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नहीं बचेगा दुश्मन: भारत ने LAC पर सैनिकों को कंधे पर रखकर चलाने वाली मिसाइलों से किया लैश

ब्रिगेड कमांडर-स्तरीय वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय क्षेत्र में चुशूल में सुबह 10 बजे शुरू हुई (फाइल फोटो)

ब्रिगेड कमांडर-स्तरीय वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय क्षेत्र में चुशूल में सुबह 10 बजे शुरू हुई (फाइल फोटो)

इस एयर डिफेंस मिसाइल (Air Defence Missiles) को भारतीय सैनिक कंधे पर रखकर फायर सकते हैं. सैनिक वायुसीमा का उल्लंघन करने वाले दुश्मनों के हेलिकॉप्टर और ड्रोन्स को निशाना बना सकते हैं.

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    नई दिल्ली. चीन के साथ सीमा विवाद (India-China Standoff) के मद्देनजर भारत LAC पर अपनी ठोस तैयारियां कर रहा है. इसी क्रम में अब भारतीय सैनिकों को कंधे पर रखकर चलाने वाली घातक मिसाइलों से लैश किया गया है. इस एयर डिफेंस मिसाइल (Air Defence Missiles) को भारतीय सैनिक कंधे पर रखकर फायर सकते हैं. सैनिक वायुसीमा का उल्लंघन करने वाले दुश्मनों के हेलिकॉप्टर और ड्रोन्स को निशाना बना सकते हैं.

    लद्दाख में तैनात किए HAL के 2 हल्के युद्धक हेलीकॉप्टर
    इससे पहले भारत ने लद्दाख सीमा पर 2 हल्के युद्धक हेलीकॉप्टर (Light Combat Helicopters) भी तैनात किए हैं. ये हेलीकॉप्टर हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाए गए हैं. ये दुनिया में सबसे हल्का युद्धक हेलीकॉप्टर है जिसे HAL ने तैयार किया है. इस हेलीकॉप्टर को भारतीय सेनाओं की जरूरत के हिसाब से तैयार किया गया है. इस हेलीकॉप्टर को आत्मनिर्भर भारत से भी जोड़कर दिखाया गया है.

    हेरॉन ड्रोन
    कुछ दिनों पहले समाचार एजेंसी एएनआई ने सरकार के एक सूत्र के हवाले से खबर दी थी कि वर्तमान स्थितियों को देखते हुए हेरॉन यूएवी की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है. इसी वजह से और ज्यादा संख्या में हेरॉन यूएवी का ऑर्डर देने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि यह नहीं बताया गया है कि कुल कितने हेरॉन मंगाए जाएंगे.

    एंटी टैंक मिसाइल
    दूसरी तरफ आर्मी भी इजरायल से स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने पर विचार कर रही है. इन मिसाइलों की एक खेप भारत के पास बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भी आई थी. पिछली बार सेना को 12 लॉन्चर और 200 स्पाइक मिसाइलें मिली थीं. सूत्रों का कहना है कि अब हम एंटी टैंक मिसाइल की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. इस बीच DRDO भी पोर्टेबेल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल तैयार कर रहा है. कहा जा रहा है कि डीआडीओ के इस प्रोजेक्ट के जरिए सेना को बल्क में ये मिसाइल सप्लाई करने में आसानी होगी. इसके अलावा सेना की तरफ से पहले ही स्पाइस 2000 बम खरीदे जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है.

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