बुलेट ट्रेन का इंस्टीट्यूट करेगा कोरोना से लड़ने में मदद, बनाया जा सकता है क्वारंटीन सेंटर

प्रतीकात्मक फोटो

भारतीय रेलवे (Indian Railway) रोजाना 13,523 यात्री रेलगाड़ियों (Passenger Trains) का परिचालन करता है लेकिन कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते सभी यात्री सेवाएं 14 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं.

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    अहमदाबाद. भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने गुजरात (Gujarat) के वडोदरा (Vadodara) में 168 कमरों, 334 बिस्तरों और 12 बड़े कमरों वाले रेल प्रशिक्षण संस्थान की नई हॉस्टल बिल्डिंग को पृथक केन्द्र के रूप में इस्तेमाल करने की पेशकश की है. ये रेल प्रशिक्षण संस्थान मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट (Mumbai-Ahmedabad High-Speed Rail Project Training Institute) का है जो कि वडोदरा में स्थित है.

    इससे पहले जानकारी मिली थी कि रेलवे कोरोना वायरस संक्रमितों को पृथक रखने के लिए यात्री डिब्बों और केबिन को देने पर मंथन कर रहा है. बता दें कि भारतीय रेलवे रोजाना 13,523 यात्री रेलगाड़ियों का परिचालन करता है लेकिन कोरोना वायरस के चलते सभी यात्री सेवाएं 14 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं.

    खाली डिब्बों का आईसीयू के तौर पर किया जा सकता है इस्तेमाल
    सूत्रों ने बताया कि खाली डिब्बों और केबिन को कोरोना वायरस के मरीजों के लिए आईसीयू के तौर पर इस्तेमाल करने के प्रस्ताव पर रेलमंत्री की रेलवे बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव, सभी जोन के महा प्रबंधक और डिविजन रेलवे के प्रबंधकों के साथ बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में चर्चा की गई.

    उन्होंने बताया कि बैठक में शौचालय युक्त डिब्बों को पृथक वार्ड के तौर पर इस्तेमाल के प्रस्ताव के साथ इस बात पर चर्चा की गई कि कैसे रेलवे की उत्पादन इकाइयों का उपयोग कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जरूरी वस्तुओं जैसे जीवन रक्षक प्रणाली, बिस्तर, ट्रॉली आदि के निर्माण में किया जा सकता है.

    चलते-फिरते अस्पताल के तौर पर होगा इस्तेमाल
    सूत्रों ने बताया कि यह विचार मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यह कहे जाने के बाद आया कि वे कोरोना वायरस के चलते चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए नवोन्मेषी उपायों पर काम करें.

    उन्होंने बताया कि इन डिब्बों और केबिन का इस्तेमाल चलते फिरते अस्पताल के रूप में किया जा सकता है जिसमें परामर्श कक्ष, मेडिकल स्टोर, गहन चिकित्सा कक्ष और रसोईयान (पैंट्री) की सुविधा होगी.

    सूत्रों ने बताया कि रेलवे का देशभर में विस्तृत नेटवर्क है और रेलगाड़ी में स्थापित अस्पताल उन इलाकों में स्थापित किया जा सकता है जहां पर संक्रमितों की संख्या अधिक हो और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं हो.

    उन्होंने बताया कि रेल डिब्बा उत्पादन इकाइयां चिकित्सा सुविधा के अनुकूल डिब्बों में बदलाव कर उत्पादन शुरू कर सकती है.

    मरीजों के लिए इस्तेमाल हो सकती है रेल एंबुलेंस
    सूत्रों ने बताया कि रेलवे के पास दुर्घटना राहत चिकित्सा उपकरण यान (एआरएमई) या रेल एंबुलेंस है जिसे कोरोना वायरस के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. एआरएमई का इस्तेमाल सामान्यत: रेल दुर्घटना के दौरान घायल यात्रियों के इलाज के लिए किया जाता है.

    (भाषा के इनपुट के साथ)

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