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भारतीय वैज्ञानिक ने जीता यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज ने किया सम्मान

प्रोफेसर पर्मेश्वरन अजीत (फोटो: International Centre for Theoretical Sciences of the Tata Institute of Fundamental Research)
प्रोफेसर पर्मेश्वरन अजीत (फोटो: International Centre for Theoretical Sciences of the Tata Institute of Fundamental Research)

2004 से LIGO साइंटिफिक कॉलेबोरेशन के सदस्य अजीत और ICTS-TIFR के रिसर्च ग्रुप ने इस खोज में काफी बड़ा योगदान दिया है. उनके समूह ने ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेशन से मिली आइंस्टीन की थ्योरी के परीक्षण का भी एक तरीका निकाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 12:40 PM IST
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नई दिल्ली. इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरिटिकल साइंसेज ऑफ द टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (International Centre for Theoretical Sciences of the Tata Institute of Fundamental Research(ICTS-TIFR)) के प्रोफेसर परमेश्वरन अजीत (Professor Parmeshwaran Ajith) ने फिजिक्स (Physics) के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन किया है. प्रोफेसर अजीत को इटली की वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज (World Academy of Sciences) ने फिजिक्स साइंसेज के लिए साइंटिस्ट अवॉर्ड (TWAS-CAS) से नवाजा है. अजीत ने फिजिक्स और गुरुत्वाकर्षण लहरों की एस्ट्रोफिजिक्स पर रिसर्च की थी. खास बात है कि इन लहरों का अनुमान महान वैज्ञानिक एलबर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) ने सदियों पहले लगाया था.

यह अवॉर्ड विकासशील देशों के वैज्ञानिकों का सम्मान करता है. अजीत कहते हैं, 'मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे शानदार सिखाने वाले, साथ देने वाले और छात्र मिले, जिनकी  वजह से मेरा काम पूरा हो सका.' इन लहरों का पता 2015 में LIGO ऑब्जर्वेशन में लगा था. 2004 से LIGO साइंटिफिक कॉलेबोरेशन के सदस्य अजीत और ICTS-TIFR के रिसर्च ग्रुप ने इस खोज में काफी बड़ा योगदान दिया है.

उनके समूह ने ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेशन से मिली आइंस्टीन की थ्योरी के परीक्षण का भी एक तरीका निकाला है. साथ ही इस टीम ने इन लहरों को तैयार करने वाले ब्लैक होल्स की स्टडी को समझने का उपाय तैयार किया.
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वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज इटली के ट्रीस्टे में स्थित है. यह संस्था विकासशील देशों में रिसर्च, शिक्षा, नीति और कूटनीति के जरिए स्थायी समृद्धि का समर्थन करती है. TWAS-CAS यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड की शुरुआत साल 2020 में हुई. खास बात है कि इस अवॉर्ड को 45 साल से ज्यादा उम्र के वैज्ञानिकों को नहीं दिया जाता. इस अवॉर्ड के पहले संस्करण में फिजिकल साइंसेज के क्षेत्र में सम्मान दिया गया.
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