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पटरी पर लौटता भारतीय रेलवे: अपने नाम से चलेंगी ट्रेनें, 95% ट्रेन फिर से होंगी शुरू

कोरोना महामारी के बाद रेलवे पटरी पर लौट रहा है (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना महामारी के बाद रेलवे पटरी पर लौट रहा है (सांकेतिक तस्वीर)

Indian Railway News: इन ट्रेनों के लिए रेलवे बोर्ड की तरफ से अलग अलग ज़ोन से उन ट्रेनों की लिस्ट मंगाई जा रही है जिन्हें चलाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है. इस तरह से अब तक रेलवे बोर्ड को क़रीब 750 लोकल ट्रेनों की मांग मिल चुकी है और उम्मीद की जा रही है कि यह संख्या 1000 तक पहुंच सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 6:03 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) अप्रैल महीने में अपने पुराने रंग में नज़र आने लगेगा. कोविड महामारी (Covid Pandemic) के क़रीब एक साल के बाद रेलवे की रंगत लौटती नज़र आने वाली है. रेलवे में फिलहाल जो ट्रेनें स्पेशल ट्रेन के तौर पर चल रही हैं वो सारी ट्रेनें अपने पुराने नाम के साथ चलनी शुरू हो जाएंगी. ख़ास बात यह भी है कि रेलवे अपनी 95 फ़ीसदी पुरानी ट्रेनों को फिर से शुरू करने जा रहा है.

रेलवे कोविड से पहले हर रोज़ क़रीब 1770 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें चला रहा था. जिनमें 1350 ट्रेनें फिलहाल स्पेशल ट्रेनों के तौर पर चल रही हैं. लेकिन 10 अप्रैल तक ज़्यादातर पुरानी ट्रेनों को फिर से बहाल कर दिया जाएगा. वहीं सबसे बड़ी राहत लोकल ट्रेनों के मुसाफिरों को मिलने वाली है. रेलवे में फिलहाल ज़्यादातर लोकल ट्रेनें बंद पड़ी हैं. आम दिनों में देशभर में 3600 लोकल ट्रेनों वाले रेलवे में फिलहाल क़रीब 300 लोकल ट्रेनें चल रही हैं. लेकिन 10 अप्रैल तक क़रीब 1000 लोकल ट्रेनें फिर से पटरियों पर होंगी.

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बोर्ड ने मंगाई है ट्रेनों की सूची
इन ट्रेनों के लिए रेलवे बोर्ड की तरफ से अलग-अलग ज़ोन से उन ट्रेनों की लिस्ट मंगाई जा रही है जिन्हें चलाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है. इस तरह से अब तक रेलवे बोर्ड को क़रीब 750 लोकल ट्रेनों की मांग मिल चुकी है और उम्मीद की जा रही है कि यह संख्या 1000 तक पहुंच सकती है. फिलहाल लोकल ट्रेनों को भी मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का दर्ज़ा दिया गया है और इनमें मेल एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया लागू किया गया है.

सूत्रों की मानें तो कोविड प्रोटोकॉल भीड़ कम करने के लिए ये व्यवस्था आगे भी लागू रहने वाली है. कोविड काल में रेलवे ने हज़ारों की संख्या में ऐसी ट्रेनों और ऐसे स्टॉपेज की पहचान की है जहां ट्रेनों को रोकना किसी भी लिहाज़ से फायदेमंद नहीं है.

इस तरह से रेलवे ने ज़ीरो बेस्ट टाइम टेबल भी तैयार कर लिया है और क़रीब 15-20 % गैरजरूरी ट्रेन स्टॉपेज को ख़त्म किया जा रहा. ये ऐसे स्टापेज हैं जहां एक ट्रेन में 50 से कम लोग चढ़ते या उतरते हों. फिर भी यहां ट्रेनों को रोकना ट्रेनों की लेट लतीफी का एक बड़ा कारण था. लेकिन ज़ीरो बेस्ट टाइम टेबल में ऐसे स्टापेज को खत्म कर ट्रेनों को समय पर चलाना भी आसान हो जाएगा.
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