इन लोगों के हैं भारत की ‘कंकाल झील’ में पाए गए 1000 से ज्यादा कंकाल

हिमालय (Himalaya) पर समुद्र तल (Sea Level) से पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित रूपकुंड झील (Roopkund Lake) में समय-समय पर बड़ी संख्या में कंकाल (Skeleton) पाए जाने की घटनाओं ने वैज्ञानिकों को हैरत में डाला है.

News18Hindi
Updated: August 21, 2019, 6:45 PM IST
इन लोगों के हैं भारत की ‘कंकाल झील’ में पाए गए 1000 से ज्यादा कंकाल
भारत की ‘कंकाल झील’
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Updated: August 21, 2019, 6:45 PM IST
वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय दल का कहना है कि उत्तराखंड की रहस्यमयी रूपकुंड झील (Roopkund Lake) दरअसल पूर्वी भूमध्यसागर से आई एक जाति विशेष की कब्रगाह है जो भारतीय हिमालयी क्षेत्र (Himalayan region) में 220 वर्ष पहले वहां आए थे. इन वैज्ञानिकों ने ‘नेचर कम्युनिकेशन्स’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा है कि रूपकुंड झील में जो कंकाल मिले हैं वे आनुवंशिक रूप से अत्यधिक विशिष्ट समूह के लोगों के हैं, जो एक हजार साल के अंतराल में कम से कम दो घटनाओं में मारे गए थे.

हिमालय (Himalaya) पर समुद्र तल (Sea Level) से पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित रूपकुंड झील में समय समय पर बड़ी संख्या में कंकाल पाए जाने की घटनाओं ने वैज्ञानिकों को हैरत में डाला.

लंबे वक्त से रूपकुंड झील रही है रहस्य का विषय
झील के आस पास यहां-वहां बिखरे कंकालों के वजह से इसे ‘कंकाल झील’ अथवा ‘रहस्यमयी झील’ भी कहा जाने लगा है. उत्तर प्रदेश के बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान के नीरज राय कहते हैं कि रूपकुंड झील के बारे में हमेशा यह बातें होती रही हैं कि ये लोग कौन थे, वे रूपकुंड झील में क्यों आए और उनकी मौत कैसे हुई.

शोधकर्ताओं ने पाया कि इस स्थान की इतिहास जितनी कल्पना की गई थी उससे भी जटिल है.

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भारतीय मूल से अलग लोगों के हैं ये कंकाल
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हैदराबाद में सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी से कुमारसामी थंगराज कहते हैं कि 72 कंकालों के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (DNA) से पता चला कि वहां कई अलग-अलग समूह मौजूद थे. इसके अलावा इनके रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला कि सारे कंकाल एक ही समय के नहीं हैं जैसा कि पहले समझा जाता था.

गहन अध्ययन में पता चला कि दो प्रमुख आनुवंशिक समूह एक हजार साल के अंतराल में वहां मारे गए. शोधकर्ताओं का मानना है कि सात से 10 शताब्दी के बीच भारतीय मूल के लोग अलग अलग घटनाओं में रूपकुंड में मारे गए थे.

राय ने कहा कि अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि ये लोग रूपकुंड झील क्यों आए थे और उनकी मौत कैसे हुई.

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First published: August 21, 2019, 5:33 PM IST
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