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36 लाख प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए अगले दस दिनों में 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाएगा रेलवे

भाषा
Updated: May 23, 2020, 8:32 PM IST
36 लाख प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए अगले दस दिनों में 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाएगा रेलवे
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के खर्च का 85 फीसद हिस्सा केंद्र वहन करता है (सांकेतिक फोटो)

रेलवे ने करीब 36 लाख फंसे हुए प्रवासियों (Migrants) को पहुंचाने के लिए पिछले 23 दिनों में 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें (Shramik Special Trains) चलायी हैं. उन्होंने कहा कि देशभर में अब 1000 टिकट काउंटर खुल चुके हैं और जल्द ही और काउंटर खुलेंगे.

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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने कोविड-19 लॉकडाउन (Covid-19 Lockdown) के चलते फंसे हुए करीब 36 लाख प्रवासी श्रमिकों (Migrant Workers) को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए अगले दस दिनों में 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का कार्यक्रम तैयार कर लिया है. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने शनिवार को यह जानकारी दी.

यादव ने बताया कि रेलवे ने करीब 36 लाख फंसे हुए प्रवासियों (Migrants) को पहुंचाने के लिए पिछले 23 दिनों में 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें (Shramik Special Trains) चलायी हैं. उन्होंने कहा कि देशभर में अब 1000 टिकट काउंटर खुल चुके हैं और जल्द ही और काउंटर खुलेंगे.

लॉकडाउन से पहले का सामान्य किराया ही वसूल रहा है रेलवे
रेलवे बोर्ड (Railway Board) के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमने पिछले चार दिनों में रोजाना औसतन 260 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलायी हैं और प्रतिदिन तीन लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया है.’’







जब उनसे एक जून से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों के किराए के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि रेलवे लॉकडाउन से पहले का सामान्य किराया ही वसूल रहा है.

उन्होंने दोहराया कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के खर्च का 85 फीसद हिस्सा केंद्र वहन करता है जबकि राज्य भाड़े के रूप में बस 15 फीसद का भुगतान कर रहे हैं.

अम्फान के चलते बंगाल में स्थगित की गई प्रवासी स्पेशल ट्रेनें
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चक्रवात अम्फान (Cyclone Amphan) के चलते 26 मई तक राज्य में सभी प्रवासी स्पेशल ट्रेनें स्थगित करने का अनुरोध करते हुए भेजे गये पत्र के संबंध में यादव ने कहा कि ऐसा प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ है और चीजें शीघ्र ही सामान्य हो जाएंगी.

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने मुझे पत्र लिखा कि स्थिति को सामान्य बनाने के लिए कार्य चल रहा है, और ऐसे में वे हमें शीघ्र ही बतायेंगे कि कब वे ट्रेनों को स्वीकार कर पायेंगे. जितना जल्दी वे हमें मंजूरी देंगे, हम पश्चिम बंगाल के लिए ट्रेनें चलायेंगे.’’

रेलवे ने बिना भीड़भाड़ वाले मार्ग अपनाने का किया फैसला
कुछ ट्रेनों को लंबे मार्गों से उनके गंतव्य तक भेजने के बारे में पूछे गये सवाल पर बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि ज्यादातर श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के आखिरी स्टेशन उत्तर प्रदेश और बिहार (Bihar) में हैं, ऐसे में रेलवे ने इन ट्रेनों के लिए बिना भीड़भाड़ वाले मार्ग को अपनाने का फैसला किया है जो थोड़ा लंबा मार्ग हो जाता है.

उन्होंने कहा, ‘‘यह तरीका सामान्य दिनों में भी भीड़भाड़ से बचने के लिए अपनाया जाता है. उन्होंने कहा कि रेलवे एक जून से 100 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाएगा.

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First published: May 23, 2020, 7:10 PM IST
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