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भारतीय टैंकों की रफ्तार को नहीं रोक पाएंगे मुश्किल रास्ते, सेना को मिले नए ब्रिजिंग सिस्टम

इस तरह के 5 ब्रिज को एक के साथ एक जोड़ा जा सकता है.

इस तरह के 5 ब्रिज को एक के साथ एक जोड़ा जा सकता है.

Short Span Bridging System: भारतीय सेना (Indian Army) मूवमेंट के दौरान किसी भी तरह के पानी वाले अवरोध से आसानी से पार पा सकेगी. इस ब्रिज की खासियत है कि ये महज 9 से 10 मिनट में खुल जाएगा और दस मीटर की चौड़ाई वाले नदी-नालों पर एक मजबूत पुल तैयार कर देगा.

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नई दिल्ली. भारतीय सेना में शुक्रवार को 12 नए दस मीटर शार्ट स्पैन ब्रिज शामिल किए गए हैं. इससे सीमा पर चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) दोनों के साथ तनाव का एक साथ सामना कर रहे भारत की ताकत में और इजाफा होगा. सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (General Manoj Mukund Naravane) ने जानकारी दी कि इनका निर्माण भारत में ही हुआ है. उन्होंने कहा है कि इससे सेना की काबिलियत और बढ़ेगी. इनकी मदद से टैंकों की आवाजाही आसान हो सकेगी.

सेना प्रमुख नरवणे ने इस मौके पर कहा कि ये शॉर्ट स्पैन ब्रिज भारत में ही बना है आत्मनिर्भर भारत के तहत सफलपूर्ण कदम है. 5 और 15 मीटर के ब्रिज पहले से थे. 10 मीटर ब्रिज की कमी महसूस होती थी जो कि आज पूरी हो गई, वेस्टर्न फ्रंट पर मैकेनाइज कॉलम की ताकत बढ़ेगी. इस ब्रिज को डीआरडीओ ने डिजाइन किया और लार्सन एंड टर्बो ने निर्माण किया है. भारतीय सेना को और ऐसे कुल 100 ब्रिज मिलने हैं. उम्मीद की जा रही कि सभी ब्रिज 2023 तक सेना को मिल जाएंगे.

ब्रिज के बारे में जानिए
इस ब्रिज सिस्टम से भारतीय सेना मूवमेंट के दौरान किसी भी तरह के पानी वाले अवरोध से आसानी से पार पा सकेगी. इसकी खासियत है कि ये महज 9 से 10 मिनट में खुल जाएगा और दस मीटर की चौड़ाई वाले नदी-नालों पर एक मजबूत पुल तैयार कर देगा. इस तरह के 5 ब्रिज को एक साथ जोड़ा जा सकता है. साथ ही भारतीय सेना में पहले से ही मौजूद 15 मीटर और 5 मीटर स्पैन वाले ब्रिज को जोड़कर 70 मीटर से ज्यादा बडे़ किसी भी कैनाल को आसानी से पार किया जा सकता है.

चूंकि भारतीय और पाकिस्तान सीमा पर सबसे चौड़ी कैनाल 70 मीटर से ज्यादा नहीं है, तो ऐसे में मैकेनाइज इंफेन्ट्री और टैंक को पाकिस्तान सीमा तक आसानी से ले जाया जा सकता है. कोर ऑफ इंजीनियर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह का कहना है कि अभी पाकिस्तान फ्रंट पर इन ब्रिज की तैनाती की जा रही है और चीन के फ्रंट पर भी भारतीय सेना के भारी भरकम टैंक मूवमेंट के लिए ब्रिज पर काम जारी है. ये ब्रिज क्लास 70 हैं यानी कि इस पर से भारतीय सेना के टैंक आसानी से गुजर सकेंगे. कह सकते है कि टैंक के मूवमेंट के लिए ही खास तौर पर इसे तैयार किया गया है.

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ऐसा नहीं है कि भारत के पास इस तरह के ब्रिज नहीं हैं. भारतीय सेना के पास 15 मीटर की 30 यूनिट और 5 मीटर स्पैन वाले ब्रिज की 20 यूनिट पहले से ही मौजूद हैं. पाकिस्तान सीमा और चीन के साथ लगती एलएसी में हालात थोड़े अलग हैं, लेकिन जिस तरह से पिछले साल भारी भरकम टैंक को लद्दाख के इलाके में पहुंचाया गया ऐसे में उन ब्रिज की जरूरत भी बढ़ गई है जो कि हाई ऑल्टेट्यूड इलाके में भी आसानी से अपने कम को अंजाम दे सकें.

दरअसल, पिछले एक साल में भारतीय सेना ने कम समय में अपने टैंकों को लद्दाख के इलाकों में तैनात कर के चीन को बैकफुट पर ला दिया. जिस तरह तरह से तैनाती हुई वो एक जटिल प्रक्रिया थी क्योंकि  इतनी ऊंचाई वाले इलाके में खराब मौसम, ज्यादा ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और छोटे-बडे़ नदी-नालों पर से तोपों को ले जाना किसी चुनौती से कम नही था, लेकिन भारतीय सेना ने उस कारनामे को कर दिया.

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