Home /News /nation /

भारत का चीन पर निशाना, कहा- बिना किसी शर्त या गुप्त एजेंडा के कर रहे अफ्रीका की मदद

भारत का चीन पर निशाना, कहा- बिना किसी शर्त या गुप्त एजेंडा के कर रहे अफ्रीका की मदद

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को आड़े हाथ लिया (फाइल फोटो)

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को आड़े हाथ लिया (फाइल फोटो)

India in United Nations: विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में अफ्रीकी देशों का प्रतिनिधित्व से लगातार इनकार करना परिषद की सामूहिक प्रामाणिकता पर ‘धब्बा’ है. विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफ्रीकी आवाज और सोच पर ध्यान देने की जरूरत है. अफ्रीका को अफ्रीकियों से बेहतर कोई नहीं जान सकता. हमने इतिहास में देखा है कि अफ्रीका को शामिल किये बिना अफ्रीकी समस्याओं का बाहरी समाधान पेश करने से अफ्रीकी जनता के हित नहीं सधे हैं. इस संकीर्ण सोच को बदलने की जरूरत है.

अधिक पढ़ें ...

    संयुक्त राष्ट्र. विदेश मंत्री एस जयशंकर (MEA S Jaishankar) ने चीन को आड़े हाथ लेते हुए गुरुवार को कहा कि अफ्रीका को भारत का समर्थन हमेशा बिना किसी शर्त या गुप्त एजेंडा के रहा है. ‘संयुक्त राष्ट्र और उप-क्षेत्रीय संगठनों (अफ्रीकी संघ) के बीच सहयोग’ विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली चर्चा में जयशंकर ने कहा, ‘‘हमने अफ्रीका की प्राथमिकताओं, सुविधा और आकांक्षाओं के अनुरूप उसके साथ काम किया है. हमारा मानना है कि वैश्विक व्यवस्था में सच्ची बहु-ध्रुवीयता के लिए अफ्रीका का बढ़ना जरूरी है और हम ऐसा होने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’’

    उन्होंने कहा, ‘‘भारत का समर्थन हमेशा बिना किसी शर्त या किसी गुप्त एजेंडा के रहा है. यह 41 अफ्रीकी देशों में रियायती वित्तपोषण के तहत लागू हमारी 184 परियोजनाओं से जाहिर है.’’ जयशंकर ने कहा कि अनेक अफ्रीकी देशों को प्रदान की गयीं दवाओं, टीकों, स्वास्थ्य उपकरणों, एंबुलेंसों, वाहनों और खाद्यान्नों के जरिये भी अफ्रीका को भारत का समर्थन देखा जा सकता है.

    ये भी पढ़ें- मेट्रो में अब नहीं होगा सिग्नल फेल! नई तकनीक के जरिये ट्रेनों को बेहतर तरीके से ऑपरेट करेगी DMRC

    अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफ्रीकी आवाज पर ध्यान देने की जरूरत
    वहीं विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में अफ्रीकी देशों का प्रतिनिधित्व से लगातार इनकार करना परिषद की सामूहिक प्रामाणिकता पर ‘धब्बा’ है. विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफ्रीकी आवाज और सोच पर ध्यान देने की जरूरत है. अफ्रीका को अफ्रीकियों से बेहतर कोई नहीं जान सकता. हमने इतिहास में देखा है कि अफ्रीका को शामिल किये बिना अफ्रीकी समस्याओं का बाहरी समाधान पेश करने से अफ्रीकी जनता के हित नहीं सधे हैं. इस संकीर्ण सोच को बदलने की जरूरत है.’’

    जयशंकर ने कहा कि सुरक्षा परिषद में ही बदलाव शुरू होना चाहिए.

    उन्होंने अफ्रीकी देशों के आतंकवाद निरोधक अभियानों में समर्थन की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि अफ्रीका में आतंकवाद फैलना बहुत चिंता की बात है जैसा कि साहेल, सोमालिया और मध्य तथा पूर्वी अफ्रीका की चुनौतियों से जाहिर है.

    जयशंकर ने कहा कि सोमालिया में अफ्रीकी संघ के मिशन (एमीसोम), जी-5 साहेल संयुक्त बल और बहुराष्ट्रीय संयुक्त कार्य बल (एमएनजेटीएफ) की पहलों को सुरक्षा परिषद तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से और अधिक समर्थन की जरूरत है.

    उन्होंने कहा कि अफ्रीका के आतंकवाद निरोधक अभियानों को सहयोग देने के संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के आह्वान का भारत समर्थन करता है. जयशंकर ने कहा कि भारत अपने खुद के अनुभव से मानता है कि अफ्रीका में संघर्षों की मूल वजह उसके औपनिवेशिक इतिहास में है.

    Tags: External Affairs Minister S Jaishankar, MEA, South africa

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर