लौट रहे प्रवासी मजदूरों की संख्या लगभग 1000 होने पर ही ट्रेन चलाएगा रेलवे, पढ़ें पूरा नियम

लौट रहे प्रवासी मजदूरों की संख्या लगभग 1000 होने पर ही ट्रेन चलाएगा रेलवे, पढ़ें पूरा नियम
श्रमिक स्पेशल ट्रेनें मजदूरों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आई हैं.

महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी मांग की है कि केंद्र सरकार उन प्रवासी मजदूरों (migrant labours) से कोई खर्च न ले, जिन्हें विशेष ट्रेन (Special Train) से वापस भेजा जा रहा है.

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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने देशभर में फंसे हुए लोगों को ले जाने के वास्ते विशेष श्रमिक रेलगाड़ियों (Shramik Special Train) के लिए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किये है. रेलवे ने कहा है कि क्षमता की 90 प्रतिशत मांग होने पर ही विशेष श्रमिक रेलगाड़ियां चलाई जानी चाहिए.

रेलवे ने कहा कि स्थानीय राज्य सरकार (Local State Government) प्राधिकार टिकट का किराया एकत्र कर और पूरी राशि रेलवे (Railways) को देकर यात्रा टिकट यात्रियों को सौंपेंगे.

रेलवे ने कहा- राज्य उठाएंगे प्रवासियों का खर्च
रेलवे ने कहा कि फंसे हुए लोगों को भोजन, सुरक्षा, स्वास्थ्य की जांच और टिकट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उस राज्य की होगी जहां से ट्रेन (Train) चल रही है. हालांकि उन्‍होंने यात्रा के समय यात्रियों के भोजन की जिम्मेदारी ली है, जिनकी यात्रा 12 घंटे या इससे अधिक समय की होगी.
रेलवे ने कहा कि संबंधित राज्य संबंधित स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराएंगे जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल वही यात्री स्टेशन परिसर में प्रवेश कर पाएं जिन्हें यात्रा की मंजूरी दी गई है और जिनके पास यात्रा (Travel) का वैध टिकट हो.



सीताराम येचुरी ने साधा निशाना
माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने राज्यों पर भार डालने के लिए केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रवासी श्रमिकों की जो स्थिति हुई है, वह केन्द्र द्वारा लॉकडाउन (Lockdown) की अचानक घोषणा करने के कारण हुई है.

येचुरी ने कहा, ‘‘यह बहुत ही अनुचित है कि पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाल दी गई है. राज्यों के कारण यह समस्या खड़ी नहीं हुई है. संसद (Parliament) में सरकार ने कहा था कि विदेशों में फंसे हुए भारतीयों को स्वदेश वापस लाने की पूरी लागत वहन की जायेगी. इसी तरह प्रवासी श्रमिकों को भी वापस लाया जाना चाहिए.’’

ट्रेन की क्षमता की 90% मांग यानि करीब 1000 जाने वाले होने पर ही चलाई जाएगी ट्रेन
रेलवे ने कहा, ‘‘प्रत्येक श्रमिक स्पेशल ट्रेन का केवल एक गंतव्य होगा और यह बीच में नहीं रुकेगी. सामान्य तौर पर, श्रमिक स्पेशल ट्रेन 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए चलेंगी. ये ट्रेन (Train) गंतव्य से पहले बीच में किसी स्टेशन पर नहीं रुकेंगी. पूरी लंबाई वाली ट्रेन में यात्री भौतिक दूरी के नियम का पालन करते हुए बैठेंगे और बीच वाली सीट पर कोई नहीं बैठेगा. इस तरह की प्रत्येक ट्रेन लगभग 1,200 यात्रियों को ले जा सकती है.’’

दिशा-निर्देशों में कहा गया कि संबंधित राज्य यात्रियों के समूह को लेकर तदनुसार योजना तैयार करेगा. ट्रेन के लिए क्षमता के 90 प्रतिशत से कम मांग नहीं होनी चाहिए. यानि करीब 1000 यात्री (Passengers) जाने वाले होने चाहिए.

सभी यात्रियों के लिए मास्क लगाना होगा अनिवार्य
रेलवे निर्दिष्ट गंतव्यों के लिए संबंधित राज्य द्वारा बताई गई यात्रियों की संख्या के हिसाब से टिकट प्रकाशित करेगा और इन्हें स्थानीय राज्य प्राधिकार को सौंप देगा. जहां से ट्रेन चलेगी, संबंधित राज्य सरकार उस स्थान पर यात्रियों को भोजन के पैकेट और पेयजल उपलब्ध कराएगी.

इसने कहा, ‘‘सभी यात्रियों के लिए चेहरे पर मास्क (Mask) लगाना अनिवार्य होगा. राज्य के अधिकारी यात्रियों को मास्क इस्तेमाल करने के बारे में परामर्श देंगे. रेलवे ने कहा कि संबंधित राज्य यात्रियों को ‘आरोग्य सेतु’ ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

बारह घंटे से ज्यादा का सफर होने पर रेलवे उपलब्ध कराएगा भोजन
बारह घंटे से अधिक के गंतव्य की स्थिति में यात्रियों को एक बार का भोजन (Food) रेलवे द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा. गंतव्य पर पहुंचने के बाद राज्य सरकार के अधिकारी यात्रियों की अगवानी करेंगे और उनकी स्क्रीनिंग, जरूरी होने पर पृथक-वास और आगे की यात्रा से संबंधित सभी प्रबंध करेंगे. अगवानी करने वाला राज्य स्टेशन पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करेगा.

स्वास्थ्य प्रोटोकॉल उल्लंघन पर क्षेत्रीय महाप्रबंधकों के पास ट्रेन रद्द करने का अधिकार
सभी क्षेत्रीय महाप्रबंधकों को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी चरण में सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रोटाकॉल का उल्लंघन होता है तो रेलवे को श्रमिक स्पेशल ट्रेन को रद्द करने का अधिकार है. अधिकारियों ने कहा कि रेलवे राज्यों को प्रदान की गई सेवाओं के लिए शुल्क ले रहा है.

भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन की वजह से फंसे लोगों को निकालने के लिए ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन चलाने की शुक्रवार को मंजूरी दे दी थी.

अखिलेश यादव ने भी इस फैसले पर सरकार की आलोचना की
यात्रा के लिए शुल्क लिये जाने के निर्णय की निंदा करते हुए समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि आपदा के समय गरीबों का शोषण करना साहूकारों का काम है न कि सरकार का.’’

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा सरकार द्वारा गरीबों, असहाय श्रमिकों से उन्हें ट्रेन से वापस भेजने के लिए पैसे लेने की खबरें शर्मनाक है. आज यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा, जो पूंजीपतियों का अरबों का कर्ज माफ कर देती है, वह अमीरों के साथ है और गरीबों के खिलाफ है . आपदा के समय साहूकारों का काम होता है शोषण करना न कि सरकार का.’’

कर्नाटक के कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने कहा कि उनकी पार्टी श्रमिकों के ट्रेन किराये के भुगतान के लिए राज्य सरकार को मदद उपलब्ध कराने के लिए तैयार है.

उद्धव ठाकरे की मांग- जिन प्रवासियों को विशेष ट्रेन से भेजा जा रहा वापस, उनसे न लें शुल्क
राज्यों के यात्रा खर्च वहन करने की बात का विरोध करते हुए महाराष्ट्र के मंत्री नितिन राउत ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और पीयूष गोयल को लिखे पत्र में ट्रेन की आवाजाही का खर्च उठाने मांग की थी और कहा था कि इसे राज्य के ऊपर न छोड़ा जाए.

इससे पहले उन्होंने उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर यह मांग की थी, जिसके बाद अब उन्होंने सीधे केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखा है. इसके बाद महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी मांग की है कि केंद्र सरकार उन प्रवासी मजदूरों से कोई खर्च न ले, जिन्हें विशेष ट्रेन से वापस भेजा जा रहा है.

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