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चेन्नई रेल डिवीजन ने 3 साल में चूहे पकड़ने के लिए खर्च किए 6 करोड़

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 12:21 PM IST
चेन्नई रेल डिवीजन ने 3 साल में चूहे पकड़ने के लिए खर्च किए 6 करोड़
चूहे कंप्यूटर और बिजली की वायरिंग को काटकर, रेलवे ट्रेक में बिल बनाकर रेलवे को नुकसान पहुंचा रहे हैं. (File Photo)

भारतीय रेलवे (indian railways) चूहों (Rats) से परेशान है. उनको पकड़ने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. 35-35 लाख रुपये की 3 मशीने खरीदी हैं. अभी और मशीन खरीदने की योजना है.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 12:21 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railway) के किसी स्टेशन और ट्रैक पर धमाचौकड़ी मचाते चूहे अक्सर दिखाई दे जाते हैं. कभी-कभी तो बहुत ही मोटे चूहे रेल ट्रैक पर दिखाई देते हैं. रेलवे इन चूहों (Rat) को लेकर खासा परेशान है, लेकिन क्या आपको पता है कि चेन्नई रेल डिवीजन ने चूहा पकड़ने पर तीन साल में 6 करोड़ रुपये खर्च कर दिए. यह खुलासा आरटीआई (RTI) में हुआ है.

आरटीआई का जवाब देते हुए डिवीजन के अधिकारियों ने कहा है कि वो पिछले काफी समय से चूहों से परेशान हैं. रेलवे स्टेशन और इसके कोचिंग सेंटर में भी चूहे परेशान कर रहे हैं. लेकिन उनसे निपटने का काम भी चल रहा है. 17 जुलाई को आरटीआई में जो जानकारी मिली है वो बेहद ही चौंकाने वाली है. डिवीजन के अनुसार उन्होंने मई 2016 से अप्रैल 2019 तक 5.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

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चूहों से परेशान है भारतीय रेलवे


किस जगह से कितने चूहे पकड़े

चेन्नई डिवीजन से जब ये पूछा गया कि कितने चूहे पकड़े गए हैं तो उन्होंने सिर्फ 2018-19 की ही जानकारी देते हुए बताया कि 2636 चूहे पकड़े गए हैं, जिसमे चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई एग्मोर, चेंगलपट्टू, तामब्रम और जोलारपेट रेलवे स्टेशन पर 1715 चूहे पकड़े गए हैं और रेलवे के कोचिंग सेंटर में 921 चूहे पकड़े गए हैं. इस हिसाब से देखें तो चेन्नई डिवीजन ने एक चूहा पकड़ने के एवज में औसतन 22,344 रुपये खर्च किए.

रेलवे ने दी सफाई

हालांकि चेन्नई डिवीजन के अधिकारियों ने इस औसत खर्च पर अपनी सफाई दी है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह चूहा मारने पर खर्च का औसत निकालना ठीक नहीं. ये गिनती तो मरे हुए उन चूहों की है जिन्हें पकड़ा गया. जो दवा के असर से कहीं और जाकर मरे उनका हिसाब नहीं है. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि एक चूहे को पकड़ने पर 22 हजार रुपये खर्च हुए.
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दक्षिण रेलवे ने अपनी सफाई में कहा है कि इतने रुपये सिर्फ चूहे पकड़ने पर खर्च नहीं हुए. इसमें कई सारे और काम भी किए गए. रेलवे के मुताबिक, ट्रेन के डिब्बों में रोडेंट कंट्रोल का काम हुआ है. जिन कोचेस में ये काम किए गए हैं उनमें एसी फर्स्ट कोच, अन्य एसी कोच, पैंट्री कार और गाड़ी के अन्य कोच भी शामिल हैं.  इसके मुताबिक, रोडेंट कंट्रोल का काम पिट लाइंस, कोचिंग डिपो और यार्ड में भी हुआ है.

रेलवे की टीम ने ट्रैक का संयुक्त सर्वेक्षण किया. इस दौरान जहां भी छोटे, मध्यम और बड़े बिल/मांद मिले उन्हें मिट्टी और पत्थरों से भरा गया. रेलवे ने बताया कि इन तमाम काम के दौरान जिन चूहों को हमने पकड़ लिया उनकी गिनती हो गई और उस नंबर को हमने रिकॉर्ड के लिए रख लिया.


अधिकारियों ने बताया कि रोडेंट कंट्रोल का काम चेन्नई डिवीजन के तीन कोचिंग डिपो में हुआ. इसमें कुल 1653 कोच में मेंटेनेंस का काम किया गया. जिन यार्डों में ये काम हुए उनका कुल क्षेत्र 1.80 लाख वर्ग मीटर था. इसके साथ ही 21 पिटलाइन पर भी यह काम हुआ. प्रत्येक पिटलाइन की औसतन लंबाई 550 मीटर है. अधिकारियों ने कहा कि स्टेशन और ट्रेन को साफ-सुथरा रखना हमारी उच्च प्राथमिकता है.

 

 

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First published: October 9, 2019, 12:21 PM IST
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