णो देवी कटरा के बीच शुरू हुई.
ये है खासियत

ट्रेन में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं. कोच में कुर्सियां 180 डिग्री यानी बल्किुल विपरीत दिशा में घुमाई जा सकती हैं. खाने-पीने का सामान रखने के लिए डीप फ्रीजर लगाए गए हैं. ऑनबोर्ड इन्फोटेनमेंट सिस्टम लगाया गया है, यहां आप अपनी पसंद के गाने या मूवी देख सकते हैं. खिड़कियों पर खास फ़िल्म लगाई गई है. पायलट को तेज रोशनी से बचाने के लिए कॉकपिट के शीशे पर रोलर ब्लाइंड सन स्क्रीन लगाई गई है. कॉकपिट में ज्यादा शोर न हो, इसके लिए कई इन्सुलेशन का इस्तेमाल किया गया है. ये ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं.
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