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जापान में होने हैं ओलिंपिक, लेकिन भारतीय निशानेबाजों को कोरिया में करनी होगी तैयारी, ये है वजह

News18Hindi
Updated: January 10, 2020, 12:10 PM IST
जापान में होने हैं ओलिंपिक, लेकिन भारतीय निशानेबाजों को कोरिया में करनी होगी तैयारी, ये है वजह
भारतीय निशानेबाजी में काफी ओलिंपिक कोटा हासिल कर चुके हैं

इस साल जुलाई में जापान (Japan) के टोक्यो (Tokyo) में ओलिंपिक खेल (Olympic) होने वाले हैं

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  • Last Updated: January 10, 2020, 12:10 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय निशानेबाज इस साल होने वाले जापान (Japan) के टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक खेलों के लिए सीधे वहां ना जाकर कोरिया (Korea) के चांगवॉन (Changwon) में अपना बेस बनाएंगे. ऐसे करने के पीछे की वजह है जापान (Japan) के कड़े कानून. जापान (Japan) ऐसा पहला देश है जहां बंदूकों से जुड़े कानून लागू किए गए हैं. यह कानून इतने कड़े हैं कि खिलाड़ियों के लिए वहां रहकर ट्रेनिंग करना काफी मुश्किल है.

जापान के कड़े कानूनों से मुश्किल में निशानेबाज
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympic) की आयोजन समिति ने निशानेबाजों के लिए नियम बनाए हैं वह बहुत कड़े हैं. नियमों के मुताबिक हर एक निशानेबाज केवल 800 राउंड के लिए ही गोलियां रख सकता है. यह गोलियां रखने के लिए हर वेन्यू पर खिलाड़ियों को लॉकर दिया जाएगा. अगर कोई भी खिलाड़ी तय सीमा से ज्यादा गोलियां रखता है या फिर लॉकर पर ताला लगाना भूल जाता है तो उन्हें जापान के कानून तोड़ने के तहत सजा दी जाएगी.

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टोक्यो ओलिंपिक में भारत को शूटिंग से मेडल काफी उम्मीदें हैं


गोलियों की सीमा के कारण अभ्यास करने में होगी मुश्किल
भारतीय टीम रियो ओलिंपिक (Rio Olympic) में खेलों के शुरू होने से एक हफ्ते पहले वहां पहुंच गए थे. हालांकि अगर निशानेबाज टोक्यो में ऐसा करते हैं तो खेलों के शुरू होने से पहले ही उनकी गोलियां खत्म हो जाएंगी. पिस्टल कोच समरेश जुंग ने बताया, 'गोलियों की जो सीमा तय की गई है वह मुकाबले से एक शाम पहले और मुकाबले के दिन में ही खत्म हो जाएंगीं. जैसे 50 मीटर राइफल थ्री पॉजीशन में क्वालिफिकेशन राउंड के लिए 120 राउंड की गोलियां चाहिए और 40 उससे पहले प्रैक्टिस के लिए. वहीं अगर निशानेबाज फाइनल तक पहुंचता है तो उसे 45 राउंड गोलियां और चाहिए और कम से कम 15 प्रैक्टिस के लिए जिसका मतलब है कि मुकाबले के दिन के लिए 250 राउंड गोलियां चाहिए.'

उन्होंने आगे कहा,  'हम एक हफ्ते पहले वहां जाते हैं और हर रोज 100 राउंड गोलियों से अभ्यास करते हैं तो मुकाबले के लिए निशानेबाजों के पास केवल 100 राउंड की गोलियां ही होगी. यहीं कारण कि भातीय निशानेबाज टोक्यो (Tokyo) जाने से पहले अभ्यास के लिए कोरिया (Korea) में अपना प्री-ओलिंपिक बेस बनाएंगे.'
जीना खिट्टा हिमाचल प्रदेश के शिमला के रोहडू से हैं. (फोटो-@Indianshooting)
भारत के लिए निशानेबाजी हमेशा से ही ऐसा खेल रहा है जिसमें उसे काफी ज्यादा मेडल होते हैं


कड़े नियमों के कारण जापान मेजबानी में काफी पीछे
जापान (Japan) के कड़े कानून ही वजह है कि अब तक वहां बहुत कम अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट हुए हैं. चार बार एशियन चैंपियनशिप के अलावा जापान में 1955 में और 1999 में केवल दो वर्ल्डकप की मेजबानी ही की है. इस साल ओलिंपिक में भी खिलाड़ियों को क्यूआर कोड दिए जाएंगे जिसके बिना वह अपनी राइफल या पिस्टल का इस्तेमाल नहीं कर सकते. भारत में शूटिंग के नियम काफी उदार हैं. भारत में 16 साल के सौरभ चौधरी (Sourab choudhary) देश के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करके मेडल लाए जबकि जापान (Japan) में यह उम्र निशानेबाजी सीखने की शुरुआत करने की उम्र है. 16 साल पहले खिलाड़ी लेसर राइफल या पिस्टल का इस्तेमाल करते हैं. बीबीसी के मुताबिक जापान पूरी दुनिया में पहला देश है जिसने बंदूकों से जुड़े कड़ नियम लागू किए हैं. इस नियम का ही नतीजा है कि जापान में दुनिया के सबसे कम अपराध होते हैं.

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First published: January 10, 2020, 12:10 PM IST
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